‘राजस्थान का एक ही सिंह भैरोंसिह-भैरोंसिंह’ का नारा गूंजता रहा

-उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने फेसबुक लाइव पर पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत के जीवन पर दिया व्याख्यान

जयपुर।

राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने गुरुवार को जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में फेसबुक लाइव के माध्यम से देश के पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत जी के सार्वजनिक जीवन के विषय पर व्याख्यान दिया।

इस दौरान उन्होंने भैरोंसिंह शेखावत से जुड़े कई किस्सों एवं अनुभवों को फेसबुक के माध्यम से भाजपा कार्यकर्ताओं व आम लोगों के बीच साझा किया।

उपनेता प्रतिपक्ष ने भैंरोंसिंह शेखावत को राजस्थान की धरा का विराट व्यक्तित्व व कृतित्व बताते हुए विस्तार से प्रकाश डाला और उनकी तत्कालीन योजनाओं व कार्यों के बारे में बताया।

उन्होंने बताया कि भैरोंसिह शेखावत ने अन्त्योदय, काम के बदले अनाज, अपना गांव-अपना काम, साक्षरता दर में बढ़ोतरी, ग्राम पंचायत के आधार पर विकास की योजनाएं, वित्त आयोग से राजस्थान को ज्यादा से ज्यादा आर्थिक मदद दिलवाने के लिए ज्ञापन देने व गरीब उत्थान की दिशा में अनेकों योजनाओं व कार्यों के जरिए विकास की अंतिम पक्ति में खड़े लोगों तक विकास का उजाला पहुंचाने का काम किया था।

छोटे से गांव से निकले भैरोंसिंह शेखवात राजनीति के क्षेत्र में ऐसे व्यक्तित्व रहे जिनसे उनसे जुड़ी हर बातें व स्मृतियां आज भी लोगों के जेहन में विद्यमान है।

राजस्थान का एक ही सिंह भैरोंसिह-भैरोंसिंह का नारा गूंजता रहा

उपनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भैरोंसिंह शेखावत का राष्ट्रीय राजनीति में जाने के बाद भी राजस्थान की धरा से अटूट संबंध रहा।

हिन्दुस्तान की राजनीति के वटवृक्ष रहे भैरोंसिंह का संबंध राजस्थान के नगर-नगर, डगर-डगर, गांव व ढाणी में लोगों से आत्मीयता वाला रहा है।

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यही कारण है कि राजस्थान का एक ही सिंह भैरोंसिह-भैरोंसिंह का नारा तत्कालीन समय में बेहद लोकप्रिय रहा।

उपनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने 19 अगस्त 2002 को भैरोंसिंह शेखावत द्वारा उपराष्ट्रपति का पद ग्रहण करते समय उनके बारे में वक्तव्य देते हुए कहा था कि एक धरती पुत्र राष्ट्र के माथे का चंदन का तिलक बनने जा रहें हैं।

धरा के साथ जुड़ाव के बारे में उनकी टिप्पणी बड़ी सजीव व सटीक रही है।


उपनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्यसभा में सभापति व उपराष्ट्रपति के रूप में 4 वर्ष पूरे करने के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भैरोंसिंह शेखावत के पूरे व्यक्तित्व को तीन शब्दों में बांधते हुए बुद्धिमता, ज्ञान व अनुभवों का सजीव प्रतीक बताया था।

वर्ल्ड बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष ने भी भैंरोंसिंह के मुख्यमंत्री काल में गरीब उत्थान की विभिन्न योजनाओं की प्रशंसा की थी।

भैरोंसिंह शेखावत चलते-फिरते विश्वविद्यालय थे, उनसे जितना सीखो उतना ही कम था

उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि आजादी के बाद राजस्थान की राजनीति की परिभाषा भैरोंसिंह से शुरु होकर उन पर ही खत्म होती है।

वे ऐसे शिल्पकार थे जो कार्यकर्ताओं को पहचानकर उन्हें गढ़ने, उनकी रूचि के अनुसार काम देने व कर्मठ कार्यकर्ता तैयार करना अच्छी तरह से जानते थे।

उपनेता प्रतिपक्ष ने बताया कि वर्ष 1978-79 से लेकर 2003 तक छात्र नेता, युवा नेता, विधायक, मंत्री व सचेतक के रूप में मुझे भैरोंसिंह शेखावत जैसे वटवृक्ष की छाया में काम करने व बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला।

भैरोंसिंह शेखावत चलते-फिरते विश्वविद्यालय थे, उनसे जितना सीखो उतना ही कम था।

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