खेत पर ही जांच हो जाएगी मिट्टी की, कृषक को इतने में उपलब्ध होगी पोर्टेबल मशीन

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करीब 3 साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के खेत की मिट्टी जांच के लिए राजस्थान के सूरतगढ़ से जिस योजना को शुरू किया था, उसमें अब कई युवा आगे आ रहे हैं।

केंद्र सरकार ने योजना को लांच करते हुए कहा था कि जिस तरह से किसी भी व्यक्ति की सेहत को जांचने के बाद उसको दवा दी जाती है, ठीक उसी तरह से किसान के खेत की मिट्टी जांचने के बाद ही तय होता है कि उसमें कौन सी फसल सर्वाधिक लाभकारी हो सकती है और कितनी मात्रा में खाद- बीज की आवश्यकता होती है।

जिस तरह से भारत सदियों से कृषि प्रधान देश रहा है आज भी भारत में करीब 55% आबादी खेती किसानी से जुड़ी हुई है।

इसका योगदान भी भारत की जीडीपी में 15% के करीब है, किंतु संसाधनों की कमी और किसानों के पास सही जानकारी नहीं होने के कारण ज्यादा अच्छी पैदावार नहीं ले पाते हैं।

परिणाम यह निकलता है कि किसान बर्बाद हो जाते हैं और कई जगह उनके आत्महत्या की बात भी सामने आती है।

इसी समस्या के समाधान के लिए एक तरीका इजाद किया है जयपुर के ग्लोबल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बी टेक के स्टूडेंट भूपेंद्र जोशी और सुमिल बनर्जी ने।

दोनों स्टूडेंट में सोयल न्यूट्रीशन एनालिसिस यूजिंग आरएफ़ स्पेक्ट्रोस्कोपी मशीन बनाई है। इस मशीन का फायदा ही होगा की खेत की मिट्टी की जांच किसान के खेत पर ही कर दी जाएगी, उसके लिए किसी लेबोरेटरी में जाने की जरूरत नहीं होगी।

खेत की मिट्टी की न्यूट्रिशन वैल्यू बताने के साथ यह मशीन इस बात की भी जानकारी देगी की कौनसी फसल बेहद कम पानी में सर्वाधिक फायदा दे सकती है।

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इसके साथ ही इन दोनों स्टूडेंट्स ने छात्र विश्वकर्मा अवार्ड 2019 को भी अपने खाते में डाल लिया है। दोनों स्टूडेंट को लेंसर कैटेगरी में देशभर में दूसरा स्थान मिला है।

भूपेंद्र जोशी ने बताया कि इस मशीन की सबसे बड़ी बात यह है कि किसान इसे आसानी से खुद ऑपरेट कर सकता है।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इस मशीन की खास बात यह है कि जितनी सच्चाई लेबोरेटरी में टेस्टिंग के दौरान बताई जा सकती है, उतनी एक्यूरेट यह मशीन भी खेत पर ही बताएगी।

मशीन की कीमत ₹5000 रखी गई है, जो जल्द ही बाजार में उपलब्ध होगी। यह मशीन पोर्टेबल है और बैटरी से ऑपरेट होती है। पूरे गांव के लिए एक मशीन काफी है।