अशोक गहलोत की लाचारी खुलकर आई सामने, बोले: कोई अधिकारी मेरी…

रामगोपाल जाट

राजस्थान के अशोक गहलोत सरकार को सवा साल पूरा हो गया है, लेकिन इसके बावजूद भी मुख्यमंत्री गहलोत अब तक सरकार के अधिकारियों पर अपना नियंत्रण स्थापित नहीं कर पा रहे हैं।

हालात यह है कि अशोक गहलोत खुद को पहली बार इतना लाचार महसूस कर रहे हैं, वो जनता के सामने खुलकर लाचारी जता रहे हैं।

अशोक गहलोत की लाचारी गुरुवार को विधानसभा में सामने आई, जब उन्होंने कहा कि उनको 1 साल से सबसे ज्यादा पीड़ा है तो वह है बजरी माफिया के द्वारा प्रदेश की जनता को लूटने की।

इसके अगले दिन, यानी शुक्रवार को मुख्यमंत्री गहलोत की लाचारी एक बार फिर से खुलकर सामने आई, जब वह राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ कार्यालय का उद्घाटन करने के दौरान उपस्थित छात्र छात्राओं को संबोधित कर रहे थे।

राजस्थान विश्वविद्यालय में ठीक एक साल बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक बार फिर से छात्रसंघ कार्यालय का उद्घाटन करने पहुंचे, जहां उनको, उनके द्वारा ही एक साल पहले किया गया वादा याद आया।

अपनी लाचारी जाहिर करते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान विश्वविद्यालय में बीसलपुर पाइप लाइन से पानी सप्लाई करने के लिए वो 1 साल पहले घोषणा करके गए थे, लेकिन उनकी कोई सुनता नहीं है।

उन्होंने कहा कि “इस बार जब मुझे छात्रसंघ कार्यालय उद्घाटन के लिए आमंत्रित करने गए, तब मुझे याद आया कि बीते साल बीसलपुर की पाइप लाइन से राजस्थान विश्वविद्यालय को पानी सप्लाई करने का वादा किया गया था।”

गहलोत ने आगे कहा, “जानकारी जुटाई तो सामने आया कि बीसलपुर लाइन से पानी सप्लाई करने की घोषणा के मामले में एक कदम आगे नहीं बढ़ा गया है, तब उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया और तुरंत प्रभाव से उसकी स्वीकृति जारी की गई, जिसके बाद वो यहां आए हैं।”

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उपस्थिति भीड़ के सामने अशोक गहलोत की इस तरह से लाचारी जाहिर करना कहीं ना कहीं राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों पर उनकी नकेल ढीली होने को इंगित करता है। जबकि पिछले दो कार्यकाल के दौरान अशोक गहलोत ने कर्मचारियों और अधिकारियों को जबरदस्त तरीके से नियंत्रित कर रखा था।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान विश्वविद्यालय में पिछले साल छात्रसंघ कार्यालय का उद्घाटन करने के लिए गए अशोक गहलोत द्वारा राजस्थान विश्वविद्यालय में 16 करोड रुपए की लागत वाली बीसलपुर की लाइन के द्वारा पानी दिए जाने का वादा किया गया था।

गौरतलब यह भी है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चाहे विधानसभा के भीतर बोल रहे हों या किसी सार्वजनिक मंच पर, जब तक उनके द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा और आरएसएस को नहीं कोसा जाता, तब तक उनका भाषण पूरा ही नहीं होता है।

बता दें उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर लगातार सवाल साल से शीत युद्ध झेल रहे अशोक गहलोत के लाचारी इस बार देखते ही बनती है।

सवाल यह उठता है कि जिस तरह से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत विधानसभा के भीतर और विधानसभा के बाहर अधिकारियों द्वारा समय पर कार्य नहीं करने की कई बार अपनी लाचारी जाहिर कर चुके हैं, तो फिर प्रदेश की आम जनता का कार्य कैसे होता होगा?