अन्नदाता पर 2% मंडी शुल्क लगाने को लेकर राजस्थान में राजनीति उबाल पर

भाजपा किसान मोर्चा ने दिया प्रदेशभर में ज्ञापन

नेशनल दुनिया, जयपुर ।

राजस्थान सरकार के द्वारा 1000 करोड़ रुपए का किसान कल्याण कोष बनाने के नाम पर किसानों से 2% मंडी शुल्क वसूलने के आर्डर के बाद राज्य में आज चौथे दिन भी कृषि उपज मंडियों के कारोबारियों ने कारोबार नहीं किया।

एक तरफ जहां अनाज कारोबारी व्यापार छोड़कर बहिष्कार पर बैठे हुए हैं, तो दूसरी तरफ किसानों पर लादे गए 2% मंडी शुल्क को लेकर राज्य में राजनीति गरमा गई है।

भाजपा किसान मोर्चा राजस्थान ने शुक्रवार को किसानों की कृषि उपजों पर राज्य सरकार द्वारा लागू किये गए किसान कल्याण के नाम से 2 प्रतिशत मंडी शुल्क आदेश को वापस लेने हेतु मोर्चा के सभी प्रदेश, जिला, मंडल पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालयों पर जिला कलेक्टर एवं उपखंड अधिकारी को महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन देकर विरोध प्रकट किया।

भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश महामंत्री शैलाराम सारण ने कहा कि इस वर्ष रबी की फसलों को बार-बार बेमौसमी वर्षा एवं ओलावृष्टि के कारण बहुत नुकसान हुआ है, बहुसंख्यक किसानों की फसलें बार-बार भीगने के कारण उनके गुणवत्ता में खराबी आई है।

साथ ही लंबे लॉक डाउन के कारण किसान उपयुक्त समय पर अपने फसलों की कटाई करके उपज निकाल नही सके। इन सभी परिस्थितियों के कारण प्रदेश का अन्नदाता आर्थिक तौर से बहुत कमजोर हो चुका है।

सारण ने बताया कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय एवं प्रदेश के नेताओं ने किसानों से कई लुभावने आश्वासन दिए थे, परंतु शासन के आने के बाद कांग्रेस की प्रदेश सरकार व मुख्यमंत्री धरतीपुत्रों के अभावों को नजरअंदाज कर रहे है।

यह भी पढ़ें :  अशोक गहलोत का मंत्रीमंड़ल जैसे जिम्बाब्वे की सी ग्रेड की टीम है

सारण ने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा अभी हाल ही में किसान कल्याण कोष के नाम से 2 प्रतिशत मंडी शुल्क जो लगाया है उसके भुगतान का भार किसानों पर ही है।

पूवर्ती भाजपा की वसुंधरा सरकार किसानों के बिजली बिलों पर राहत प्रदान की थी। उपरोक्त वर्णित हालातों को ध्यान में रखते हुए राजस्थान सरकार को 2 प्रतिशत मंडी शुल्क का आदेश वापस लेना चाहिये एवं किसानों को राहत पैकेज देकर उनके बिजली बिल मांफ करना चाहिये।

सारण ने कहा है कि प्रदेश के किसान वर्ग में भारी आक्रोश है यदि सरकार ने किसानों की इन मांगों पर विचार करके राहत प्रदान नही की तो भाजपा किसान मोर्चा को किसानों के हित लिए आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।