नीट पीजी परीक्षा 2020 को पुनः आयोजित किया जाएगा?

– हाई कोर्ट में पेश रिपोर्ट में साफ हो गया है कि आर्य कॉलेज में परीक्षा के दौरान भारी अनियमितताएं पाई गई थी

नीत पीजी परीक्षा के एक परीक्षा केंद्र में छात्रों के द्वारा परीक्षा के दौरान कई तकनीकी खराबी और गंभीर अनियमितताओं का सामना करने के कारण neet-pg परीक्षा 2020 को रद्द कर फिर से आयोजित कराए जाने के संदर्भ में दायर याचिका पर आज अदालत में सुनवाई हुई सुनवाई के दौरान परीक्षा आयोजित कराने वाले बोर्ड नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन ने परीक्षा में माना कि परीक्षा के दौरान परीक्षा पर नजर रखने के लिए तैनात किए गए ऑब्जर्वर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि परीक्षा के दौरान कई उम्मीदवारों की तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिससे कई लोग परीक्षा समय पर खत्म नहीं कर पाए।

एनबीसी के संयुक्त निदेशक ने अदालत को पत्र लिखकर कहा कि तकनीकी परेशानियों के अलावा परीक्षा के दौरान कॉलेज में स्थिति और भी काम नहीं कर रहे थे और एयरटेल का मोबाइल नेटवर्क काम कर रहा था, जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि कई उम्मीदवार अपने मोबाइल फोन पर इंटरनेट का उपयोग भी कर सकते थे।

एनबीसी के संयुक्त निदेशक विनय गुप्ता ने अदालत में पेश किए गए एक पत्र के मार्फत अदालत को कहा कि वह कूकस आर्या कॉलेज की आयोजित परीक्षा की पूरी जांच करेंगे और भविष्य में इस कॉलेज में नीट परीक्षा युद्ध नहीं करवाएंगे।

इस मामले में याचिकाकर्ता जहान्वी विजय ने याचिका दायर करने की प्रार्थना की है। जहान्वी कंप्यूटर खराबी के कारण परीक्षा नहीं दे पाई थी और बाद में उसे सिर्फ 11 मिनट का अतिरिक्त समय दिया गया था। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेंद्र पेश हुए थे।उनको कहा कि यह मामला अदालत में गया था, तब रिपोर्ट के अस्तित्व से इनकार कर दिया था, अदालत ने चारों की रिपोर्ट पेश की।

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गौरतलब है कि परीक्षा के दौरान गाइडलाइन के अनुसार मौजूद होना अनिवार्य है। एक अन्य ऑब्जर्वर ने रिपोर्ट में लिखा था की परीक्षा के 1 दिन पहले आर्या कॉलेज में जेमर काम कर रहे थे और किसी भी मोबाइल नेटवर्क का सिग्नल नहीं आ रहा था, परंतु परीक्षा के दिन एयरटेल का सिग्नल कॉलेज में काम कर रहा था।

डॉक्टर धीरज की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उम्मीदवारों के कंप्यूटर सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी पाई गई, जिस वजह से वह समय पर परीक्षा नहीं दे पाए। अधिवक्ता राजेंद्र सोनी ने आगे कहा कि दूसरे ऑब्जर्वर डॉ दिलीप राज ने अपनी रिपोर्ट में आगे कहा है कि एयरटेल 4G का नेटवर्क कॉलेज में काम कर रहा था और परीक्षा के समय भी चल रहा था। साथ ही बहुत से उम्मीदवारों का कंप्यूटर सही से काम नहीं कर रहा था।

राजेंद्र सोनी ने कहा कि नेट परीक्षा पीजी बहुत ही महत्वपूर्ण परीक्षा होती है, एमएस तथा एमडी के लिए उम्मीदवारों का चयन होता है। उन्होंने कहा कि अगर कॉलेज में परीक्षा के समय कुछ ही उम्मीदवारों को तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ा तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि शायद कुछ उम्मीदवारों को मदद के लिए ऐसा किया जा रहा था, क्योंकि 1 दिन पहले ही जांच के दौरान जेमर काम कर रहे थे।

उन्होंने आगे कहा कि एनबीसी ने पहले कहा कि जरूर रिपोर्ट है ही नहीं, पर बाद में चार में से दो की रिपोर्ट पेश कर दी। कैसे ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि जो रिपोर्ट पेश नहीं की गई, उनमें से भी ज्यादा गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।

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राजेंद्र सोनी ने बताया कि आर्य कॉलेज में लगभग 850 उम्मीदवार डॉक्टर नेट परीक्षा देने के लिए आए थे, मगर इनमें से कई परीक्षा पूरी नहीं कर पाए, पर कई उम्मीदवार कि गैरकानूनी तरीके से सहायता की गई थी तो इससे पूर्व परीक्षा के परिणाम पर असर पड़ सकता है।

सुनवाई के दौरान के दौरान अदालत को बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव ने एनबीसी के मुख्य निदेशक को पत्र लिखकर कहा है कि वह इस मामले की जांच करें।

अदालत ने एनबीसी के निदेशक द्वारा परीक्षा में हुई अनियमितताओं को स्वीकार करते हुए दायर पत्र को रिकॉर्ड पर लिखा और अब परीक्षा को पुनः आयोजित कराए जाने के संदर्भ में 27 फरवरी को बहस होगी।