एसएमएस के सभी कोरोनावायरस पॉजिटिव मरीज आरयूएचएस में होंगे शिफ्ट, 500 बेड का हॉस्पिटल बिना अधीक्षक कैसे चलेगा?

नेशनल दुनिया, जयपुर।

कोविड-19 की वैश्विक महामारी के बीच राजस्थान सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए सवाई मानसिंह अस्पताल के भर्ती सभी कोरोनावायरस संदिग्ध मरीजों को राजस्थान स्वास्थ्य एवं विज्ञान विश्वविद्यालय में स्थानांतरित किए जाने का निर्णय किया है।

500 बेड के अस्पताल में मरीजों को शिफ्ट करके यहीं पर उनका उपचार किया जाएगा। अभी जयपुर में सभी उपचारित मरीजों का यहीं पर इलाज होगा।

9 मई को स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में यह फैसला किया गया है। इस बैठक में हिस्सा लेते हुए सवाई मानसिंह अस्पताल मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ सुधीर भंडारी सहित आरयूएचएस कॉलेज के प्रिंसिपल भी शिरकत कर रहे थे।

मजेदार बात यह है कि 500 बेड के अस्पताल में न तो अधीक्षक है और न ही उपाध्यक्ष है। ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि कोरोना पॉजिटिव और संदिग्ध मरीजों के उपचार के लिए चिकित्सा प्रबंधन किसके हाथ में रहेगा।

सवाई मानसिंह अस्पताल मरीजों के लिए होगा सुरक्षित

सवाई मानसिंह अस्पताल अब पहले की भांति पुनः अन्य मरीजों के उपचार के लिए उपलब्ध होगा। सरकार ने इसको लेकर कार्य शुरू कर दिया है। मरीजों को धीरे धीरे स्थानांतरित किया जा रहा है।

टीचर्स एसोसिएशन ने कार्यवाहक या नियमित अधीक्षक लगाने की मांग की

Ruhs teacher association ने Hospital में कार्यवाहक / नियमित अधीक्षक लगाने के लिए सरकार को पत्र लिखकर गुहार लगाई है, जिससे कोरोना मरीजों के इलाज सुचारू रूप से हो सके।

टीचर्स का कहना है कि आरयूएचएस को डेडिकेटेड कोरोना चिकित्सालय बनाया गया है तथा एसएमएस चिकित्सालय से कोरोना मरीजों को यहां शिफ्ट करने के लिए उच्च स्तर पर निर्णय लिया गया है।

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अधीक्षक नहीं होने से आने वाले दिनों में कोरोना के मरीजों की संख्या बढने पर अव्यवस्था हो सकती है। इसी को मध्यनजर रखते हुए आरयूएचस की टीचर्स एसोसिएशन ने भी चिकित्सा मंत्री, शासन सचिव चिकित्सा शिक्षा, कुलपति, कुलसचिव से अधीक्षक पर फैसला की अपील की है।

इन सभी अधिकारियों को पत्र लिखकर कार्यवाहक/नियमित अधीक्षक नियुक्त करने की मांग की है, जिससे चिकित्सालय में मरीजों की संख्या बढने पर अव्यवस्था नहीं हो।

बता दें कि RUHS Hospital में अधीक्षक, अतिरिक्त अधीक्षक और उपअधीक्षक सभी प्रशासनिक पद खाली पड़े हैं। अस्पताल को शुरू हुए 1 वर्ष से अधिक हो गया, परन्तु आज तक इन पदों पर किसी को नियुक्त नहीं किया गया है।

लिखा गया कि बिल्डिंग बन गई, मुख्यमंत्री ने एक साल पहले उदघाटन कर दिया। अब डेडिकेटेड कोरोना चिकित्सालय बन गया है। और एसएमएस को नान कोविड बना कर वहां के सारे कोरोना मरीजों को आरयूएचएस में शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया है, परन्तु आरयूएचएस अस्पताल में अधीक्षक पद खाली है।


डॉक्टर्स का कहना है कि अधीक्षक किसी भी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल का सर्वोच्च पद होता है। सभी सेवाओं और व्यवस्थाओं के लिए अधीक्षक ही जिम्मेदार भी होता है।