नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ में अशोक गहलोत सरकार को सवालों के जरिए यूं घेरा

जयपुर।

विधानसभा में प्रतिपक्ष के उपनेता राजेन्द्र राठौड़ ने वक्तव्य जारी कर कहा की राज्य सरकार की गलत व असमंजसपूर्ण नीति के कारण से भ्रमित प्रवासी श्रमिक बड़ी संख्या में निजी वाहन/ साईकिल व पैदल ही राजस्थान आने वाले व हजारों की संख्या में राजस्थान से बाहर जाने वाले अपने गंतव्य स्थानों की ओर रवाना हो गये है।

जिसके कारण से साइकिल/ पैदल चलने वाले श्रमिक भूखे-प्यासे शारीरिक प्रताड़ना झेल रहे है।

राठौड़ ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा करवाये गये आॅन लाईन पंजीयन के आंकड़ों के अनुसार लगभग 12 लाख से अधिक श्रमिक विभिन्न राज्यों से राजस्थान आना चाहते तथा 8 लाख से अधिक श्रमिक राजस्थान से जाना चाहते है।

किन्तु वर्तमान में आंकड़ों की दिन प्रतिदिन बढ़ती संख्या के कारण राज्य सरकार ने पंजीयन भी कम करना प्रारंभ कर दिया।

अब अन्य राज्यों से आने वाले श्रमिकों की अनुमति का अधिकार जिला कलेक्टरों से लेकर अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह विभाग को देना तथा अपने गृह राज्य का अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने जैसी कठिन व अव्यवाहारिक शर्त लगाये जाने के कारण हजारों की संख्या में श्रमिकों के निजी वाहन, साइकिल व पैदल रवाना होने के कारण सड़क दुर्घटनाओं की संभावनाओं को भी बढ़ा दिया है।

राठौड़ ने यह भी बताया कि कोराना वायरस के संक्रमण पर काबू पाने के लिए सरकार द्वारा अन्र्तराज्यीय सीमा सील कर अपने कर्तव्य की इतिश्री करना तथा जिन 16 लाख से अधिक प्रवासी श्रमिकों ने राज्य सरकार के आग्रह पर अपना आॅन लाईन पंजीयन करवाया उनके साथ घिनौना मजाक किया है।

तथा 6 मई से पहले जिन श्रमिकों को राज्य सरकार द्वारा पास जारी किये गये तथा ऐसे प्रवासी श्रमिक जिन्हें सम्बन्धित राज्य सरकार द्वारा अपने गृह जिले जाने की अनुमति भी दी जा चुकी है, को राज्य में आने की अनुमति भी नहीं दिया जाना दुर्भाग्यजनक है।

6 करोड़ से ज्यादा राजस्थान के लोगों की स्क्रीनिंग करने का दवा करने वाली सरकार की कलई तो तब खुल गई जब वह राज्य की सीमाओं पर पहुंचे मात्र कुछ हजार प्रवासी श्रमिक जिन्होंने अन्य प्रदेशों से राजस्थान में प्रवेश किया की भी राज्य सरकार सही से स्क्रीनिंग नहीं करवा सकी।

स्क्रीनिंग के नाम पर मात्र थर्मलगन को सरकार सीमाओं पर यदा-कदा काम में ले रही है वह भी बढ़ते तापमान के कारण इन दिनों में सहीं काम नहीं कर रही है।

राज्य सरकार द्वारा अन्र्तराज्यीय सीमाओं को सील करने अचानक जारी आदेश से राज्य की सीमाओं पर हजारों की संख्या में श्रमिक अटक गये है।

इन अटके प्रवासी श्रमिकों की स्थिति अत्यन्त दयनीय है।

यह सभी वह श्रमिक है जो लाॅक डाउन के कारण लगभग 50 दिन से बिना मजदूरी के अलग-अलग प्रदेशों में रह रहे थे।

जिसके कारण इन सभी श्रमिकों की क्रय शक्ति लगभग समाप्त हो गई है तथा राजस्थान में आने पर राज्य सरकार द्वारा लिये गये नीतिगत निर्णयानुसार आगामी 14 दिन और क्वारेंटाईन/ होम आइसोलेशन में भी रहने के कारण इन्हें किसी भी प्रकार की मजदूरी अथवा कार्य मिलना संभव नहीं है।

राठौड़ ने राज्य सरकार के 7 मई के पश्चात मात्र आपात स्थिति में ही प्रवासी श्रमिकों का राज्य सरकार के उच्च अधिकारियों की अनुमति से प्रवेश किये जाने के आदेश को भी पूर्णतया अव्यवहारिक बताते हुए मांग की है कि राज्य सरकार अन्य राज्यों से प्रदेश में आने वाले सभी श्रमिकों को तदर्थ रूप से स्टेट बीपीएल मानते हुए सरकार की ओर से दी जाने वाली सभी सुविधाएं तत्काल प्रदान करे।

प्रत्येक परिवार को तत्काल 5 हजार रूपये की आर्थिक सहायता, 50 किलो अनाज, 5 किलो दाल, 5 किलो चावल, 2 किलो रिफाईंड तेल उपलब्ध करवाये तथा 14 दिन की क्वारेंटाईन/होम आइसोलेशन की समाप्ति पर अस्थाई जाॅब कार्ड बनाकर नरेगा में कार्य करने की अनुमति भी प्रदान करे।

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