गुर्जर आरक्षण पर फिर संकट के बादल, आरक्षण के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका

– याचिका में कहा गया है कि राज्य में गुर्जरों से भी ज्यादा बैकवर्ड जातियां हैं, जिन्हें आरक्षण की ज्यादा जरूरत है

राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका के जरिए गुर्जरों व अन्य पांच जातियों को दिए गए आरक्षण को चुनौती देते हुए अदालत से यह प्रार्थना की गई है कि वह राज्य सरकार और राज्य के पिछड़ा वर्ग आयोग को आदेश दे कि वह सभी पिछड़ी जातियों को अपने सर्वे कर मोस्ट बैकवर्ड क्लास वर्ग में सम्मिलित करने वाले सभी जातियों का नए सिरे से विभाजन करें।

याचिका में यह भी गुहार लगाई गई है कि जब तक आयोग सभी जातियों का समय नहीं कर लेता तब तक एमबीसी वर्ग में दिए जाए आरक्षण पर रोक लगाई जाए। अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए आयोग राज्य सरकार को अपना जवाब जल्द पेश करने को कहा है और मामले की अगली तारीख 5 अप्रैल तय की गई है।

इस मामले में हुकुम सिंह कश्यप ने याचिका दायर की थी और उनकी ओर से उनके अधिवक्ता देवेंद्र कुमार चौहान पेश हुए थे।

पत्रकारों से बात करते हुए चौहान ने बताया कि 2012 में पूर्व न्यायाधीश आईएस रानी के अध्यक्षता में आयोग का गठन हुआ था, जिसने एक 84 जातियों के पिछड़े होने की अपनी रिपोर्ट पेश की थी।

उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार ने बिना कोई सर्वे करें गुर्जरों के साथ पांच जातियों को सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग अर्थात मोस्ट बैकवर्ड क्लास में डाल दिया था।

जबकि आईएस इसरानी की रिपोर्ट के अनुसार का काहार, जिसने माली, कीर, केवट, मेहरा, कश्यप, मांझी और मछुआरा जैसे वर्ग शामिल है और जो गुर्जर जाति से राजनीतिक तौर पर शिक्षा के आधार पर और सामाजिक तौर पर कहीं ज्यादा पिछड़े वर्ग हैं।

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उन्होंने बताया कि आईएस इसरानी की रिपोर्ट के अनुसार काहार जातियां गुर्जर जातियों से राजनीतिक व सामाजिक तौर पर कहीं ज्यादा पिछड़ी पाई गई है। उन्होंने आगे बताया कि काहार जातियां भूमिहीन है, इसलिए काहार जाति को एमबीसी वर्ग में पहले अधिकार मिलना चाहिए और स्पेशल बैकवर्ड क्लास लिस्ट में उनका नाम आना चाहिए था, परंतु उन्हें एमबीसी वर्ग में डाला ही नहीं गया है।