खाटू श्याम धाम में 21000 और 11000 की वसूली जजिया कर नहीं है?

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राजस्थान सरकार ने सीकर जिले में विश्वप्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर में भंडारा करने पर अनुमति के लिए 21000 रुपये की राशि लागू कर दी है। इसके साथ भंडारा करने के बाद सफाई के लिए भी अलग से 11000 रुपये वसूले जाएंगे। लोगों ने इसको जजिया कर कहा है।

सीकर जिला कलेक्टर की तरफ से आदेश जारी कर वसूली के लिए सख्ती से पेश होने को कहा गया है। एसडीएम को इस बाबत अधिकारी बनाया गया है इसके साथ ही खाटू श्याम जाने वाले यात्रियों के द्वारा यदि रास्ते में डीजे साउंड बजाया गया तो उन पर भी सख्त कार्रवाई होगी, उनका डीजे जब्त कर लिया जाएगा, जिसकी कार्रवाई अमल में लाई जानी शुरू हो गई है।

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इस तरह रशीद काटकर की जा रही है नई वसूली।

कलेक्टर के आदेश में कहा गया है कि पहले जहां भंडारे पर अनुमति फीस 2100 रुपये लगती थी, अब उसको बढ़ाकर 21000 रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही सफाई के नाम पर पहली बार 11000 रुपये वसूलने के आदेश जारी हुए।

सरकार के इस तुगलकी फरमान को लेकर खाटू श्याम के भक्तों में गहरा रोष है। कई संगठनों ने राज्य सरकार के समक्ष इस बात को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज करवाई है।

कांग्रेस पार्टी के स्थानीय विधायकों को भी लोगों ने चेतावनी जारी कर दिया है। गौरतलब है कि खाटू श्याम का मंदिर विश्व प्रसिद्ध है और यहां पर दर्शन करने के लिए हर वर्ष करोड़ों की संख्या में लोग आते हैं।

प्रतिदिन लाखों यात्रियों से खचाखच रहने वाले खाटू श्याम कस्बे में दर्जनों धर्मशालाएं हैं और वहां पर हर रोज भंडारी होते हैं। इसके साथ ही कई भंडारे मंदिर के दूर-दूर तक भी होते हैं।

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उल्लेखनीय है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी वाली अरविंद केजरीवाल सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में दिल्ली की मस्जिदों के मौलवियों को 19000 रुपये मासिक वेतन देने का फैसला किया था।

दूसरी तरफ राजस्थान की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत वाली सरकार ने जिस तरह से सीकर धाम में वसूली का आदेश दिया है, उसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसको जजिया कर के रूप में परिभाषित किया है।

गौरतलब है कि मुगल काल में भारत के हिंदू धर्म के मानने वालों से मुगल शासकों द्वारा हिंदू धर्म के होने की वजह से अलग से जजिया कर लगाया जाता था। इसी कारण खाटू श्याम मंदिर में वसूली बढ़ाए जाने को लेकर जजिया कर से तुलना की जा रही है।