छोटे दलों के जनप्रतिनिधि अपनी राजनीतिक पार्टियों से पूछे बिना ही दूसरे दलों में विलय कर लेते हैं, यह लोकतंत्र का मजाक है: सीपी जोशी

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विधानसभा और लोकसभा में चुनाव है जनप्रतिनिधि को अयोग्य करार देने की शक्ति अध्यक्ष को दी गई है, लेकिन यह शक्ति हो लोकतंत्र को कमजोर कर रही है।

यह कहना है विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी राजस्थान विधानसभा में संविधान की दसवीं अनुसूची में अध्यक्ष की भूमिका को लेकर आयोजित एक विशेष सेमिनार में उन्होंने यह बात कही जोशी ने पार्टी अध्यक्ष को दिए गए अधिकारों का दुरुपयोग हो रहा है।

सीपी जोशी ने कहा कि आज छोटी पार्टी जिसके जनप्रतिनिधियों की संख्या कम है, वह पार्टी को पूछे बिना ही बहुमत के आधार पर दूसरी पार्टी में विलय कर लेती है।

यह लोकतंत्र का मजाक है, क्योंकि जनता ने उन्हें व उनके दल को जीता कर भेजा था। माना जा रहा है कि सीपी जोशी ने इस बात के जरिए बसपा के विधायकों को आड़े हाथ लिया है।

क्योंकि गत दिसंबर 2019 में ही राजस्थान में बसपा के 6 विधायकों ने कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी अविनाश पानी की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता ले ली थी। राजेंद्र गुढ़ा, जोगिंदर सिंह अवाना, वाजिब अली, लाखन सिंह मीणा, संदीप यादव और दीपचंद खेरिया शामिल हैं। गहलोत सरकार के पूर्व कार्यकाल में भी इसी तरह से बसपा के विधायकों को तोड़ने का आरोप लगा था।

सेमिनार में सीपी जोशी शनिवार की बड़ी राजनीतिक पार्टियों में अलग तरह का खेल हो रहा है, वहां जनप्रतिनिधियों को इस्तीफा दिलवा कर बहुमत मैनेज कर दोबारा चुनाव करवा लिया जाता है।

सीपी जोशी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अयोग्य करार देने का अधिकार पार्टी अध्यक्ष को होना चाहिए। किसी भी राजनीतिक दल का अध्यक्ष चुनाव आयोग को लिखकर भेजें कि उक्त प्रतिनिधियों हमारी पार्टी की रीति नीति के अनुसार काम नहीं कर रहा है।

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ऐसे में इसे अयोग्य करार दिया जाए। जोशी ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का काम संसदीय नियमों के अंतर्गत सदन को सुचारू रूप से चलाने का है।

उड़ीसा विधानसभा के अध्यक्ष डॉ सूर्यनारायण पत्रों ने कहा कि स्पीकर को संविधान में मिली शक्तियों का पूरा उपयोग लेना चाहिए।

राजनीतिक व्यवस्था में स्थिरता के लिए संवैधानिक संशोधन के माध्यम से दल बदल कानून लाया गया था। सांसद या विधायक को अयोग्य ठहराने के संबंध में निर्णय करने का अधिकार है, इसके उद्देश्य की सही ढंग से प्राप्त नहीं हो सकी है। वो पहले सत्र में संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि हाल ही में कर्नाटक में सरकार गठन पर काफी चर्चा हुई। सुप्रीम कोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर सदस्यों को अयोग्य ठहराने के संबंध में राय देने के लिए कहा है।

लोकसभा अध्यक्ष ने उड़ीसा एवं कर्नाटक विधानसभा अध्यक्षों की एक समिति का गठन किया है। उन्होंने स्वयं की संविधान से मिली शक्तियों का समुचित उपयोग करें, लेकिन उन्हें नहीं होनी चाहिए।

राजस्थान विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने राजनीति में प्रदूषण को दूर करने के लिए जाने की वकालत की है, सदस्यों का निर्णय के आधार पर होना चाहिए लोकतंत्र को स्वस्थ रखने के लिए संविधान के उद्देश्य के साथ धोखा है, मतदाता के निर्णय को भी नहीं होनी चाहिए।

सरकारी मुख्य सचेतक डॉ महेश जोशी ने कहा कि आज अधिकारियों की शुरुआत हुई है, इसकी व्यवस्था और मजबूत होगा।