– चार में से एक पूर्व जिला प्रमुख, पूर्व जिला प्रमुख के प्रति तो एक आरपीएसी के पूर्व सदस्य के भाई को नियुक्ति मिली

राजस्थान में राजनीतिक नियुक्तियों के मामले में शायद पार्टी के आम कार्यकर्ताओं से ज्यादा तवज्जो उन लोगों को मिलने वाली है, जो या तो बड़े नेताओं तक पकड़ रखते हैं या खुद रसूखात वाले हैं।

राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में हुई साथ नियुक्तियों को देखने के बाद कांग्रेस (Congress) कार्यकर्ताओं में निराशा नजर आ रही है। आयोग में 7 में से 3 सदस्यों का चयन न्यायिक 1 वर्ग से, 2 का राजनीतिक क्षेत्र से हुआ है।

अब कांग्रेस (Congress) कार्यकर्ता चार राजनीतिक नियुक्तियों से 3 पर एतराज जताते नजर आ रहे हैं। इसका कारण यह है कि इन नियुक्तियों में आम कांग्रेस (Congress)ी कार्यकर्ताओं के स्थान पर रसूख वालों को मौका दिया गया है।

आयोग में जिन चार लोगों को राजनीतिक नियुक्तियों के नाम पर दिया गया है, उनमें से बांसवाड़ा से शैलेंद्र भट्ट ऐसा नाम है। जिसकी पृष्ठभूमि कांग्रेस (Congress) है और वे एनएसयूआई से लेकर युवा कांग्रेस (Congress) के जिला अध्यक्ष रहे हैं।

इसके अलावा बाकी तीन नामों को लेकर कांग्रेस (Congress)जनों में नाराजगी स्पष्ट है। इसका कारण यह है कि 3 सदस्यों में से एक शोभा डूडी हनुमानगढ़ के जिला प्रमुख रही हैं और उनके पति न्यायिक सेवा में रहे हैं।

कांग्रेस (Congress)जनों का कहना है कि इन्हें पार्टी के जिला प्रमुख के रूप में मौका दे दिया गया था तो राजनीतिक नियुक्ति में ही इन्हें फिर मौका लेकर कार्यकर्ताओं का हक मारने का काम किया गया है। एक अन्य नाम रामफूल गुर्जर का है, जिन्हें आयोग में सदस्य बनाया गया है।

रामपुर गुर्जर टोंक की पूर्व जिला प्रमुख सरोज गुर्जर के पति और पूर्व राज्यपाल गोविंद सिंह गुर्जर के जमाई हैं। यह सरकारी सेवा में भी रहे हैं।

इनकी पत्नी सरोज गुर्जर एक बार 1998 में कांग्रेस (Congress) के टिकट पर टोडारायसिंह विधानसभा से चुनाव लड़ चुकी थीं, लेकिन तब उनकी जमानत जब्त हो गई थी। इस बार यह भी मालपुरा से टिकट पर दावा जता रहे थे।

राजनीतिक नियुक्तियों में एक नाम संजय टांक का है जो जोधपुर के रहने वाले हैं, भले ही कांग्रेस (Congress) में बहुत ज्यादा सक्रिय ना हो, लेकिन इनके पारिवारिक रिश्ते कांग्रेस (Congress) की राजनीति में प्रगाढ़ बताया जाता है। यही कारण है कि इन्हें भी आयोग में पूर्णकालिक सदस्य बनने का मौका मिला है।

बताया जा रहा है कि इनमें पहले इनके भाई को आरपीएससी में सदस्य के रूप में मौका दिया गया था। नामों के सामने आने के बाद अधिकांश कांग्रेस (Congress)जनों की प्रतिक्रिया यही है कि जिला प्रमुख, पूर्व जिला प्रमुख और विधायक का चुनाव लड़ चुके परिजनों या फिर पार्टी के ज्यादा काम नहीं करने वालों को जब राजनीतिक नियुक्तियों में मौका दिया जा रहा है तो फिर कार्यकर्ताओं को मौका कब और कैसे मिलेगा।

इससे पहले भी कुलपतियों की नियुक्तियों सहित जेल कमेटियों तथा अन्य राजनीतिक नियुक्तियों में आम कार्यकर्ताओं के स्थान पर बड़े नेताओं की नज़दीकियों, विधायकों या उनके नजदीकियों को ही मौका देने की शिकायत कांग्रेस (Congress) में उठ चुकी है।