रामगोपाल जाट

कोरोना वायरस (Coronavirus) मरीजों की देखभाल करने के लिए जयपुर का सवाई मानसिंह अस्पताल अब नर्सिंगकर्मियों के काम रोबोट से करवाने के लिए काम कर रहा है। इसको लेकर अस्पताल प्रशासन ने बुधवार को ट्रायल भी किया है।

सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ सुधीर भंडारी ने कहा है कि अभी इस बारे में केवल ट्रायल किया जा रहा है। कितने रोबोट खरीदे जाएंगे और कब खरीदे जाएंगे, इसको लेकर आजकल में फैसला किया जा सकता है। देखिए ट्रायल वीडियो

सवाई मानसिंह अस्पताल में रोबोट से आइसोलेशन वार्ड में मरीजों की देखभाल करने के लिए ट्रायल किया गया।

अस्पताल में उपचार के लिए रोबोट की बात को स्वीकारते हुए चिकित्सा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित कुमार सिंह ने कहा है कि रोबोट से एसएमएस अस्पताल में मरीजों की देखभाल करने के लिए अभी ट्रायल किया जा रहा है, इससे ज्यादा अभी कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं।

सवाई मानसिंह अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक रोबोट से अस्पताल में कोरोना वायरस (Coronavirus) से पॉजिटिव मरीजों की देखभाल के लिए आइसोलेशन वार्ड में बुधवार को ट्रायल किया गया है, जो सफल रहा है। रोबोट से देखभाल को लेकर चिकित्सा विभाग आज या कल में कोई फैसला कर सकता है।

जिस तरह से कोरोना वायरस (Coronavirus) पॉजिटिव मरीजों की देखभाल करने वाले डॉक्टरों और नर्सिंगकर्मियों में तरह-तरह में अफवाह फैलती है, उसको देखते हुए और उनके संपर्क में आने वाले परिजनों व अन्य लोगों को बचाने के लिए अस्पताल यह कदम उठा रहा है।

अगर राजस्थान सरकार रोबोट से देखभाल करने के लिए करिए करती है, तो पूरे देश में संभवत यह पहला मामला होगा, जब कोरोना वायरस (Coronavirus) के पीड़ित मरीजों का इलाज करने के लिए मानव के बजाय रोबोट का सहारा लिया जाएगा।

जानकारी में आया है कि जयपुर के युवा रोबोटिक्स एक्सपर्ट भुवनेश मिश्रा के बनाए रोबोट ‘सोना 2.5’ को एसएमएस हॉस्पिटल में कोरोना संक्रमितों की सेवा के लिए लगाया गया है। कोरोना पीड़ितों के लिए बुधवार को यहां तीन रोबोट इंस्टॉल किए गए हैं।

इन रोबोट की खास बात यह है कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इन्हें जयपुर में ही तैयार किया गया है। क्लब फर्स्ट की ओर से सीएसआर के तहत इन्हें एसएमएस में लगाया गया है।

ये रोबोट कोरोना संक्रमितों तक दवा, पानी व अन्य आवश्यक वस्तुएं ले जाने का काम करेंगे। इन रोबोट को यहां लगाए जाने से कोरोना पीड़ितों के पास मेडिकल स्टाफ का मूवमेंट कम हो जाएगा। इसका सबसे बड़ा प्रभाव यह होगा कि हॉस्पिटल में इंसानों की वजह से कोरोना के प्रसार की संभावना काफी कम हो जाएगी।