दिव्या मदेरणा किसान राजनीति को दिला पाएंगी परसराम मदेरणा जैसा मुकाम?

जयपुर।

राजस्थान की 15वीं विधानसभा के पहले सत्र के पहले दिन की कार्रवाई से लेकर अब तक अधिकांश वक्त चर्चा किसानों और युवाओं के इर्द-गिर्द ही घूम रही है।

राजस्थान की कांग्रेस सरकार के द्वारा गठन के 2 दिन के भीतर प्रदेश के सभी किसानों का 2 लाख रुपए तक का कर्जा माफ करने की घोषणा की गई थी, जिसको लेकर सरकार के भीतर लगातार प्रयास जारी हैं।

इस बीच मदेरणा परिवार की सियासी विरासत संभाल रहीं जोधपुर जिले की ओसियां विधानसभा क्षेत्र से विधायक दिव्या मदेरणा ने आज अपने फेसबुक पेज पर अपने पिता महिपाल मदेरणा के साथ फोटो शेयर की है।

दिव्या मदेरणा ने खुद के साथ पिता की फोटो शेयर करते हुए लिखा है कि “कठीन परिश्रम, लग्न, ईमानदारी, अनुभवी सलाह, बुजुर्गों के आशिर्वाद का कोई विकल्प नहीं .. यह सफलता की कुंजी हैं..” जिसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं।

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दिव्या मदेरणा के द्वारा अपने फेसबुक पेज पर उनके पिता महिपाल मदेरणा के साथ जो फोटो शेयर की गई है, वह संभवत तब की है जब दिव्या कांग्रेस में राजनीति का क ख ग… सीख रही थी।

गौरतलब है कि कल विधानसभा की कार्रवाई के दौरान भाजपा के नेता मदन दिलावर द्वारा सदन में महिला उत्थान के नाम पर कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाते हुए भंवरी देवी कांड पर बोला तो तब विधायक दिव्या मदेरणा भड़क उठी थीं।

उससे पहले भी दिव्या मदेरणा विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के चुनाव के बाद उनको बधाई एवं शुभकामनाएं देते वक्त भी बोल रही थीं, तब भी वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा उनके अंदाज को देखकर कहा गया कि उनके भीतर उनके दादा परसराम मदेरणा के सियासी गुण मौजूद है।

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उल्लेखनीय है कि राजस्थान की राजनीति और खासकर कांग्रेस पार्टी को जन-जन तक ले जाने में दिव्या मदेरणा के दादा, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, दिग्गज किसान नेता परसराम मदेरणा और दिव्या के पिता महिपाल मदेरणा का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

राजस्थान में कांग्रेस पार्टी आज इस मुकाम पर है, वहां पहुंचाने में जिन नेताओं का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है, उनमें संभवत परसराम मदेरणा का नाम बलदेवराम मिर्धा के साथ सबसे ऊपर आता है।

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परसराम मदेरणा के अलावा परिवार के बलदेव राम मिर्धा, नाथूराम मिर्धा, रामनिवास मिर्धा, और शीशराम ओला जैसे किसान नेताओं की वजह से कांग्रेस पार्टी इतने बरसों बाद भी राजस्थान में सत्ता प्राप्त करने में कामयाब रही है।

अधिकांश दिग्गज कांग्रेसी नेता अब दुनिया से विदा हो चुके हैं, लेकिन परसराम मदेरणा की सियासी विरासत को अपने कंधों पर उठाये विधानसभा की दहलीज पर पहुंची दिव्या मदेरणा के सदन के भीतर तेवर देखकर सहज ही कहा जा सकता है कि आने वाले वक्त में मदेरणा परिवार और किसानों की राजनीतिक विरासत को कोई खतरा नहीं है।

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बोलने की कला, तीखा लहजा और बिंदुओं के साथ अपनी बात कहने की महारत संभवतः दिव्या मदेरणा को विरासत में मिली है। इससे कहा जा सकता है की राजस्थान में किसानों की राजनीति करने के लिए एक महिला नेत्री भी सामने आ चुकी हैं।

जिस तरह से पहली बार चुनकर आने के बाद दिव्या मदेरणा राजस्थान की विधानसभा में हर वक्त ध्यान से कार्यवाही को देखती हैं, लिखती हैं और गहरी नजर रखने का प्रयास कर रही हैं, उससे यह बात भी साबित होती है कि उनके अंदर संवैधानिक परंपराओं और विधानसभा कार्यवाही की बारीकी को समझने की भूख भी विद्यमान है।

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