क्या लाहोटी ले पाएंगे तिवाड़ी का स्थान? पहला भाषण तो यही कहता है

जयपुर।

राजस्थान की विधानसभा में इन दिनों राज्यपाल कल्याण सिंह के अभिभाषण पर चर्चा चल रही है। राज्य सरकार का अगले 1 साल के दौरान किए जाने वाले कार्यों का विजन माने जाने वाले इस अभिभाषण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्षी पार्टी बीजेपी की तरफ से तरह-तरह के आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं।

कार्रवाई के आज पांचवे दिन पहली बार विधानसभा में प्रश्न का हल का आयोजन किया गया। उसके बाद सुनने काल और राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का दौर आगे बढ़ा।

कांग्रेस पार्टी के कई विधायकों ने सरकार के द्वारा राज्यपाल के अभिभाषण की भूरी-भूरी प्रशंसा की गई, वहीं विपक्ष की तरफ से बीजेपी ने राज्यपाल के अभिभाषण को कोरा कागज करार दिया।

लेकिन जिस विधायक के भाषण को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा रही मैं है सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार चुनकर आए अशोक लाहोटी। लाहोटी ने ना केवल प्वाइंटर्स में राज्यपाल के अभिभाषण में समालोचनात्मक रूप से कमियां निकाली, बल्कि साथ ही साथ पिछली बीजेपी सरकार की उपलब्धियों को भी आंकड़ों के साथ विस्तार से रखा।

करीब 2 साल तक महापौर रहने के बाद अशोक लाहोटी पूरी तरह से शहरी सरकारों के कार्य, केंद्र सरकार के द्वारा राज्य के 4 जिलों को स्मार्ट सिटी बनाने की प्रोजेक्ट को समझने और शहरों के विकास को लेकर अच्छी खासी समझ हासिल कर चुके हैं।

लाहोटी ने ना केवल वर्तमान सरकार को हिदायतें दी, बल्कि पूर्व सरकार के द्वारा शहरों के विकास, पानी, बिजली, सड़क, चिकित्सा समेत अनेक मुद्दों पर बारीकी के साथ अपना भाषण दिया।

उल्लेखनीय है कि अशोक लाहोटी पहली बार चुनकर विधानसभा पहुंचे हैं। इससे पहले 2008 में उनको सिविल लाइन में वर्तमान मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के सामने हार का सामना करना पड़ा था।

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राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र रहते हुए उन्होंने 2002-2003 के दौरान विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव जीता था। उसके बाद लगातार वह बीजेपी में सक्रिय रहे। साल 2015 के दौरान उन्होंने जयपुर शहर से पार्षद का चुनाव लड़ा और नगर निगम में पहुंचे।

लगातार पार्टी में काम करने और आरएसएस के सक्रिय सदस्य रहने के कारण अशोक लाहोटी एक मंजे हुए राजनेता के तौर पर सामने आ रहे हैं। हालांकि उनके भाषण के दौरान बीच-बीच में ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे एक मेयर अपनी सरकार की उपलब्धियों को विधानसभा के समक्ष रख रहे हैं।

अशोक लाहोटी ने सदन में बोलते हुए राज्य में कांग्रेस सरकारों के 50 साल और वसुंधरा सरकार के 5 साल के कार्यों की तुलना करते हुए बीजेपी सरकार के शासन को कहीं बेहतर बताया। उन्होंने जिस तैयारी के साथ भाषण दिया, वह निश्चित रूप से काबिले तारीफ़ रहा।

हालांकि, उनके आंकड़ों से सहमत नहीं होते हुए शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने उनको 50 साल बनाम 5 साल के आंकड़े बताने के बजाय कांग्रेस सरकार के 5 साल और बीजेपी सरकार के 5 साल के आंकड़े पेश करने को कहा, तो उन्होंने इस चुनौती को तुरंत प्रभाव से स्वीकार करते हुए बीजेपी सरकार और कांग्रेस के शासनकाल 5-5 साल के आंकड़े भी सदन में रख दिया।

राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान बोलते हुए अशोक लाहोटी ने जो अंदाज दिखाया है, उससे एकबारगी सांगानेर के पूर्व विधायक घनश्याम तिवाड़ी की याद ताजा कर दी।

गौरतलब है कि बीजेपी के दिग्गज नेता रहे तिवाड़ी भी ठीक इसी तरह से आंकड़ों के साथ और पूरी तैयारी के साथ विधानसभा में बोलते थे, जिसके कारण उनको विधानसभा के दौरान ‘पिन ड्रॉप साइलेंस’ के साथ सुना जाता था।

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ठीक उसी तरह से आज अशोक लाहोटी को विधायक और मंत्री सुन रहे थे। जिस तरह से बोलने की कला से लाहोटी ने अपनी बात रखी, उससे एक बात तो निश्चित तौर पर कही जा सकती है कि भले ही अशोक लाहोटी आने वाले समय पार्टी के भीतर तिवाड़ी की जगह नहीं ले पाएं, लेकिन कम से कम सांगानेर के विधायक के तौर पर क्षेत्र की समस्याओं को जरूर सदन के भीतर प्रमुखता से उठा पाएंगे।

उल्लेखनीय है कि घनश्याम तिवाड़ी ने पिछले साल की भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और खुद की भारत वाहिनी पार्टी बनाकर उसके चुनाव चिन्ह पर सांगानेर से लगातार चौथा चुनाव लड़ा। हालांकि, उनको हार का सामना करना पड़ा, मगर विधानसभा के भीतर आज भी उनके तौर तरीकों को लेकर विधायक चर्चा करते हुए दिख जाते हैं।

अशोक लाहोटी सांगानेर क्षेत्र से ही विधानसभा का चुनाव लड़कर सदन में पहुंचे हैं। उन्होंने जिस तरह आंकड़ों और तथ्यत्मकता के साथ अपना पहला भाषण दिया, उससे साफ है कि सदन को एक और बेहतरीन सदस्य मिल गया है।