रामायण और महाभारत के युद्धों से मानव शरीर कोरोनावायरस से लड़ने की तकनीक सीखता है!

रामगोपाल जाट

प्लाज्मा एंटीबॉडी थेरेपी को लेकर दुनिया भर में कार्य शुरू हो चुका है। भारत के भी कई राज्यों ने इलाज में एंटीबॉडी थेरेपी को लेकर उत्साह जताया है और इससे कई मरीजों को ठीक होने की उम्मीद भी जताई है।

डॉक्टरों का कहना है कि कोरोनावायरस से ठीक हो चुके एक मरीज से 4 मरीजों को ठीक किया जा सकता है। इस खबर में हम आपको बताएंगे कि प्लाज्मा एंटीबॉडी थेरेपी कैसे तैयार की जाती है और यह कैसे काम करती है।

इन दिनों दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत सीरियल चल रहे हैं। दूरदर्शन पर दोनों ऐतिहासिक धारावाहिक तीसरी बार प्रसारित किए जा रहे हैं। जब से रामायण और महाभारत को दूरदर्शन पर शुरू किया गया है। तब से टीआरपी के मामले में दूरदर्शन ने सभी दूसरे टीवी चैनल्स को पीछे छोड़ दिया है।

हम यहां पर रामायण या महाभारत की गाथा सुनाने के लिए नहीं आए, बल्कि यह चीज बड़ी आसानी से बताने के लिए आए हैं कि प्लाज्मा एंटीबॉडी थेरेपी किस तरह से रामायण और महाभारत से संबंध रखती है।

आप अगर ध्यान से देखेंगे तो रामायण में भगवान राम और लंकेश रावण की सेना आपस में भिड़ रही है। दोनों में से एक सेना तभी भारी पड़ती है। दूसरे दिन युद्ध में दूसरी सेना भारी पड़ती है तीसरे दिन को दूसरी सेना भारी पड़ती है। चौथे दिन फिर पहली सेना भारी पड़ती है। इस तरह 9 दिन तक चले युद्ध के बाद आखिर में भगवान राम की सेना विजय होती है।

ठीक इसी तरह से अब तक महाभारत में हुआ है। महाभारत में कई राजाओं के बीच युद्ध हुए हैं। जिन राजाओं की सेनाएं बड़ी थी ज्यादा प्रक्रम वाली थी वह सेनाएं जीत गईं। जिन सेनाओं को अधिक अनुभव था वह सेनाएं जीत गई। इस तरह से देखा जाए तो सीधा सा अर्थ है कि जिस सेना के पास अधिक सैनिक हैं और अधिक शस्त्रों से सुसज्जित है उसको दूसरी सेना हरा नहीं सकती।

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बिल्कुल जिस तरह से रामायण और महाभारत में दोनों तरफ से युद्ध हुआ और जो ताकतवर सेना थी, जो अस्त्र और शस्त्र से से सुसज्जित सेना थी। वह सेना जीत हासिल करने में कामयाब रही है। भगवान राम की विजय का कारण उनकी बड़ी सेना और इसके साथ ही आधुनिक अस्त्र-शस्त्र होने के कारण विजय प्राप्ति हुई।

अब बात करते हैं कोविड-19 यानी कोरोनावायरस के बारे में कोरोनावायरस राक्षसों की एक ऐसी सेना है, जो आधुनिक अस्त्रों और शस्त्रों से तैयार होकर मैदान में उतरी है। यही कारण है कि दुनिया भर की तमाम मेडिसिंस जो की पुरानी सेनाएं मानी जा सकती है। इस आधुनिक राक्षस रूपी वायरस से मुकाबला करने में नाकाम साबित हो रही है।

प्रत्येक मानव की बॉडी के अंदर पहले से एक बड़ी सेना तैयार रहती है जो हर दिन होने वाले वायरस रूपी राक्षस के आक्रमण को नाकाम साबित करती रहती है। कभी-कभी ऐसा होता है कि मनुष्य के शरीर में मौजूद सेना कमजोर पड़ने के कारण बाहरी आक्रमण से हार जाती है। ऐसे समय में मनुष्य का शरीर बीमार हो जाता है।

