सतीश पूनिया में हैं गंभीर और लंबी रेस के राजनीतिज्ञ की संभावनाएं

जयपुर।

15वीं विधानसभा के पहले सत्र का आज तीसरा दिन पूरा हो गया। आज का दिन भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के विधायकों द्वारा राजस्थान की सबसे बड़ी पंचायत में किसानों के संपूर्ण कर्ज माफी को लेकर उठाई गई आवाज के रूप में याद किया जाएगा।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की तरफ से संयोजक हनुमान बेनीवाल उनके दूसरे विधायक पुखराज गर्ग और मेड़ता सिटी से पहली बार चुनकर विधानसभा पहुंची इंदिरा देवी ने किसानों की कर्ज माफी को लेकर विधानसभा अध्यक्ष के मार्फत सरकार के समक्ष पुरजोर शब्दों में मांग उठाई।

उनके साथ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के बलवान पूनिया और दूसरे विधायक गिरधारी लाल माहिया ने भी विधानसभा में किसानों की मांग के साथ वामपंथी आवाज को बुलंद किया।

एक तरफ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के तीनों विधायक थे, तो उनका साथ देने के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के दो विधायक। दूसरी तरफ सदन में भारतीय जनता पार्टी एकजुट होकर सरकार को घेरने का प्रयास कर रही थी।

मजेदार बात यह है कि विधानसभा की वैल में नारेबाजी करते हुए भारतीय जनता पार्टी के सभी विधायकों का पहली बार चुनकर पहुंचे विधायक सतीश पूनिया नेतृत्व करते हुए नजर आए। सतीश पूनिया हालांकि भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता हैं, लेकिन राज्य की सबसे बड़ी पंचायत में विधायक के रुप में पहली बार पहुंचे हैं।

सुबह 11:00 बजे आज प्रश्नकाल नहीं होने के कारण विधानसभा शून्यकाल से कार्यवाही स्टार्ट हुई। उसके साथ ही किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी को लेकर भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के विधायकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके चलते विधानसभा की कार्रवाई तीन बार स्थगित करनी पड़ी है।

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बाद में दोनों पक्षों के बीच इस बात पर सहमति बनी, कि विधानसभा के माध्यम से सरकार तक विपक्ष की आवाज पहुंच चुकी है। विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष की बात को सरकार तक पहुंचने का हवाला देते हुए कार्यवाही आगे बढ़ाने की अपील की, जिसको सभी सदस्यों ने स्वीकार करते हुए बिना किसी शोर-शराबे के आगे की कार्रवाई में शामिल हुए।

शाम को 5:30 बजे तक विधानसभा की कार्रवाई संचालित होती रही। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी की तरफ से उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, मार्क्सवादी पार्टी के बलवान पूनिया और कांग्रेस पार्टी की तरफ से दो विधायकों के अलावा भाजपा के सतीश पूनिया को भी राज्यपाल के अभिभाषण पर बोलने की अनुमति मिली।

वैसे तो सतीश पूनिया अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की तरफ से राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ का चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उनको हार का सामना करना पड़ा था। उसके बाद पूनिया लगातार आरएसएस में सक्रिय रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी में काम करते रहे। एबीवीपी-आरएसएस बीजेपी में लंबे समय तक काम करने के कारण उनकी परिपक्वता और गंभीरता आज विधानसभा में बोलते हुए नजर आई। सदन में अपने पहले उद्बोधन में ही पूनिया ने आने वाले वक्त में राजस्थान के एक धीर-गंभीर और लंबी रेस के राजनीतिज्ञ के गुण दिखा दिए हैं।

सतीश पूनिया ने विधानसभा में बोलते हुए प्रदेश की स्थिति के साथ ही राज्यपाल के अभिभाषण में शामिल की गई बातों पर चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा विधानसभा में रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएगी, बशर्ते सरकार राज्य के हित में काम करे।

विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए सतीश पूनिया ने एक बार फिर सदन में कही गई बातों को दोहराते हुए राज्य सरकार से किसानों की संपूर्ण कर्जामाफी करने की मांग की। पूनिया ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के द्वारा जो बात कही गई थी, उसको पूरा किया जाए। पूनिया ने कहा कि राज्य सरकार ने कांग्रेस के मेनिफेस्टो को गवर्नमेंट डॉक्यूमेंट बनाया है, तो उसकी संपूर्ण बातों को अक्षरसः लागू करे।

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हालांकि, सतीश पूनिया राज्य विधानसभा में चुनकर पहली बार पहुंचे हैं, लेकिन भाजपा की तरफ से वह विभिन्न मंचों पर राज्य की जनता, राज्य के हितों और प्रदेश की समस्याओं को लेकर जिस गंभीरता से चर्चा और बहस करते आए हैं, निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि उसका प्रभाव राज्य विधानसभा में उनके द्वारा आने वाले 5 साल तक कार्यवाही में भाग लेने पर भी रहेगा।

परिपक्वता, सम्बंधित विषय के ज्ञान और विधायिका के नियमों का संपूर्ण अध्ययन सतीश पूनिया के द्वारा सदन में दिए गए पहले भाषण में ही स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इससे पता चलता है कि पूनिया आने वाले वक्त में न केवल भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता साबित हो सकते हैं, बल्कि राज्य की सियासत को भी एक गंभीर और विषय की समझ रखने वाला सम्पूर्ण राजनीतिज्ञ मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

उल्लेखनीय है कि आमेर विधायक सतीश पूनिया को उनके अनुभव, संगठन में काम करने की क्षमता और भाजपा को अच्छे से समझने की कला के चलते ही विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने चुनाव सह संयोजक की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी।

सतीश पूनिया को बीच बीच में प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाएं भी होती रहती हैं। हालांकि, पार्टी की तरफ से इसके पक्ष या विपक्ष में कभी कोई अधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।