2008 और 2018 में BSP के 6-6 विधायकों को कांग्रेस में लेने वाले CM गहलोत ने की दल-बदल कानून को सख्त बनाने की बात

जयपुर।

वर्ष 2008 जब कांग्रेस के पास केवल चीन में विधायक थे और सत्ता में बने रहने के लिए उसके पास कम से कम 101 विधायक होनी जरूरी थे।

ऐसे में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बहुजन समाज पार्टी के जीत कर आए 6 विधायकों को कांग्रेस में शामिल करके राज्य की राजनीति में जादूगरी दिखाने का प्रयास किया था।

इसके बाद अशोक गहलोत ने 2018 में तीसरी बार सत्ता संभाली तब कांग्रेस के पास 99 विधायक थे। गहलोत ने एक बार फिर से जादूगरी दिखाते हुए 2018 के आखिरी महीनों में बहुजन समाज पार्टी के जीत कर आए छह विधायकों को दूसरी बार कांग्रेस में शामिल कर लिया।

इस तरह से अशोक गहलोत ने 2008 और 2018 में दो बार बहुजन समाज पार्टी का कांग्रेस में विलय किया। अशोक गहलोत और कांग्रेस का यह कदम बिल्कुल दल बदल कानून के तहत किया गया था।

दूसरी तरफ शनिवार को राजस्थान विधानसभा में दसवीं अनुसूची के अंतर्गत अध्यक्ष की भूमिका पर विमर्श के दौरान अशोक गहलोत ने कहा कि, “संसद में ऐसा सख्त कानून बने कि कोई जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद दल नहीं बदल सके, ऐसा करें तो उसकी सदस्यता चली जाए।”

एक तरफ जहां एक विपक्षी दल के सभी सदस्यों को 10 साल के अंतराल में किसी मुख्यमंत्री के द्वारा राजस्थान में दो बार दल बदल के तहत अपने दल में शामिल कर लिया हो, वहीं मुख्यमंत्री इस तरह से विधानसभा में दावा करें कि “दलबदल को लेकर सख्त कानून बनना चाहिए”, तब जनता क्या सोचती होगी?

अशोक गहलोत ने अपना दर्द जाहिर करते हुए कहा कि अगर कोई विधायक पार्टी छोड़ कर जा रहे हों, तो पार्टी उन्हें बाहर कैसे दिखा सकती है?

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उन्होंने एक तरह से चुनाव आयोग, हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के जजों और राष्ट्रपति पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह सभी लोग इन पदों पर बैठने से पहले किसी ने किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए होते हैं, ऐसे में क्या यह मान लिया जाए कि उनका फैसला पार्टी को देख कर लिया गया है?

अशोक गहलोत ने एक बार फिर से केंद्र सरकार को निशाना बनाते हुए कहा कि 4 जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा था कि “लोकतंत्र खतरे में है और बाद में उन्हीं में से एक जज चीफ जस्टिस बनते हैं, तब उन्होंने जोधपुर में भी कहा था कि रंजन गोगोई पहले से ही थे या बाद में?”

इस अवसर पर राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा हर पार्टी उम्मीदवार का जिम्मा है कि अपने दल की नीति से चले वह दल बदलता है तो पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी है कि उसके विरुद्ध कार्रवाई करें। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि इस कानून को लागू करने में विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका उचित नहीं है, जनप्रतिनिधियों को अयोग्य करने का हक पार्टी अध्यक्ष को, वहीं चुनाव आयोग को पत्र लिखे।

विधानसभा के अंदर दल बदल पर चर्चा के दौरान बोलते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि चुनाव के वक्त उनकी सभी की पार्टियां चंदा लेती है, लेकिन भ्रष्टाचार खत्म करने की बात करती है। ऐसे में भ्रष्टाचार खत्म कैसे किया जा सकता है भ्रष्टाचार तो चंदे से ही शुरू हो जाता है।

राजस्थान में दल बदल के मामलों की बात की जाए तो 2018 के विधानसभा चुनाव में वर्तमान छह विधायकों ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था।

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चुनाव जीतने के बाद सभी ने बहुजन समाज पार्टी छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ले ली है।

इससे पहले 2008 में बहुजन समाज पार्टी के 6 विधायकों ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया था। तब मामला स्पीकर और हाईकोर्ट में भी पहुंचा, लेकिन सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा किया और मामले में आज तक निर्णय नहीं हो सका।

दोनों ही मामलों में प्रमुख भूमिका में वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत थे, जिन्होंने इन दोनों दल बदल के कार्यों को अंजाम दिया था।