वसुंधरा राजे, रीटा चौधरी, मुकेश भाखर, कृष्णा पूनियां जैसे 36 विधायकों का खाता बन्द पड़ा है!

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प्रदेश की जनता विधायकों को बड़ी उम्मीद के साथ चुनकर विधानसभा भेजती है, ताकि सरकार के समक्ष उनकी समस्याओं को उठा सके और उनका समाधान करवा सकें। लेकिन विडम्बना देखिए राजस्थान विधानसभा में 15 महीने पहले चुनकर आए 36 विधायक ऐसे हैं, जिन्होंने सरकार के समक्ष एक बार भी आवाज नहीं उठाई।

हालांकि इनमें रीटा चौधरी ऐसी हैं जो उपचुनाव में जीत कर आई थीं, लेकिन बाकी बचे हुए 35 विधायक दिसंबर 2018 में चुनकर विधानसभा पहुंच गए थे। इन विधायकों में अधिकांश कांग्रेस के ही हैं, जो अपनी सरकार के सवाल पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पाए हैं।

सबसे चौंकाने वाला नाम पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का है, जिन्होंने राजस्थान में 10 साल तक शासन किया, लेकिन अब अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ एक सवाल भी पूछने की हिमाकत नहीं कर पाई हैं।

माना जाता है कि वसुंधरा सरकार के समय अशोक गहलोत द्वारा विरोध नहीं करने और सवाल नहीं पूछने का कर्जा वसुंधरा राजे इसी तरह से चुका रही हैं। उल्लेखनीय है कि अशोक गहलोत ने भी पिछले 5 साल तक विधानसभा में 1 शब्द भी नहीं बोला था।

राजस्थान विधानसभा के मौजूदा सत्र में 17 बैठकें हो चुकी है लेकिन इस दौरान कांग्रेस के 23 विधायक और भाजपा के 11 विधायक एक भी सवाल पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। एक विधायक निर्दलीय है।

वसुंधरा राजे के अलावा पूर्व मंत्रियों में जितेंद्र सिंह, राजेंद्र पारीक, महेंद्रजीत सिंह मालवीय और भंवर लाल शर्मा ऐसे हैं, जिन्होंने सवाल नहीं पूछा है। इसके साथ ही वसुंधरा राजे सरकार में मंत्री रहे नरपत सिंह राजवी भी सवालों से दूर हैं।

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पहली बार चुनकर आए विधायकों में कृष्णा पूनिया, मुकेश भाकर, वेद प्रकाश सोलंकी, रोहित बोहरा, प्रशांत बैरवा दीपचंद, अमीन कागजी जैसे नाम शामिल हैं, जो सरकार से सवाल करने की हिम्मत नहीं कर पाए हैं। सवालों में इनका खाता बन्द पड़ा है।

भाजपा की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, अशोक डोगरा, कल्पना देवी, गोपीचंद मीणा, नरपत सिंह राजवी, पुष्पेंद्र सिंह, ललित कुमार ओस्तवाल, विट्ठल शंकर अवस्थी, सिद्धि कुमारी, सुरेंद्र सिंह राठौड़ और हरेंद्र निनामा शामिल हैं।

इसी तरह से कांग्रेस में हेमाराम चौधरी, रोहित बोहरा, वेद प्रकाश सोलंकी, राजेंद्र सिंह गुड्डा, राजेंद्र पारीक, मुकेश भाकर, महेंद्र जीत सिंह मालवीय, भंवर लाल जाटव, भंवर लाल शर्मा, राजेंद्र सिंह बिधूड़ी, प्रशांत बैरवा, रीटा चौधरी, परसराम मोरदिया, निर्मला सहरिया, दीपचंद जितेंद्र सिंह, कृष्णा पूनिया, अशोक, अमीन कागजी और अमर सिंह जैसे नाम शामिल हैं। इसके साथ ही निर्दलीय में महादेव सिंह खंडेला और रामकेश मीणा हैं।