राज्यपाल ने मांगी प्रगति रिपोर्ट तो विश्वविद्यालयों के उड़े होश

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कुलाधिपति कर रहे हैं विश्वविद्यालयों के स्मार्ट गांवों का मूल्यांकन

जयपुर।

राज्यपाल कल्याण सिंह ने राज्य के विश्वविद्यालयों द्वारा गोद लेकर स्मार्ट बनाए गए गांवों में हुए विकास कार्यों की जानकारी मांगी तो कुलपतियों के पसीने छूट गए। बताया जा रहा है कि अब आनन-फानन में गोद लिए गए गांवों की जानकारी एकत्रित की जा रही है। राज्यपाल इन सूचनाओं के आधार पर स्मार्ट गांवों का मूल्याकन करेंगे।

राज्यपाल सिंह ने कुलपतियों से गोद लिए गए गांवों में किए गए विकास कार्यों की 14 बिन्दुओं पर विस्तृत रिपोर्ट चाही है। कुलाधिपति सिंह ने प्रत्येक राज्य विवि को अपने क्षेत्र के एक पिछडे गांव को गोद लेने के निर्देश दिये थे।

गोद लेने के बाद गांव में किये गए कार्य और उससे वहां के जन-जीवन पर आये प्रभावों की विस्तार से जानकारी मांगी है। राज्यपाल सिंह का कहना है कि गोद लिए गए गांवों में जल संरक्षण के लिए तालाब का निर्माण किया जाना जरूरी है। विवि को स्मार्ट गांव के विकास कार्यो की रिपोर्ट 31 मार्च तक भेजनी है।

गांव के विकास के लिए ढाई वर्ष पर्याप्त समय-
राज्यपाल सिंह ने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को इस सम्बन्ध में पत्र भेजा है। उनकी मंशा है कि गांव को गोद लिए हुए विश्वविद्यालयों को 2 वर्ष 6 माह हो गए है। ढ़ाई वर्ष किसी भी कार्य के मूल्यांकन के लिए पर्याप्त समय होता है।

14 कार्यक्षेत्रों पर मांगी जानकारी –
राज्यपाल ने गांव के विकास के प्रभाव का आकलन करने के लिए 14 कार्य क्षेत्रों का चयन किया है। इन चौदह बिन्दुओं पर खरे उतरने वाले गांव को ही स्मार्ट गांव माना जाएगा।

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इन 14 सूचकांक में 1. रोजगार, 2. कृषि ऋण की व्यवस्था, 3. स्वास्थ्य व स्वच्छता, 4.पेयजल विद्युतिकरण व आवास व्यवस्था 5. शिक्षा, 6.ई-इनिशिएटिव, 7. बच्चों का समग्र विकास, 8. जन वितरण व्यवस्था, 9.सामाजिक सुरक्षा, 10.नवाचार, 11. कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व 12. जल संरक्षण,13. सडक व परिवहन व्यवस्था और 14. अन्य गतिविधियां, जो विवि ने अपने स्तर पर या सरकार के स्तर से शुरू कराने की पहल की हो।

तालाब का निर्माण किया जाना स्मार्ट गांव का अहम बिन्दु –
सिंह ने कहा है कि गांवों में जल सरंक्षण के उपाय करना जरूरी है। उनका मानना है कि गांवों में पेयजल व कृषि की सिचाई के लिए तालाब का निर्माण किया जाना जरूरी है। तालाब का निर्माण स्मार्ट गांव का महत्वपूर्ण सूचकांक है।

स्मार्ट गांवों का रेखाचित्र मांगा-
राज्यपाल चाहते है कि विश्वविद्यालयों द्वारा गांवों में किए गए कार्यों से ग्रामीणों पर कितना सकारात्मक प्रभाव आया है। गोद लिए गए गांव का गोद लेने से पहले और बाद की स्थिति का मूल्यांकन किया जाना जरूरी है। गांवों में किए गए विकास कार्यों के मुल्यांकन से स्मार्ट गांवों का रेखाचित्र सामने आ सकेगा।

सामाजिक सरोकारों से जोडने का आव्हान –
राज्यपाल चाहते है कि उच्च शिक्षा का अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं को सामाजिक सरोकारों से जोडा जाना जरूरी है। गांवों से छात्र-छात्राओं को जोडकर ही उन्हें सामाजिक सरोकार सिखाये जा सकते है।

कुलाधिपति जाते हैं गांवों में –
राज्यपाल सिंह स्वयं गोद लिए गए गांवों में जाते हैं। वहां पेड के नीचे बैठकर ग्रामीणों से बात करते हैं। ग्रामीणों से चर्चा के दौरान ही गांवों की समस्या का निस्तारण करने के लिए प्रशासन को निर्देश देते हैं।

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मूल्यांकन से दूसरा चरण होगा आसान –
राज्यपाल का मानना है कि इस अध्ययन रिपोर्ट से ग्राम विकास के सम्बन्ध में व्यापक जानकारी प्राप्त होगी। यह मूल्यांकन दूसरे चरण में गोद लिए जाने वाले गांवों को स्मार्ट विलेज बनाने का आधार बन सकेगा।

ये हैं राज्यपाल के गांव –
कुलाधिपति के निर्देश पर 2 विश्वविद्यालयों द्वारा 24 गांव गोद लिए गए थे। गोद लिए गए गांवों में अजमेर में मुहामी, अलवर में हल्दीना, भरतपुर में बरसो, बीकानेर में डाइया, कोटडी व बेनीसर, जयपुर में पीपला भरतसिंह, बगरिया, अजमेरीपुरा व इडान का बास, जोधपुर में नांदडा, घडाव, लोडी पंडितजी व नोवरारोड, कोटा मे चोमाकोर, नीमोदाहरजी, डूंगरिया व ढोटी, सीकर में कटराथल, उदयपुर में रधुनाथपुरा, उन्नीथाल, कडरछावास व छाली तथा बांसवाडा में सागदोद हैं।