मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद परिवहन घोटाले के आरोपियों को बचाने में जुटे हुए हैं

-मंत्रियों के जवाब और सरकारी आंकड़ों से सरकार को कटारिया ने लपेटा

जयपुर

बजट सत्र में गुरुवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा रिप्लाई से पहले बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने सरकारी आंकड़ों और मंत्रियों द्वारा जवाब नहीं दिए जाने को लेकर सरकार को खूब खरी-खोटी सुनाई।

कटारिया ने वसुंधरा राजे की पिछली सरकार और वर्तमान सरकार के द्वारा बजट में अलॉट किए गए रुपयों को लेकर सारे तथ्यात्मक आंकड़े सामने रख दिए।

कटारिया ने कहा कि साल 2013 के दौरान जब पहली बार वसुंधरा राजे ने अपना बजट प्रस्तुत किया था, तब रेवेन्यू राशि 74000 करोड़ रुपए थी, लेकिन 2018 में जब आखिरी बजट पेश किया, तब यह राशि बढ़कर 137823 करोड रुपए की हो गई थी, जो लगभग 60% अधिक थी।

कटारिया ने कहा कि पिछले बजट के बजाय इस बार राज्य सरकार ने 2.8% का घटाया बताया है। कटारिया ने सभी विभागों में बजट कटौती के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि ग्रामीण विकास में भी 7.8% की कटौती की गई है।

कटारिया ने केंद्र सरकार के द्वारा मिलने वाले करों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार से साल 2018 में 45852 करोड पर मिली थी।

2019 में 44461 करोड और 2020 में 46886 करोड रुपए सरकार को मिले हैं। उन्होंने सहायता राशि की बात करते हुए कहा कि राजस्थान सरकार को 2018-19 में 20033 करोड़ पर मिले थे, जबकि 2019 में 26000 करोड और 2020 में अब 29893 करोड़ रुपए मिलेंगे।

उन्होंने कहा कि पहले 2013 में राज्य सरकार को केंद्र से 100 के मुकाबले 2.31 रुपये मिलते थे, जबकि अभी 100 में से 2.45 मिल रहे हैं।

यह भी पढ़ें :  अशोक गहलोत चौथी बार निराश, जयपुर लौटने की खबर

उन्होंने कहा कि इस राशि छोड़कर केंद्र सरकार से टैक्स के रूप में मिलने वाला पैसा भी करीब 8 लाख करोड रुपए में से राज्य सरकार को 51133 करोड रुपया मिलेगा।

विभिन्न विभागों में बजट की कटौती का दावा करते हुए कटारिया ने कहा कि सबसे ज्यादा कटौती कृषि विभाग में की गई है, जो करीब 24% से अधिक है।

कटारिया ने कहा कि पिछले साल राज्य सरकार ने बजट प्रस्तुत करते हुए 75000 नई वैकेंसी निकालने का दावा किया था लेकिन इस बार फिर से 53151 वैकेंसी निकालने की बात कही है, जबकि सहकारिता, चिकित्सा, पुलिस और स्वायत्त शासन विभाग में पुरानी भर्तियां हुई नहीं है और उनको दोबारा से गिना गया है।

कटारिया ने कहा कि 2018 में राज्य सरकार ने भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 1186 करोड़ रुपया दिया था, जबकि 2019 में राज्य सरकार ने 309 करोड दे दिया, उसमें से केवल 285 करोड रुपए ही अस्पतालों को दिया गया है।

कटारिया ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि निरोगी राजस्थान के लिए 100 करोड़ रुपए का जो फंड में रखा गया है, उसको केवल प्रचार प्रसार के लिए खर्च किया जाएगा, जबकि भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना को सरकार ने बदले की भावना से बंद कर दिया है, जिसके चलते राज्य के लोग भयंकर रूप से परेशान हैं।

कटारिया ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले साल बजट में दावा किया था कि प्रत्येक पंचायत में नंदी साला खोली जाएगी, लेकिन सरकार यह मानती है कि अब तक राज्य में एक भी नंदी साला नहीं खोली गई है।

यह भी पढ़ें :  राजदरबारी और रागदरबारी हैं कांग्रेस नेता...

उन्होंने कहा कि पिछले साल राज्य सरकार ने कृषक कल्याण फंड के रूप में 100 करोड रुपए की राशि रखने का दावा किया था, लेकिन सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 500 करोड़ पर लगा दिया और फसल बीमा योजना के तहत किसानों को 1 रुपया भी नहीं दिया गया है, यह राज्य के मंत्रियों ने एक प्रश्न के जवाब में भी बताया है।

रिफाइनरी पर बोलते हुए कटारिया ने कहा कि राज्य सरकार की 26% हिस्सेदारी वाली रिफाइनरी में 43 हजार करोड़ पर लगना है, लेकिन राज्य सरकार ने इस बार केवल 500 करोड़ पर अलॉट किए हैं, इससे लग रहा है कि राज्य सरकार अगले 15-20 साल तक रिफाइनरी बनाती रहेगी।

कटारिया ने हाल ही में परिवहन विभाग में हुए घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य के एंटी करप्शन ब्यूरो ने 300 लोगों के टेलीफोन टैप करके सारा खुलासा किया, लेकिन खुद मुख्यमंत्री इस मामले को दबाने में तुले हुए हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बड़ी मुश्किल से राज्य सरकार ने विधायकों के द्वारा खर्च किए जाने विकास के पैसे को बड़ी मुश्किल से अलॉट किया है, जिसको भी जिला परिषद के अधिकारियों के द्वारा समय पर रिलीज नहीं किया जाता है, इसके चलते विधायक बजट को खर्च नहीं कर पा रहे हैं।

उन्होंने फसल बीमा को लेकर भी सरकार पर तीखा हमला किया कहा कि राज्य सरकार खुद ही मानती है कि फसल बीमा के तहत इस वर्ष राज्य सरकार ने किसानों को 1 रुपये भी नहीं दिया है कि केंद्र सरकार की तरफ से 1400 करोड़ पर फसल बीमा के तौर पर दिए जा चुके हैं।

यह भी पढ़ें :  Sachin pilot को कमजोर करने के लिये हरीश चौधरी होंगे deputy CM!

राज्य सरकार पर हमला करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जिस राज्य को हमने बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर निकाला था, राज्य का यह बजट उसको वापस बीमारू राज्य की श्रेणी में ले जाएगा।