हर 100 साल में आती है महामारी, 1720, 1820, 1920 और अब 2020 में भयानक Covid-19

चीन के वुहान शहर से फैला है कोरोना वायरस।
चीन के वुहान शहर से फैला है कोरोना वायरस।

रामगोपाल जाट

कोरोना वायरस की चपेट में अब पूरी दुनिया आ चुकी है। सबसे ज्यादा करीब 5500 मौतें चीन में हुई है। चीन के एक शहर, वुहान से ही इस वायरस के सामने आने की सूचना मिली थी। शहर करीब दो माह से लॉक डाउन है। (Google samachar hindi)

अब तक इस महामारी की चपेट में 9 हजार से ज्यादा लोग आ चुके हैं, जबकि 1.50 लाख से ज्यादा लोग इसके प्रभाव में सामने आए हैं। भारत में भी अब तक 159 लोग पॉजिटिव और 3 लोगों की मौत हो चुकी है। (Google samachar hindi)

सबसे पहले 1720 में प्लैग…
आज से करीब 300 साल पहले, यानी 1720 में विश्व में प्लैग फैला था। इस प्लैग को ग्रेट प्लैग मार्सिले कहा जाता है, क्योंकि यह मार्सिले फ्रांस का एक शहर है, जहां पर इसकी शुरुआत हुई थी। कहा जाता है कि इसमें एक लाख से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। (Google samachar hindi)

1720 में प्लैग फैला था, जिसमें एक लाख से ज्यादा लोग मरे थे।
1720 में प्लैग फैला था, जिसमें एक लाख से ज्यादा लोग मरे थे।

1720 की इस महामारी की एक खास बात यह भी थी कि तब बुबोनिक प्लेग ने पूरे विश्व में लाखों लोगों को मौत की नींद सुला दिया था। फ्रांस के मार्सिले शहर में सर्वाधिक मौतें हुई थीं। इतिहासकारों के अनुसार तब यूरोप, अफ्रीका और एशिया में करीब 7 करोड़ लोग मौत की नींद सौ गए थे। (Google samachar hindi)

भारत में उस बीमारी का कहर 19वीं सदी तक रहा। महाकारी चूहों, पिस्सू से फैली थी, बीमारी का खौफ इतना था कि रात को स्वस्थ इंसान सो जाता था और सुबह मरा हुआ मिलता था। (Google samachar hindi)

फिर 1820 में कॉलेरा…
प्लैग के 100 साल बाद एशियाई देशों में कॉलेरा फैला था, जिसमें जापान के अलावा फ्रांस की खाड़ी के देश, बैंकॉक, भारत, मनीला, जावा, औमान, चीन, मॉरिसिश और सीरिया जैसे देशों में भारी तबाही मचाई थी। (Google samachar hindi)

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1820 में कॉलेरा करीब 10 लाख लोगों की मौत का कारण बना था।
1820 में कॉलेरा करीब 10 लाख लोगों की मौत का कारण बना था।

कॉलेरा के कारण अकेले जावा में ही एक लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई बताई जाती है। इसके अलावा फिलिपिंस, थाईलैंड, इंडोनेशिया में भी भारी मौत हुई थी। (Google samachar hindi)

द फर्स्ट कॉलर, यानी हैजा! 1820 में इस बीमारी से पहले थाईलैंड, इंडोनेशिया और फिलीपींस में आग की तरह फैली। कॉलेरा से अकेले जावा द्वीप में ही एक लाख लोग मरे थे। 1810 और 1811 में भारत में यह बीमारी मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरोप के अलावा रूस में इससे 8 लाख से ज्यादा लोग मरे थे। (Google samachar hindi)

इस बीमारी में लोग उल्टी, पानी की कमी के कारण रातों—रात ही मर जाया करते थे। साफ पानी नहीं मिलने के कारण कई गांव खाली हो गए थे। कई जगह पर तो लोगों की लाशों को जानवरों ने चट कर दिया था। (Google samachar hindi)

1920 में स्पेनिश फ्लू…
कॉलेरा के 100 साल बाद फिर से एक महामारी आई, जिसको स्पेनिश फ्लू कहा जाता है। यूं तो यह बीमारी 1918 में फैली थी, लेकिन इसके कारण मौतें 1920 में ही हुई थीं। तब इस महामारी के कारण दुनिया में करीब 5 करोड़ लोगों की मौत हो गई थी। (Google samachar hindi)

1920 में स्पेनिश फ्लू के कारण दुनिया में करीब 5 करोड़ लोगों की जान गई थी।
1920 में स्पेनिश फ्लू के कारण दुनिया में करीब 5 करोड़ लोगों की जान गई थी। (यह फोटो केवल सांकेतिक है।)

ऐसे ही स्पैनिश फ्लू पिछली सदी की सबसे भयानक बीमारी थी। 1919 में दुनिया के एक तिहाई हिस्से में इस बीमारी के कारण आबादी खामोश हो चुकी थी। (Google samachar hindi)

यह वायरस सबसे पहले यूरोप, यूएसए और एशिया के कुछ हिस्सों में फैला था। जिसमें करीब 5 करोड़ लोगों की मौत बताई जाती है। कुछ इतिहासकार इसको 2 करोड़ की संख्या बताते हैं। (Google samachar hindi)

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अकेले भारत में ही 2 करोड़ लोगों की मौत बताई जाती है। यह वायरस एच1, एन1 फ्लू था। जो कि खांसी, छींकने के दौरान बूंदों के द्वारा दूसरों तक पहुंचता था। तब मास्क लगाने का चलन आधुनिक विज्ञान में नहीं था। (Google samachar hindi)

और 2020 में अब कोरोना वायरस का कहर….
चीन के वुहान शहर से कोरोना वायरस की शुरुआत हुई है। अब तक इस महामारी से दुनियाभर में 9 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। (Google samachar hindi)

दुनिया के 100 से देशों में यह महामारी फैल चुकी है। चीन के अलावा इटली, ईरान, जर्मनी, अमेरिका समेत कई देशों में तबाही मच चुकी है। इटली और ईरान के कई शहर लॉक डाउन हो चुके हैं। (Google samachar hindi)

चीन के वुहान शहर से फैला है कोरोना वायरस।
चीन के वुहान शहर से फैला है कोरोना वायरस।

बता दें कि किसी भविष्यवेता ने काफी पहले ही 2020 में महामारी फैलने और इसके कारण दुनिया की आधी आबादी खत्म होने का दावा किया था। वर्ष 2008 में प्रकाशित ‘एण्ड ओफ डेज’ नाम की किताब में भी इसी तरह की बीमारी का दावा किया गया था।

उससे पहले 1981 में ‘द आइज ओफ डार्कनेश’ नामक किताब में तो यहां तक दावा किया गया था कि चीन के वुहान से एक बीमारी शुरु होगी, जो फैंफड़ों और सांस पर अटैक कर दुनियाभर में मौतों का कहर बरपाएगी।