कोविड-19: प्रिंट मीडिया को तगड़ा झटका, बड़े पैमाने पर छंटनी की आशंका, सैलरी में कटौती शुरू

नई दिल्ली

कोरोनावायरस के चलते प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का विकल्प दिया गया है। अधिकांश मीडियाकर्मी वर्क एट होम में जुटे हुए हैं। इस बीच जानकारी में आया है कि प्रिंट मीडिया के कई पत्रकारों को सैलरी में कटौती की गई है।

जयपुर के एक बड़े समाचार पत्र के द्वारा अपने कर्मचारियों को मंगलवार की दोपहर बाद अकाउंट में डाली गई सैलरी में बड़े पैमाने पर कटौती की गई है। यही हाल एक अन्य समाचार पत्र का है, जो सुबह प्रकाशित होता है, उसने भी अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का विकल्प देकर उनकी तनख्वाह आधी कर दी है।

नेशनल लेवल पर प्रकाशित होने वाले दो अंग्रेजी समाचार पत्रों में भी मीडियाकर्मियों की तनख्वाह में 30% की कटौती की बात सामने आई है। इसी तरह से राजस्थान के 2 चैनल के द्वारा भी अपने कर्मचारियों की तनख्वाह में 30% की कटौती किए जाने की बात निकल कर सामने आ रही है।

इतना ही नहीं, बल्कि देश में बड़े पैमाने पर प्रकाशित होने वाले एक हिंदी दैनिक अखबार ने भी अपने 50% कर्मचारियों को अगले 1 महीने के भीतर घर बिठाने पर विचार शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि मीडियाकर्मियों को इस समाचार पत्र ने मौखिक नोटिस दे दिया है।

उल्लेखनीय है कि तालाबंदी की देश में प्रिंट मीडिया पर सबसे बड़ी मार पड़ी है। कोरोनावायरस खेलने की अफवाह के चलते लोगों ने अखबारों की प्रतियां लेना कम कर दिया है। कई जगह हॉकर्स ने भी अखबार बांटना बंद कर दिया है। एक समाचार के मुताबिक अहमदाबाद में अखबारों की बिक्री में 80% की कमी आई है। जयपुर में भी कई अखबार प्रतियां बेचने को लेकर जूझ रहे हैं।

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इसके चलते प्रिंट मीडिया संस्थानों ने अब डिजिटल मीडिया पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। उल्लेखनीय है कि प्रिंट मीडिया में सबसे बड़ा खर्च अखबार की प्रिंटिंग और उसके कागज की खरीद पर है। लॉक डाउन के चलते अखबारों को विज्ञापन मिलने के मामले में बड़े पैमाने पर कमी आई है। कहा जा रहा है कि प्रिंट मीडिया संस्थानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।

इसी तरह से अधिकांश कारखाने बंद होने के कारण इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भी विज्ञापनदाताओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। राजस्थान जैसे राज्य में सरकारी विज्ञापन पहले से ही काफी कम कर दिए गए हैं। कोविड-19 की महामारी चल रही है तो सरकारी विज्ञापन काफी कम मिल रहे हैं, जिसके कारण प्रिंट मीडिया का खर्च निकाल पाना मुश्किल हो रहा है।

बताया जा रहा है कि प्रिंट मीडिया को लेकर यह खतरा केवल भारत में ही नहीं है, बल्कि अमेरिका, इटली, स्पेन, जर्मनी, फ्रांस और यहां तक कि चीन में भी हो रहा है, जहां पर बड़े पैमाने पर अखबारों की प्रतियों की बिक्री में कमी आई है।

भारत में राष्ट्रीय स्तर की मैगजीन “आउटलुक” ने फिलहाल अपना प्रकाशन स्थगित कर दिया है। इसी तरह से ऑस्ट्रेलिया की एक बड़ी दैनिक पत्रिका ने भी प्रकाशन बंद कर दिया है। भारत में कई छोटे और मझोले अखबारों का प्रकाशन पूर्ण रूप से बंद हो गया है।