घर पहुंचने लगे मजदूर, प्रवासी राजस्थानी फ्रेंड्स फाउंडेशन की मेहनत रंग लाई

नेशनल दुनिया।

लंबे समय से लोक डाउन के चलते गुजरात में फंसे राजस्थान के प्रवासी मजदूर अब अपने घर पहुंचने लगे हैं।

प्रवासी राजस्थानी फ्रेंड फाउंडेशन के द्वारा राजस्थान की मुख्यमंत्री और गुजरात के मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी के बाद दोनों राज्यों की सरकारों ने इस ओर कदम बढ़ाया है।

फाउंडेशन के प्रेसिडेंट श्रवण सिंह राठौड़ ने बताया कि एक महीने के लंबे इंतजार के बीच 11 बसों में करीब 400 प्रवासी श्रमिक गुजरात से सिरोही के रास्ते से राजस्थान आ चुके हैं।

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ये सारे प्रवासी श्रमिक गुजरात के विभिन्न अस्थाई क्वॉरेंटाइन सेंटरों में एक महीने से रोके हुए थे। इन्हें राजस्थान सरकार के आग्रह पर गुजरात सरकार की बसों से आबूरोड चेक पोस्ट तक छोड़ा गया।

आबूरोड चेक पोस्ट से सिरोही में पहुंचे, वहां से सुमेरपुर होते हुए अब जालोर, जोधपुर और ब्यावर तक श्रमिकों को छोड़ा जा रहा है।

इसी तरह 300 प्रवासी श्रमिक गुजरात से कुशलगढ़ चेकपोस्ट होते हुए बांसवाड़ा पहुंचे। इन्हें भी गुजरात सरकार की बसों ने बांसवाड़ा तक छोड़ा गया। आगे मेडिकल चेकअप के बाद राज्य सरकार अपनी रोडवेज बसों से छोड़ रही है।

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उन्होंने बताया कि 700 प्रवासी श्रमिक आ चुके है। ये सब वो लोग हैं, जिन्हें दूसरे राज्यों से अपने घर राजस्थान आते समय बीच में पकड़ लिया गया था, जो 20 दिन से लेकर 25 दिन तक अस्थाई शिविरों में कोरोनटाईन करके रोके हुए थे।

अब गुजरात और महाराष्ट्र के विभिन्न शिविरों में बन्द ऐसे श्रमिकों को पहले निकाला जा रहा है। एक अच्छी एक शुरुआत हुई। जो बीच रास्ते मे फंसे हुए है, वो सब घर पहुंचने शुरू हो गए है।

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