गहलोत-पायलट की फूट फिर खुलकर आई सामने, प्रदेश अध्यक्ष की बनाई कमेटी की काट में दूसरे मंत्री पहुंचे नागौर

– प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने कमेटी बनाकर नागौर भेजी तो अलग से मंत्री और विधायक किसके निर्देश पर गए हैं?

राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच फूट एक बार फिर से खुलकर सामने आ गई नागौर के करणु गांव में दो दलित युवकों की अमानवीय तरीके से पिटाई के मामले में प्रदेश कांग्रेस की ओर से गठित 3 सदस्य कमेटी ने शुक्रवार को नागौर जिले का दौरा किया और पीड़ितों से मिलकर घटना के साक्ष्य जुटाए।

लेकिन इसी दौरान राज्य कांग्रेस में सत्ता और संगठन के बीच की खाई उस समय गहरी नजर आने लगी, जब राजस्व मंत्री हरीश चौधरी, विधायक गोविंद सिंह मेघवाल पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा और खींवसर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार रहे सवाईसिंह चौधरी भी जांच करने पहुंच गए।

प्रश्न यह उठता है कि हरीश चौधरी और गोविंद सिंह मेघवाल जब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य ही नहीं हैं तो फिर वह किसके कहने पर वहां गए थे? क्या यह नेता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट द्वारा गठित कमेटी पर अविश्वास करते हुए वहां गए थे?

उल्लेखनीय है कि जिले के करणु गांव में दो दलितों पर चोरी का आरोप लगाने के साथ ही एक सर्विस सेंटर पर उन्हें बांधकर पीटा गया था और उसके प्राइवेट पार्ट में पेचकस से पेट्रोल डालकर यातनाएं दी गई थी।

इस घटना का वीडियो चार दिन बाद वायरल होने पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट करके घटना को बताते हुए सरकार से कार्रवाई का आग्रह किया था। इसके बाद सरकार सक्रिय हुई थी और पुलिस के आला अधिकारियों ने मोर्चा संभालने के साथ ही साथ आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

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इस प्रकरण के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने प्रकरण की जांच के लिए प्रदेश कांग्रेस के संगठन महासचिव महेश शर्मा, समाज कल्याण मंत्री और प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मास्टर भंवरलाल मेघवाल विधायक, हरीश मीणा की कमेटी बनाकर भेजा था। इनके साथ ही नागौर प्रभारी जसवंत गुर्जर को भी जाने को कहा गया था।कमेटी के साथ जिला कांग्रेस अध्यक्ष जाकिर जैसावत और ब्लॉक अध्यक्ष भी मौजूद थे।

यहां कांग्रेस में ही सवाल उठ रहा है कि जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने इस प्रकरण के लिए कमेटी गठित कर दी थी और कमेटी में संगठन पदाधिकारियों के साथ ही मंत्री और विधायक को शामिल किया गया था तो फिर राजस्व मंत्री हरीश चौधरी और विधायक गोविंद मेघवाल अलग से वहां क्यों गए?

ज्योति मिर्धा नागौर की पूर्व सांसद हैं, ऐसे में उनके जाने पर सवाल नहीं उठता है, लेकिन मंत्री और विधायक का अलग से जाना कांग्रेस की समन्वय पर सवाल उठाता है। वह भी तब जबकि, खुद हरीश चौधरी कांग्रेस समन्वय समिति के सदस्य हैं।

सवाल यह भी उठता है कि अब हरीश चौधरी और गोविंद मेघवाल किसे रिपोर्ट देंगे? यह विदित है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से गठित कमेटी तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को रिपोर्ट देगी तो फिर हरीश चौधरी और गोविंद मेघवाल किसे रिपोर्ट देंगे?