पशुपालक चाहेगा तो ही होगा बछड़ा, अन्यथा होगी बछड़ी, सरकार ने लागू की 10 करोड़ की नई स्कीम

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बदलते परिवेश के साथ राजस्थान समेत पूरे देश भर में पशुपालकों के लिए बैल एक अनुपयोगी जानवर बनता जा रहा है।

आधुनिकरण और मशीनी युग के कारण कोई भी किसान बैलों के द्वारा खेती करने के लिए उत्सुक दिखाई नहीं दे रहा है।

यही कारण है कि अब ग्रामीण क्षेत्र में भी धीरे-धीरे बैल की उपयोगिता खत्म होती जा रही है, किंतु इसके साथ ही गायों के बछड़ों की समस्या किसानों के लिए सिरदर्द हो गई है।

प्राकृतिक तौर पर किसी भी गाय के बछड़ा या बछड़ी होना पशुपालक के हाथ में नहीं होता है। ऐसी स्थिति में जब बछड़े होते हैं तो पशुपालक उसको खुला छोड़ देते हैं।

स्थिति यह हो जाती है कि यह खुले बछड़े झुंड में किसानों की फसलों को बर्बाद करते हैं। इसके समाधान को लेकर बीते लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं और सरकारों के द्वारा दावे भी किए जा रहे हैं।

किंतु अब राजस्थान की सरकार ने इसके समाधान की तरफ कदम बढ़ा दिया है। राज्य सरकार ने तय किया है कि ऐसी स्कीम को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे “शॉर्टेड सीमान” प्राप्त किया जा सके और इसके द्वारा बछड़ों के बछड़ी की संख्या बढ़ाने पर काम किया जा सके।

सरकार ने अपने बजट भाषण में घोषणा की है कि “सेक्सड सीमन स्कीम” को लागू किया जाएगा। यह स्कीम पिछली सरकार के द्वारा शुरू किए जाने के लिए प्रयास किए गए थे, लेकिन अमलीजामा नहीं पहनाया गया था।

सरकार ने इस योजना के लिए 10 करोड रुपए सालाना का बजट भी रखा है। इस बजट से कृत्रिम गर्भधारण के केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

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हालांकि, करीब 4 साल पहले ही तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार के द्वारा यह योजना शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया था, किंतु इस को आगे नहीं बढ़ाया गया।

परिणाम यह हुआ कि बीते चार-पांच साल के दौरान प्रदेश में बछड़ों की संख्या में वृद्धि हुई है और नियंत्रण नहीं कर पाने के कारण किसानों के लिए यह बछड़े सिरदर्द बनते जा रहे हैं।