मोदी के बयान का विरोध करते हैं कॉमरेड, लेकिन कांग्रेस की नाकामी पर क्यों नहीं बोलते?

जयपुर।

अखिल भारतीय किसान सभा की राज्य कमेटी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमराराम, राज्य अध्यक्ष पेमाराम और राज्य महासचिव छगन चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को संवेदनशील करार दिया है। वो आज पिंकसिटी प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में बोल रहे थे।

अमराराम ने कहा कि गंभीरता से संकट के दौर, गिरती कृषि आय और बढ़ती ऋणग्रस्तता के समय में ऋणमाफी का प्रभाव होता है, बशर्ते यह वास्तविक हकदार तक पहुंचाएं। यह संकटग्रस्त किसानों के लिए बहुत आवश्यक, और अस्थाई राहत प्रदान करती

अमराराम ने कहा कि प्रधानमंत्री को यह ध्यान रहना चाहिए कि ऋणमाफी की बात उस संदर्भ में हो रही है, जिसमें की भाजपा सरकार कृषि उत्पादन की बढ़ती लागतों रोकने में पूरी तरह से विफल रही है। किसानों के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चयनात्मक-स्मृतिलोप की बीमारी से प्रभावित हो रहे हैं और कृषि ऋणमाफी पर उनके हालिया बयान से बेईमानी की बू आती है।

अमराराम ने कहा कि 2014 के चुनाव अभियान के दौरान प्रधानमंत्री के भाषण में न केवल किसानों को ऋणमाफी का वादा किया गया था, बल्कि हर खाते में 15 लाख रुपए का वादा भी किया गया था, जो आजतक पूरा नहीं हुआ है।

उनके मुताबिक एआईकेएससीसी के बैनर तले एआईकेएस और किसान संगठनों के साथ अन्य संगठनों द्वारा चलाए गए तीव्र संघर्षों के फलस्वरुप ही प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भी फरवरी 2017 में एक बार फिर से किसानों से ऋण माफी का वादा किया था।

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महाराष्ट्र, राजस्थान में भाजपा सरकार और किसान कर्जमाफी की मांग को लेकर लगातार संघर्षों के बाद कृषि ऋणमाफी की घोषणा करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। यह गंभीर इस पूरे मामले का मजाक बनाकर देश के किसानों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले प्रधानमंत्री मोदी, भारतीय जनता पार्टी की सरकारों को राहत आयोग की ओर देखना और सीखना चाहिए।

उनको यह भी सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने चाहिए कि कर्जमाफी हो और उसका असली किसानों, किसान किराएदारों, छोटे और मध्यम किसानों खेत मजदूरों को उसका लाभ मिले। उन्होंने कहा कि किसान सभा नरेंद्र मोदी और भाजपा को यह याद दिलाना चाहती है।

अमराराम ने कहा है कि नव उदारवादी आर्थिक नीतियों में सरकार के निवेश को वापस लेने घटते व्यापार और उदार नीति देने, आयात नीतियों, नोटबंदी जैसे किसान एवं कृषि विरोधी फसलों को भयंकर नुकसान पहुंचाया है। इससे किसानों को अत्यधिक व्यय की ओर धकेल दिया है।

उन्होंने कहा कि कर्जमाफी के खिलाफ बात के खिलाफ बोलने वाले नरेंद्र मोदी एवं भाजपा सरकार की नीतियों को पलटने की आवश्यकता है। ऐसी नई विश्वसनीय नीतियों के सामने आना चाहिए।

उन्होंने कहा है कि जब तक केंद्र सरकार संपूर्ण कर्ज़माफ करती है, तब तक सरकार को चैन से नहीं बैठने देंगे। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ जुमलेबाजी कर रहे मोदी और भाजपा को भी धूल चटाने का काम राजस्थान का किसान करेगा।

साथ ही किसान सभा की राज्य कमेटी यह भी मांग करती है कि केंद्र और राज्य सरकारें लाभकारी कृषि नीति का पालन करें, उत्पादन लागत में कमी सुनिश्चित करें।

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फसलों के लाभकारी दाम और पारिश्रमिक की कीमतों को सुनिश्चित करें, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और विपणन में किसानों की सहायता करें, उत्पादन लागत कम करने के काम को सुनिश्चित करें।

केंद्र की बीजेपी सरकार और नरेंद्र मोदी अपने चुनावी समय के किसानों के किए गए वादों को पूरा करने में विफल हैं, और थोथी बयानबाजी कर रहे हैं। उसी राज्य की कांग्रेस सरकार जाती हुई नजर आ रही है।

किसान सभा ने राज्य की कांग्रेस सरकार को भी चेतावनी दी है कि देश को देख कर चुके हैं। आगामी समय के आंदोलनों के चुनावों में भी किसान विरोधियों सुनिश्चित करने के लिए माहौल बनाएंगे।

उन्होंने कहा कि 8 जनवरी को गांव-गांव में जाकर राज्य के कर्ज माफी के आदेश की प्रतियां चलाएंगे, और किसानों-मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे।

प्रेस वार्ता के बाद अनौपचारिक बात करते हुए अमराराम ने कहा कि किसानों को लेकर कोई भी पार्टी कोई भी संगठन गंभीर नहीं है। इसी का परिणाम है कि ऋण माफी की बात तो सब करते हैं, लेकिन करता कोई भी नहीं है।

अमराराम ने कहा कि किसानों के लिए जब तक स्थाई रूप से ऋण नहीं लेने की योजना के लिए सरकारों द्वारा काम नहीं किया जाएगा, तब तक सभी ऋण माफी बेनामी है, और केवल राजनीतिक स्टंटबाजी है।

अमराराम ने केंद्र सरकार से तत्काल प्रभाव से देश में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को अक्षरसः लागू करने की मांग करते हुए कहा कि इसके बिना किसानों को गरीबी से नहीं उबारा नहीं जा सकता।

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