राजस्थान में इंटर्न डॉक्टर श्रमिक से भी बेकार! एन—95 मास्क तक के पैसे नहीं देती सरकार

राजस्थान में इंटर्न डॉक्टर श्रमिक से भी बेकार! एन—95 मास्क तक के पैसे नहीं देती सरकार
राजस्थान में इंटर्न डॉक्टर श्रमिक से भी बेकार! एन—95 मास्क तक के पैसे नहीं देती सरकार (File Photo)

नेशनल दुनिया, जयपुर।
कोरोना वॉरियर्स के तौर पर भले ही आप मेडिकल इंटर्न को योद्धा मानते हों, किंतु सरकार ऐसा नहीं मानती है! यदि मानती तो उसको स्टाइपेंड के तौर पर इतना पैसा तो देती कि वह अपने लिए कम से कम एन—95 मास्क तो खरीद ही सकता।

जी हां! राजस्थान सरकार मेडिकल इंटर्न, यानी एमबीबीएस कर रहे छात्रों को प्रतिदिन केवल 233 रुपये स्टाइपेंड दिया जाता है, जबकि राज्य में ही कुशल श्रमिक की मजदूरी 237 रुपये हैं। और एन—95 मास्क की कीमत कम से कम 270 से 350 रुपये है।

हर साल बढ़ जाती है 10 फीसदी फीस

बता दें कि राज्य में एमबीबीएस की फीस 1.22 लाख रुपये हैं। यहां पर 8 मेडिकल कॉलेजों में 1350 इंटर्न डॉक्टर हैं, जो कोरोना उपचार में लगे हुए हैं। जबकि हकिकत यह है कि राजस्थान में अन्य सभी राज्यों से कम स्टाइपेंड दिया जा रहा है। फीस भी हर साल 10 फीसदी बढ़ाई जाती है।

233 रुपयों में से एन—95 मास्क भी नहीं मिलता

बात करें मेडिकल इंटर्न के स्टाइपेंड की तो उनको प्रतिदिन केवल 233 रुपये दिये जाते हैं, जबकि राज्य के 8 मेडिकल कॉलेजों के 1350 इंटर्न ड्यूटी दे रहे हैं, जो स्टाइपेंड के भरोसे तो एन—95 मास्क भी नहीं खरीद सकते। क्योंकि इस मास्क की कीमत ही 270 से लेकर 350 रुपये है।

प्रियंका वाड्रा को याद दिलाई राज्य की हालत

कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने स्टाइपेंड को लेकर ट्वीट किया और उत्तर प्रदेश सरकार को घेरने का प्रयास किया, लेकिन राज्य के एमबीबीएस स्टूडेंट्स ने उनको राज्य की हालात बताकर चुप करा दिया। क्योंकि यूपी में स्टाइपेंड राजस्थान से 17 रुपये अधिक, यानी 250 रुपये मिलते हैं।

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क्वारेंटाइन में रहने वालों पर 2440, हमें 233 रुपये

इस मामले में एमबीबीएस के स्टूडेंट्स कहते हैं कि हमको सरकार ने कोरोना वॉरियर्स की संज्ञा दी है, जबकि हकिकत यह है कि हमारी हालात क्वाइरेंटाइन सेंटर में रहने वाले मरीजों से भी बदत्तर है। वहां पर एक मरीज पर प्रतिदिन 2440 रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि हमको केवल 233 रुपये दिए जा रहे हैं।

2017 के बाद नहीं बढ़ा स्टाइपेंड

डॉक्टर बनने के लिए पढ़ाई कर रहे मेडिकल छात्र बताते हैं कि वर्ष 2017 में आखिरी बार राज्य सरकार ने स्टाइपेंड बढ़ाया गया था, जबकि फीस में हर साल 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी जाती है। इससे पहले 2017 में स्टाइपेंड 3500 रुपये से बढ़ाकर 7000 रुपये महीना किया गया था।

पंजाब और हरियाणा सरकारों ने बढ़ाया

कोरोना काल में पंजाब और हरियाणा की सरकारों ने इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाया है। हरियाणा सरकार ने 12000 से बढ़ाकर 24000 किया है। जबकि पंजाब सरकार ने भी 15000 से बढ़ाकर 24000 कर दिया है।

सबसे अधिक केंद्रीय विश्वविद्यालयों में

स्टाइपेंड के सर्वाधिक मिलने की बात की जाए तो केंद्रीय विश्वविद्यालयों के मेडिकल स्टूडेंट्स को 23500 रुपये मिलते हैं। इसके बाद आसाम में 30 हजार, उडिसा में 20 हजार, त्रिपुरा में 18 हजार, चंढीगढ़ में 17 हजार रुपये मिलते हैं। राजस्थान का नंबर बिहार से भी काफी नीचे 15वें स्थान पर आता है।

इंटर्न को अपने पैसों से ये चीजें खरीदनी होती हैं

इंटर्न को स्टेथोस्कोप, जो कि 1000 से 7000 रुपये तक का आता है, खुद ही खरीदना होता है। इसी तरह से 2000 को बीपी इंस्टूमेंट, 270 से 350 रुपयों के एन—95 मास्क, 150 रुपयों का नी हेमर, 250 से 500 रुपयों का एप्रीन और 1000 से 3000 रुपयों का प्लस आक्सीमीटर भी खुद ही क्रय करना होता है।

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