विधायक अशोक लाहोटी द्वारा अशोक गहलोत की शान में कसीदे गढ़ने पर भाजपा में तूफान, क्या होगी कार्यवाही?

सीएम अशोक गहलोत के चरण छूते भाजपा के सांगानेर से विधायक अशोक लाहोटी
सीएम अशोक गहलोत के चरण छूते भाजपा के सांगानेर से विधायक अशोक लाहोटी

जयपुर।
सांगानेर विधायक अशोक लाहोटी के द्वारा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की शान में कसीदे गढ़ने से भाजपा में तूफान खड़ा हो गया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अजमेर अगुवानी में जुटे प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां इस मामले पर अभी ज्यादा कुछ बोल नहीं रहे हैं, किंतु जिस तरह से हमेशा अपने बड़बोलेपन के कारण पार्टी में खुद को श्रेष्ठ बताते की प्रक्रिया अशोक लाहोटी अपनाते हैं, वह इस बार उनके लिए भारी पड़ती नजर आ रही है।

प्रदेश अध्यक्ष पूनियां ने कहा है कि पहले उनके वीडियो बयान की पड़ताल की जाएगी, उनसे पूछा जाएगा कि जब वो इस तरह से पार्टी लाइन के खिलाफ बयान दे रहे थे, तब उनके मन में क्या भाव चल रहे थे, उसके बाद ही आगे कोई कदम उठाने के बारे में सोचा जाएगा।

इधर, कांग्रेस पार्टी लाहोटी के इस बयान को अपने पाले में भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। संगठन महामंत्री महेश शर्मा ने कहा है कि जिस तरह से राज्य सरकार विकास के पथ पर आगे बढ़ रही है, यही कारण है कि विधायक ने मन की बात जुबां से बोली है।

इधर, सोशल मीडिया पर लाहोटी के बयान को भाजपा की भिद पिटने के तौर पर देखा जा रहा है। मजेदार बात यह है कि जब लाहोटी बयानबाजी कर रहे थे, तब मंच पर सांगानेर से विधायक का चुनाव लड़े चुके उनके प्रतिद्वंदी रहे कांग्रेस नेता पुष्पेंद्र भारद्वाज भी मौजूद थे।

सरकार को घेरने में नाकाम साबित हो रही भाजपा के लिए लाहोटी के बयान ने सकते में डाल दिया है। हालांकि, इस बात की अधिक संभावना नहीं है कि लाहोटी के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सकेगी, किंतु इस वक्त पूनियां का वह बयान भी याद रखने योग्य है कि वो अनुशासनहीनता बर्दास्त नहीं की जाएगी, भले ही नेता कितना भी बड़ा क्यों न हो।

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चर्चा है कि क्या वाकई में पूनियां का वो बयान केवल बयानी कार्यवाही करने के लिए था, अथवा किसी के खिलाफ तगड़ा एक्शन करके अपनी ताकत दिखाई जाएगी? पूनियां के अबतक भी अध्यक्ष के अनुकूल तीखे तेवर नहीं होने का ही परिणाम है कि लाहोटी जैसे पहली बार विधायक चुनकर आए नेता पार्टी लाइन से उपर बयानबाजी करने को स्वतंत्र नजर आ रहे हैं।

इससे पहले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश चंद मेघवाल के बयान पर भी कोई एक्शन नहीं होने के कारण कई नेताओं के पंख लगा रखे हैं। पार्टी में तीन—चार पूर्व मंत्री जिस तरह का व्यवहार कर रहे हैं, उससे साबित होता है कि उनके दिमाग से अभी तक भी मंत्री नहीं निकल पाया है।