दादा मदेरणा की तरह ही प्रखर वक्ता हैं दिव्या मदेरणा

जयपुर।

राजस्थान की राजनीति में चुनिंदा नेताओं का नाम नहीं लिया जाए तो प्रदेश की सियासत अधूरी ही रहेगी। ऐसे ही दिग्गज सियासत के भीष्म पितामह कहे जाने वाले परसराम मदेरणा थे।

राजस्थान की राजनीति, खासकर पश्चिमी राजस्थान परसराम मदेरणा जब तक जीवित थे, तब तक ना केवल कांग्रेस बल्कि पूरे राजस्थान की राजनीति उनके इर्द-गिर्द रहा करती थी। 16 फरवरी 2014 को दिग्गज नेता मदेरणा के निधन से पहले तक राजस्थान में कांग्रेस पार्टी के द्वारा जो भी निर्णय लिए जाते थे, उनमें उनका दखल नहीं तो कम से कम मार्गदर्शन जरूर हुआ करता था।

पहली बार 1957 में विधायक के रुप में परसराम मदेरणा राजस्थान के विधानसभा में पहुंचे थे। उससे पहले उन्होंने सरपंच से अपनी सियासत शुरू की थी। तब से लेकर लगातार 1985 तक विधायक बनते गए। 1990 से लेकर 2003 तक मदेरणा फिर लगातार विधायक रहे।

अपने 9 बार के विधायक काल में परसराम मदेरणा ने राजस्थान के विभिन्न सरकारों में तकरीबन सभी विभागों की मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई। 1990 से 93 और 1993 से लेकर 1998 तक 2 बार परसराम मदेरणा नेता प्रतिपक्ष भी रहे।

1998 से लेकर 2003 तक कांग्रेसी सियासत के भीष्म पितामह कहे जाने वाले परसराम मदेरणा को राजस्थान की सबसे बड़ी पंचायत, यानी विधानसभा का अध्यक्ष चुना गया। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष रहते हुए नए कीर्तिमान स्थापित किए।

राजस्थान के विधानसभा ही नहीं, बल्कि विधानसभा के बाहर जनता के बीच रैलियों और सभाओं में परसराम मदेरणा को सुनने के लिए लोग ठहर जाया करते थे। प्रखर वक्ता, स्पष्टवादी नेता और इमानदार छवि के चलते परसराम मदेरणा हमेशा किसानों के मुखिया बन कर रहे।

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उनके निधन के करीब 3 साल बाद राजस्थान के विधानसभा में अब एक बार फिर से ऐसे स्पष्टवादी, प्रखर और बेदाग छवि के विधायक की उपस्थिति मानी जा रही है, जिनको सुनने के लिए ना केवल उनके समर्थक, बल्कि विपक्षी लोग भी बेताब रहते हैं।

परसराम मदेरणा की पोती और जोधपुर के ओसियां विधानसभा क्षेत्र के विधायक दिव्या मदेरणा ने 15वीं विधानसभा के पहले सत्र के दूसरे दिन ही अपने छोटे से उद्बोधन में इस बात के स्पष्ट झलक दिखा दी कि उनके भीतर भी कहीं न कहीं उनके दादा परसराम मदेरणा की छवि छिपी हुई है।

यह कहना तो अभी जल्दबाजी होगा कि दिव्या मदेरणा आने वाले वक्त में राजस्थान की सियासत में परसराम मदेरणा का स्थान ले पाएगी, लेकिन इतना जरूर है की उनके भीतर छुपे हुए भविष्य के बड़े एक राजनेता की स्पष्ट झलक लोगों को आने वाले 5 साल के दौरान राजस्थान विधानसभा के भीतर दिखाई देगी।