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– अधिवक्ता विमल चौधरी ने कहा कि वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) ने न तो यह बंगला आवंटन के लिए सहमति दी और न ही राज्य सरकार ने उन्हें बंगला आवंटित किए जाने पर कोई आदेश ही पारित किए हैं।

राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सुविधाएं देने के खिलाफ दायर मामले में राजस्थान हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने लिखित जवाब प्रस्तुत किया है।

जिस पर याचिकाकर्ता मिलापचंद डांडिया की ओर से कहा गया कि क्योंकि सरकार ने आज ही जवाब दिया है, इसलिए बस जवाब को पढ़कर एवं समझ कर ही अपना उत्तर पेश करेंगे। इसके साथ ही अदालत ने इस आदेश की अगली तारीख 20 अप्रैल तय की है।

गत सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पेश हुए थे। राज्य सरकार की ओर से जवाब में अदालत को बताया कि 19 फरवरी 2020 को पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया को उन्हें आवंटित बंगला खाली करने के लिए पत्र जारी किया था।

जवाब में आगे बताया गया कि जगन्नाथ पहाड़िया ने 21 जनवरी 2020 को ही पत्थर की अनुपालना हेतु हॉस्पिटल रोड बंगला नंबर 5 खाली कर दिया था। जवाब में आगे बताया गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) सिविल लाइंस पर उन्हें आवंटित बंगले में विधायक होने की हैसियत से काबिज हैं।

राज्य की ओर से बताया गया कि पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया और वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) दोनों ने ही राज्य सरकार द्वारा प्रदान की गई जा रही सुविधाएं, जिनमें सरकारी गाड़ी, ड्राइवर तथा अन्य सुविधाएं भी वापस लौटा दी हैं।

सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे वकील विमल चौधरी ने पत्रकारों को कहा कि राज्य सरकार द्वारा दिए गए जवाब से साफ होता है कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया को बंगला खाली करने के नोटिस दिए थे, परंतु वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) को नहीं। राज्य सरकार ने दोनों के बीच भेदभाव क्यों किया है?

उन्होंने आगे कहा कि उनको आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार बंगला नंबर 13 जो कि 2008 में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) को आवंटित किया गया था, फिर 2013 से 2018 तक वह उस घर में रहीं, जबकि उन्हें मुख्यमंत्री होने के तौर पर दूसरा घर आवंटित था।

चौधरी ने कहा कि 13 दिसंबर 2018 को राज्य सरकार ने फिर से बंगला नंबर 13 वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) को पूर्ण होने की हैसियत से आवंटित कर दिया, परंतु हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेशों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला आवंटित किए जाने के लिए संविधान में न तो कोई प्रावधान है, न ही कोई अनुच्छेद।

उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार ने अपने जवाब में इस तथ्य को छुपाया है कि उसने वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) से एक विधायक होने की हैसियत से न तो कभी कोई बंगला आवंटित किए जाने के लिए अर्जी प्राप्त की और न ही राज्य सरकार ने बंगला आवंटित किए जाने के आदेश दिए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि बंगला नंबर 13 के विषय में आरटीआई से प्राप्त करने के बाद भी यह जानकारी सामने आई है। अधिवक्ता विमल चौधरी का कहना है कि जब तक राज्य सरकार नियम अनुसार वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) को बंगला नंबर 13 विधायक होने की हैसियत से नहीं करती हैं, तब तक राज्य सरकार अदालती आदेश की अवहेलना करती रहेगी।

उन्होंने कहा कि वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) को किस नीति के तहत मकान आवंटित किया गया था, यह राज्य सरकार को जवाब से स्पष्ट नहीं होता है? उन्होंने आगे बताया कि राज्य सरकार का यह तर्क है, क्योंकि वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) वर्तमान में विधायक हैं।

इसलिए वह उसी बंगले पर काबिज होने के हकदार हैं, तो पिछले सरकार के हर मंत्री को अपने पुराने बंगले पर विजय होने की हैसियत से काबिज होने का अधिकार प्राप्त होना चाहिए और राज्य सरकार को पिछली सरकार के सभी मंत्रियों को उनके पुराने बंगले में भेजा जाना चाहिए।