मंत्री खुद को मंत्री नहीं समझ पा रहे, मंत्री के चोले से नहीं निकल पा रहे पूर्व मंत्री!

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जयपुर।

राजस्थान में 40 दिन पहले सरकार बदल चुकी है, लेकिन आज भी राज्य के विधायक, जो मंत्री बन गए हैं, वो खुद को मंत्री नहीं मान पा रहे हैं। तो दूसरी तरफ जिनका मंत्री पद जा चुका है, वो भी खुद को अभी मंत्री पद के चोले से बाहर नहीं आ पाए हैं।

यह बात विधानसभा में भी दिखाई देती है। सोमवार को भी शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़ को मंत्री मोहदय कहकर संबोधित किया। यह वाकया बार-बार घटित हुआ। इतना ही नहीं खुद राठौड़ ने भी मंत्री खाचरियावास को मंत्री बोलने के बजाए बार-बार सिविल लाइन से आने वाले सदस्य ही कहकर संबोधित किया।

इससे पहले शुक्रवार को भी सदन की कार्यवाही के दौरान मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, रमेश मीणा और मंत्री हरीश चौधरी ने बीजेपी विधायकों को कई बार मंत्री मोहदय कहकर संबोधित किया। राठौड़ और रमेश मीणा व खाचरियावास के बीच यह वाकया कई बार घटित हुआ।

यह मामला तो है सदन के भीतर। इसके अलावा सदन के बाहर भी सरकार के मंत्रियों के व्यवहार से ऐसा लगता है कि उनके अंदर पांच साल से छिपा हुआ विपक्ष बाहर नहीं निकल पा रहा है।

दूसरी तरफ बीजेपी की पूर्ववर्ती सरकार के मंत्री खुद को सत्ता से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। पूर्व मंत्रियों के व्यवहार से भी यही लगता है कि वो अभी मंत्री पद पर मौजूद हैं।

हालांकि, सत्ता पक्ष को विपक्ष में जाने पर और विपक्ष के सत्तापक्ष में आने पर विधायक काफी लंबे समय तक एडजस्ट नहीं हो पाते हैं। किंतु फिर भी सरकार बनने के एक माह से ज्यादा वक्त बाद भी अपने पुराने चोले से बाहर नहीं निकल पाना चिंताजनक है।

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