भामाशाह और जन आधार कार्ड में क्या है अंतर? जानिए इस खबर के माध्यम से

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राजस्थान सरकार ने तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार के द्वारा शुरू किए गए भामाशाह कार्ड को बंद करने का फैसला कर लिया है। इस कार्ड की जगह जन आधार कार्ड बनाया जा रहा है इस कार्ड को 1 अप्रैल से प्रदेश भर में लागू कर दिया जाएगा। अभी एक करोड़ से अधिक लोगों ने जन आधार कार्ड बनवा लिया है।

राज्य सरकार के द्वारा दी जाने वाली सभी सब्सिडी और रियायतें अभी तक भामाशाह कार्ड के माध्यम से दी जाती थी। इसके साथ ही भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ भी इसी कारण से मिलता था, लेकिन भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना को राज्य सरकार ने लगभग बंद कर दिया है।

राज्य सरकार का दावा है कि भामाशाह कार्ड की जगह जन आधार कार्ड लागू किए जाने के बाद सभी सरकारी योजनाएं उससे जोड़ दी जाएगी। इस कार्ड में भी भामाशाह कार्ड की तरह मुखिया परिवार की महिला ही होगी।

मोटे तौर पर भामाशाह कार्ड और जन आधार कार्ड में कोई अंतर नहीं है, किंतु राजनीतिक तौर पर बड़े अंतर दिखाई देते हैं। राजनीतिक दल अपने-अपने फायदे के लिए स्कीमों का नाम अक्षर बदलते रहते हैं।

भामाशाह कार्ड में जहां तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की फोटो थी, वहीं नए जन आधार कार्ड में किसी भी व्यक्ति की फोटो नहीं होगी। यानी अगर प्रदेश में सरकार कांग्रेस की या भाजपा की या अन्य किसी दल की भी होगी तो उस कार्ड को सरकार इस बहाने बंद नहीं कर पाएगी।

उल्लेखनीय है कि भामाशाह कार्ड पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की फोटो होने के कारण कांग्रेस की सरकार को राजनीतिक तौर पर दिक्कतें होती हैं। सरकार के गठन से पहले चुनाव प्रचार के दौरान ही वर्तमान चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने कहा था कि जैसे ही उनकी सरकार बनेगी तो भामाशाह कार्ड को तोड़कर फेंक दिया जाएगा।

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माना जा रहा है कि भामाशाह कार्ड की जगह जन आधार कार्ड बनाने पर राज्य सरकार को करीब 100 करोड रुपए से अधिक आवे करना होगा। जबकि प्रत्येक कार्ड धारक से ₹25 की राशि ली जाएगी।