विश्व मजदूर दिवस पर देश के करोड़ों मजदूरों की चिंता में डूबे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यों के मुख्यमंत्री!

नेशनल दुनिया, जयपुर।

आज एक मई, यानी विश्व मजदूर दिवस है। दुनिया भर में आज के दिन श्रमिकों के लिए उनके कार्यों के लिए, उनके प्रयासों के लिए, उनके नव निर्माण के लिए, उनकी अथक मेहनत के लिए, उनको वंदन किया जाता है, उनका अभिनंदन किया जाता है।

संभवत यह पहला मजदूर दिवस है, जब पूरी दुनिया भर में मजदूर घर पर बैठे हैं, और सभी श्रमिकों के लिए सरकारें आगे अनवरत चलने वाले रोजगार के प्रयास में लगी हुई हैं। भारत की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाली सरकार भी इसके लिए दिन-रात जुटी हुई है।

कोविड-19 की वैश्विक महामारी के चलते हैं जिस तरह से अचानक पूरे देश भर में 24 मार्च की रात को 12:00 बजे लॉक डाउन लगा दिया गया और उसके चलते पूरे देश के श्रमिक जहां कार्य करते थे उन्हीं राज्यों में कैद हो गए।

पूरे भारत भर में 3 मई तक लॉक डाउन है और इसके बाद भी बढ़ने की पूरी पूरी संभावना है। खासतौर से उन जिलों में जहां पर हॉटस्पॉट बने हुए हैं। राजस्थान में भी हार चले हॉटस्पॉट की श्रेणी में है और यहां पर भी 3 मई के बाद तालाबंदी खुलने की संभावना कतई ही नजर नहीं आ रही है।

इसके चलते केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2 दिन पहले ही सभी राज्यों को अपने-अपने प्रवासी श्रमिकों और उनके राज्य में रहने वाले दूसरे राज्यों के मजदूरों को उनके घर पर भेजने की व्यवस्था करने की अनुमति दे दी है।

सभी राज्यों ने तकरीबन व्यवस्था कर ली है। बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, महाराष्ट्र समेत तमाम राज्य सरकारें अपने-अपने प्रवासी श्रमिकों को बुलाने और दूसरे राज्यों के श्रमिकों को उनके घर भेजने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था में जुटी हुई है।

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इस बीच राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार से विशेष ट्रेन चलाकर मजदूरों को उनके घर भेजने की मांग की है। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने इस मांग पर गहनता से विचार किया है और जल्द ही इस पर कोई फैसला किए जाने की संभावना जताई है।

अकेले राजस्थान में ही 10 लाख से अधिक श्रमिकों ने ऑनलाइन पंजीकरण करवाया है। इसी तरह से गुजरात, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्य में भी बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों ने अपने घर जाने की इच्छा जताई है।

केंद्र सरकार का मानना है कि देश भर में करीब 10 करोड़ प्रवासी मजदूर हैं जो अपने-अपने घर जाने के लिए पंजीकरण करवा रहे हैं। हालांकि, अभी तक राज्य सरकारों ने बसें प्रारंभ नहीं की है, किंतु बताया जा रहा है कि कम दूरी की जगह पर बसों के द्वारा और अधिक दूरी की जगह पर ट्रेन के द्वारा मजदूरों को घर पहुंचाया जाएगा।