घोर निराशाजनक बजट, गहलोत सरकार मायोपिया और हाइपरमेट्रोपिया की शिकार- राजेन्द्र राठौड़

Rajasthan Assembly
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जयपुर, 20 फरवरी।

विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा है कि आज के बजट भाषण को सुनकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर तुलसीदास जी की यह चौपाई बिलकुल सटीक बैठती है- “पर उपदेश कुशल बहुतेरे । जे आचरहिं ते नर न घनेरे ।।“

उन्होंने कहा कि गहलोत पूरे बजट भाषण के दौरान केन्द्र सरकार को कोसते नजर आए, क्योंकि उनके पास स्वयं की सरकार की उपलब्धियों के नाम पर बताने के लिए कुछ था ही नहीं।

विजन के मामले में गहलोत सरकार मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) और हाइपरमेट्रोपिया (दूर दृष्टिदोष) दोनों की शिकार है, जिस कारण पूरा प्रदेश विकास के शिखर से बदहाली के रसातल में पहुंच गया है।

राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि वित्त मंत्री के तौर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शब्दों की बाजीगरी करने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ी।

सात संकल्पों की बात तो की, पर उन्हें पूरा कैसे करेंगे, इसका कोई रोडमैप नहीं रखा। बजट में बहुत सारी घोषणाएं ऐसी हैं, जो पिछली भाजपा सरकार के समय की हैं, उन्हें भी नया बताकर इस बजट में शामिल किया गया है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी, एएनएम के बीच समन्वय और कन्वर्जेन्स का प्रयोग गत भाजपा सरकार के

समय ही शुरू किया गया था, जिसे वर्तमान सरकार अपनी पहल बताकर पेश कर रही है। इससे अधिक हैरत की बात क्या होगी कि राज्य कर्मचारियों के लिए साल में दो बार बढ़ने वाले डीए को भी बजट घोषणा के तौर पर शामिल किया गया है।

उपनेता प्रतिपक्ष ने हैरानी जताई कि राज्य सरकार ने बजट में युवाओं को रोजगार देने और कौशल विकास के लिए कुछ भी ठोस कदम नहीं उठाया है।

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यही नहीं, अपने घोषणा पत्र में संविदा कार्मिकों को नियमित करने का वादा करने वाली सरकार अब स्वयं भी संविदा पर भर्तियां शुरू कर रही है।

उपनेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता को और सदन को आधी-अधूरी जानकारी देकर भ्रमित करने का काम किया है।

उन्होंने यह बात क्यों नहीं बताई की 15वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अनुशंषा से राजस्थान को फायदा हुआ है।

14वें वित्त आयोग तक डिविजिबल पूल में राजस्थान का जो हिस्सा 5.5 प्रतिशत था, वह अब बढ़कर 5.98 प्रतिशत हो गया है।

मतलब यह हुआ कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में केन्द्रीय करों के डिविजिबल पूल से राजस्थान को 51,131 करोड़ रुपए मिलेंगे।

उन्होंने कहा कि सड़क, शिक्षा, रोजगार, कानून-व्यवस्था सभी मोर्चों पर गहलोत सरकार फेल साबित हुई है और बजट भाषण में वे अपनी हर नाकामी का ठीकरा केन्द्र सरकार और गत भाजपा सरकार पर मढ़ती नजर आए।

इन निराशाजनक बजट को लेकर हद तो तब हो गई जब मुख्यमंत्री को खुद यह कहना पड़ा- अरे भाई, ताली तो बजा दो।