कोरोना वायरस के नाम से भाग गए आरयूएचएस के डॉक्टर-स्टाफ, जयपुर का है मामला

जयपुर।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में कोरोना वायरस के मरीजों की एंट्री के साथ ही दहशत भी चरम पर पहुंच चुकी है। सरकार द्वारा कोरोना वायरस के मरीजों को एसएमएस अस्पताल से आरयूएएचएस के अस्पताल में शिफ्ट किए जाने का आदेश क्या हुआ वहां के डॉक्टर और अन्य स्टाफ अस्पताल छोड़कर ही भाग गया।

स्थिति यह हो गई कि पहले से मरीजों के लिए तरस रहे अस्पताल में से देर रात मरीज भी अपने अपने घर भाग गए। सबसे बड़ी बात यह है कि यहीं पास में बने कैंसर इंस्टीट्यूट में भी दहशत फैल गई है। इतना ही नहीं, निजी अस्पताल नारायणा प्रबंधन भी किसी तरह से अपने यहां भर्ती मरीजों को रोकने में लगा हुआ है।

ऐसे में स्थिति संभालने के लिए देर रात सरकार को आदेश जारी करना पड़ा कि जो डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ एसएमएस अस्पताल में मरीज एंड्री काली और उसकी पत्नी का उपचार कर रहे थे, वही आरयूएचएस में इलाज करेंगे।

इससे पहले जब मेडिकल शिक्षा के सचिव वैभव गालरिया ने एसएमएस में उपचार करवा रहे मरीज एंड्री काली और उसकी पत्नी को आरयूएचएस में भर्ती करने का आदेश जारी किया तो प्रताप नगर स्थित इस अस्पताल में सूचना ने आग में घी का काम किया।

अस्पताल के प्रबंधक से लेकर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और रजिस्ट्रार को भी भारी विरोध का सामना करना पड़ा। प्रिंसिपल राजाबाबू पंवार और रजिस्ट्रार कालूराम चौधरी ने सरकारी आदेश को मानने की बात कही तो ओटॉनोमस बॉडी होने की बात कहकर डॉक्टरों ने उपचार से मना कर दिया।

स्थिति यह हो गई कि यहां पर उपचार के लिए रात को रहने वाले स्टाफ ने भी अस्पताल परिसर में रहने से मना कर दिया। रात करीब 10 बजे तक अस्पताल में, अस्पताल के स्टाफ ने छुट्टी लेने का मन बना लिया। ऐसे में सरकार ने देर रात दूसरा आदेश जारी किया।

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गौरतलब है कि सरकार ने बिना किसी आरयूएचएस प्रबंधन की सहमति के ही एसएमएस अस्पताल से मरीज एंड्री काली को शिफ्ट करने का आदेश जारी किया दिया, जबकि यहां के किसी व्यक्ति को जब पता चला, जब मरीज को भर्ती कर दिया गया।

मजेदार बात यह है कि सरकार ने आरयूएचएस के आदेश तो जारी कर दिया, किंतु इस आदेश में यह नहीं बताया है कि आरयूएचएस में नियमित उपचार के लिए आने वाले मरीजों को बुधवार से अस्पताल में आना है या नहीं। ऐसे में सरकारी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इसके बाद आज सुबह, बुधवार को भी अस्पताल में दहशत फैली हुई है। अस्पताल के डॉक्टर भी नहीं पहुंचे हैं, जबकि कई डॉक्टर छुट्टी पर जा रहे हैं। घनी आबादी क्षेत्र में कोरोना के मरीजों को रखना सरकारी लापरवाही को इंगित करता है।