क्या भाजपा अध्यक्ष डॉ सतीश पूनियां की अपील पर कदम उठा रही है मोदी सरकार?

dr satish poonia
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जयपुर।

लगता है भाजपा के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनियां की हर मांग पूरी कर रही है पीएम नरेंद्र मोदी सरकार! भले ही यह कहने में अतिश्योक्तिपूर्ण लगे, किंतु कुछ कमेंट और ट्वीट्स पढ़कर आप भी यह बात मान लेंगे कि केंद्र सरकार भाजपा के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनियां की मांग पर कई कदम उठा चुकी है।

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इसको संयोग कहें या प्रयोग! जो भी हो, लेकिन जिस तरह से मोदी सरकार ने पहले टेलिविजन पर ‘रामायण’ धारावाहिक फिर से शुरू की घोषणा की है। और अब आज ही आरबीआई के माध्यम से मोदी सरकार ने लोन की किस्तों में 3 माह की देरी होने पर छूट दी है, इससे साफ है कि कहीं न कहीं सरकार अपने राज्य स्तर के बड़े नेताओं के सुझाव पर भी अमल कर रही है।

यहां पर उल्लेखनीय यह कि भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ पूनियां ने 25 मार्च को दो ट्वीट कर केंद्र सरकार से लॉक डाउन के दौरान ‘रामायण’ जैसा धार्मिक धारावाहिक फिर से शुरू करने, बैंकों से लिए गए ऋण की किस्तों को अगले 3 माह तक छूट देने और पैनल्टी नहीं लगाने की अपील की गई थी।img 20200327 wa00285069300199370531362

इसके बाद सरकार ने पहले प्रसार भारती के माध्यम से आज सुबह ही शनिवार को सुबह 9 बजे और रात को भी 9 बजे ‘रामायण’ फिर से शुरू करने की घोषणा की है। इसके साथ ही आरबीआई ने भी आज ही रेपो रेट में .75 प्रतिशत, रिवर्स रेपो रेट में .90 ​फीसदी की कमी करने के साथ ही बैंकों को अगले 3 माह तक लोन की किस्तें नहीं भरने पर किसी भी ग्राहक के खाते एनपीए नहीं किए जाने के निर्देश दिए हैं।screenshot 20200327 123803 twitter2565869987929174133

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इतना ही नहीं, बल्कि डॉ पूनियां ने इससे पहले यह भी लिखा था कि देश की बेरोजगार हो चुकी जनता के लिए सरकार राहत पैकेज की घोषणा करें। इसको भी सरकार ने गंभीरता से माना और गुरुवार को सरकार ने देश के हर वर्ग के लिए 1.70 लाख करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की है। चर्चा है कि केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों के अलावा सभी राज्यों की भाजपा इकाइयों से भी चर्चा कर कदम उठाए हैं।

चर्चा है कि डॉ सतीश पूनियां के द्वारा दिए गये सुझावों मानने के कारण उनके बढ़ते राजनीतिक कद का भी सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। गौरतलब है कि इस तरह से ट्वीट और अन्य कमेंट्स पर केंद्र सरकार ने कभी डॉ पूनियां से पहले के नेताओं को तवज्जो नहीं दी।