श्रमिकों से किराया नहीं लें, प्रति परिवार ₹5000 दे और 3 माह तक खाद्यान्न फ्री दिया जाए

-श्रमिकों के ट्रेन/बस में आवागमन का किराया राज्य सरकार वहन करें और श्रमिकों को 5 हजार रु प्रति परिवार तथा 3 माह तक मुफ्त खाद्यान्न दिया जाएं – उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़

नेशनल दुनिया, जयपुर।

राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने शनिवार को देश में लॉकडाउन की वजह से विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी श्रमिकों को राजस्थान प्रदेश से भेजे जाने व लाये जाने के साथ ही इनसे जुड़ी आर्थिक समस्याओं को दूर करने, खाद्यान्न सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा आयुष्मान भारत महात्मा गांधी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखा है।

श्रमिकों के ट्रेन/बस में आवागमन का किराया राज्य सरकार वहन करें

उपनेता प्रतिपक्ष ने पत्र के माध्यम से बताया कि राजस्थान के करीब 20-25 लाख निवासी श्रमिक विभिन्न राज्यों में दैनिक श्रमिक के रूप में कार्यरत है और कोरोना महामारी के कारण अपने गृह प्रदेश राजस्थान में लौटना चाहते हैं।

जिनमें से अब तक 12 लाख श्रमिकों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है और ये संख्या निश्चित रूप से बढ़ने वाली है। इन श्रमिकों को प्रदेश में आने के बाद राज्य सरकार द्वारा लिये गए निर्णयानुसार 14 दिन के क्वारंटाइन/होम आइसोलेशन में रहना पड़ेगा।

उन्होंने पत्र में कहा कि कोरोना वायरस के कारण श्रमिकों की क्रय शक्ति लगभग समाप्त हो गई है और जीवन यापन के लिए उन्हें आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

ऐसी कठिन परिस्थिति में श्रमिक ट्रेन/बस का किराया वहन करने में असक्षम है। इसलिए उपनेता प्रतिपक्ष ने मांग की है कि श्रमिकों की दयनीय आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ट्रेन/बस में आवागमन का किराया श्रमिकों से नहीं वसूल कर स्वयं वहन करें।

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श्रमिकों को 5 हजार रु प्रति परिवार तथा 3 माह तक मुफ्त खाद्यान्न दें राज्य सरकार

उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने प्रवासी श्रमिकों को तत्काल जीवन यापन हेतु राज्य सरकार द्वारा 5 हजार रु प्रति परिवार व 3 माह तक मुफ्त खाद्यान्न के रूप में 50 किलो गेहूं, 5 किलो दाल, 2 किलो तेल देने व विधायक विकास कोष से भी श्रमिकों को खाद्य सामग्री वितरित करने की अनुमति देने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि अधिकांश श्रमिक 1 वर्ष से अधिक की कालावधि में दूसरे में रह रहे हैं जिनके पास न तो राशन कार्ड है और न ही ये एनएफएसए, बी.पी.एल. , स्टेट बी.पी.एल. व अन्त्योदय योजना में चयनित है। ऐसे में ये श्रमिक राशन डीलरों से रियायती दरों पर खाद्यान्न नहीं ले पा रहे हैं।

निजी चिकित्सालयों को लंबित बकाया राशि का शीघ्र भुगतान करें सरकार

उपनेता प्रतिपक्ष ने पत्र में राजस्थान में संचालित आयुष्मान भारत महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना से जुडे करीब 1025 निजी चिकित्सालयों के लगभग 800 करोड़ रु की राशि विगत जनवरी माह से तथा 300 करोड़ की राशि 31 मार्च 2019 के बाद की लंबित और 80 हजार मेडिकल क्लेम का भुगतान अतिशीघ्र किए जाने का मांग की है।

उन्होंने कहा कि भुगतान नहीं होने की वजह से कोरोना महामारी के संकट के समय निजी चिकित्सालय राज्य सरकार का सहयोग नहीं कर रहे हैं।

पूर्व में भारत सरकार और भारतीय बीमा विनिमायक व विकास प्राधिकरण द्वारा भी हैल्थ इंश्योरेंस क्लेम का निस्तारण शीघ्र करने के संबंध में आदेश दिए जा चुके हैं।