राजस्थान का टोंक और रामगंज क्यों बना कोरोना हॉट स्पॉट? जानिए पूरी सच्चाई

hawamahal jaipur
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जयपुर।
राजस्थान के भीलवाड़ा को कभी कोरोना हॉट स्पॉट कहा गया, किंतु अब कोरोना का क्षेत्र बदल गया है। अब भीलवाड़ा में जहां 26 में से 14 रिकवर कर गए हैं, तो दूसरी ओर राजस्थान की राजधानी जयपुर और उसका पड़ौसी जिला टोंक कोरोना के हॉट स्पॉट बन गए हैं।

राजस्थान में कोविड—19 से पीड़ित मरीजों की संख्या अब 154 हो चुकी है, जिसमें से 12 रोगी टोंक जिले से मिले हैं, यहां पर कर्फ्यू लगा दिया गया है। इन 12 में से 2 अप्रैल को मिले थे, जबकि 8 रोगी आज सामने आए हैं।

दूसरी ओर राज्य की राजधानी जयपुर के रामगंज इलाके में अब तक 39 मरीज सामने आ चुके हैं, जबकि कई संदिग्ध मरीजों की जांच कर उनकी रिपोर्ट आने का इंतजार भी है। राज्य के 33 में से 15 जिले कोरोना की चपेट में आ चुके हैं।

राज्य के भीलवाड़ा में 2 और जयपुर के एसएमएस में अलवर के एक 85 साल के मरीज की मौत भी हो चुकी है, जबकि प्रशासन का कहना है कि ये तीनों ही रोगी अन्य बीमारियों से मरे हैं, उनको कोरोना पॉजिटिव पाया गया था।

इसके साथ ही राज्य के झुंझुनू, उदयपुर, पाली, जोधपुर, सीकर, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, चूरू, अजमेर, धौलपुर, भरतपुर में भी मरीजों की संख्या बढ रही है।

देखने वाली बात यह है कि पहले जहां इटली और ईरान से आए विदेशियों में ही यह वायरस मिला था, तो अब बीते तीन दिन से दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात में शिरकत कर देशभर में गए करीब 9000 लोगों में से नये मरीज निकल रहे हैं।

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देश के 22 राज्यों में जमात के लोगों ने वायरस को भयावह रुप दे दिया है। ठीक इसी तरह से राजस्थान के भी टोंक, जयपुर, धौलपुर, भरतपुर, चूरू और झुंझुनू में तब्लीगी जमात के लोग कोरोना पॉजिटिव रोगी बने हैं।

सरकार हर संभव प्रयास का वादा तो कर रही है, किंतु जिस तरह से 25 और 26 मार्च को यकायक पूरे देश में भगमभग मची थी, उसके परिणाम भी अब आने वाले प्रतीत हो रहे हैं।

प्रदेश के चिकित्सा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित कुमार सिंह कहते हैं कि सरकार हर संभव मदद कर रही है, किंतु हकिकत यह है कि सीमावर्ती इलाकों में आज भी चिकित्साकर्मियों के पास पर्याप्त साधन नहीं हैं।

इस मामले में चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा का कहना है कि सरकार के पास जो साधन हैं, उसके हिसाब से काम किया जा रहा है। उनका कहना है कि लोगों को खुद सामने आकर जांच करवानी चाहिए। शर्मा कहते हैं कि जमात से आए लोगों को खुद अस्पताल पहुंचना चाहिए।