जब मनुष्य का शरीर अपनी सेना कमजोर होने के कारण बीमार हो जाता है। तब डॉक्टरों के द्वारा शरीर में नई सेना, यानी की दवाइयों का प्रवेश करवाया जाता है। दवाइयां ऐसी सेना है जो मनुष्य के शरीर में जाकर वायरस को रोकने का काम करती है। इसके बाद वायरस के ऊपर आक्रमण करती है मनुष्य के शरीर में पहले से ही मौजूद रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली सेना।

बीमार होने पर दवा दी जानी और दवा के जो कार्य हैं, उसके अलावा मनुष्य के शरीर में पहले से मौजूद एंटीबायोटिक्स और रोग प्रतिरोधक क्षमता मिलकर बाहरी आक्रमण नाकाम करते हैं। प्लाज्मा एंटीबॉडी थेरेपी भी कुछ इसी तरह से काम करती है।

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दरअसल मनुष्य के कहीं चोट लगती है और खून निकलता है तो उसके साथ में एक सफेद और तरल पदार्थ भी निकलता है। यह सफेद और तरल पदार्थ प्लाज्मा होता है। इस सफेद और तरल पदार्थ से कोशिकाएं बनती है। प्रोटीन की इन कोशिकाओं को मानव शरीर की सुसज्जित सेना कहा जा सकता है।

प्लाज्मा एंटीबॉडी थेरेपी कोरोनावायरस से पहले ठीक हो चुके मरीजों के ब्लड से तैयार की जाती है। क्योंकि कोरोनावायरस को हरा चुके मरीजों के खून में एंटीबॉडी प्लाज्मा तैयार हो जाता है, यानी कि उसके शरीर में कोरोनावायरस से लड़ने के लिए सेना तैयार हो चुकी होती है। इसी विजेता सेना में से कुछ योद्धाओं को लिया जाता है और दूसरे शरीर में प्रवेश करवाया जाता है।

जब पुराना वायरस से लड़ चुके और जीत चुके योद्धाओं को कोरोनावायरस के आक्रमण वाले दूसरे मानव शरीर में प्रवेश करवाया जाता है तो यह योद्धा तुरंत प्रभाव से अपना काम शुरू करते हैं। यह योद्धा नए शरीर में जाकर वहां पर भी अपने जैसे और बड़े पराक्रमी योद्धा तैयार करते हैं। इस तरह से बहुत जल्दी एक बड़ी सेना का निर्माण होता है और यह सेना कोरोनावायरस रूपी राक्षसी सेना का नाश करती है।

जब एक बार किसी शरीर में योद्धा वाली सेना तैयार हो जाती है तो उसे मुकाबला करने के लिए एक बार फिर से उससे भी बड़ी और आधुनिक अस्त्र-शस्त्र वाली सेना ही मुकाबला कर सकती है। यही कारण है कि विश्व के कई देश खासकर से चीन जैविक हथियार तैयार कर रहा है। यह वही जैविक हथियार है, जिनको हम राक्षस रूपी कोरोनावायरस नाम दे रहे हैं।

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कैसे शरीर में अगर कोरोनावायरस जैसी सेना एक बार फिर से आक्रमण करती है, तो उसको हार का सामना करना पड़ता है, लेकिन यदि कोरोनावायरस से भी भारी किसी बड़े और आधुनिक शस्त्रों वाले वायरस के द्वारा हमला किया जाता है।

ऐसे समय में हमारे शरीर में मौजूद से ना हार जाती है। एक बार फिर से शरीर को बाहरी सहायता की आवश्यकता पड़ती है, और सहायता उपलब्ध करवाई जाती है डॉक्टरों के द्वारा।

अब यदि कोरोनावायरस से भी कोई बड़ी सेना आक्रमण करेगी तो ऐसे समय में वर्तमान में डॉक्टरों के द्वारा प्लाज्मा एंटीबॉडी थेरेपी उसके लिए नाकाम साबित होगी। इसके लिए एक बार फिर से नहीं प्लाज्मा एंटीबॉडी थेरेपी तैयार करनी होगी।