हनुमान बेनीवाल राजस्थान में अरविंद केजरीवाल के साथ गठबंधन कर ऐसे बना सकते हैं 2023 में सरकार—

जयपुर।

दिल्ली में लगातारी तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी की तरह देश का प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे अरविंद केजरीवाल और नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल के बीच गठबंधन होकर 2023 में भाजपा—कांग्रेस से इतर सरकार बनाए जाने की चर्चा शुरु हो गई है।

जिस दिन आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की, उसी दिन हनुमान बेनीवाल ने केजरीवाल को बधाई दी थी। तब यह चर्चा शुरु हुई, और इस चर्चा को तब हवा लगी, तब रालोपा के कई नेताओं ने इसके संकेत दिए।

कहा जा रहा है कि रालोपा को अगर 2023 में सत्ता के दरवाजे तक पहुंचना है, तो उसे भाजपा—कांग्रेस से इतर सोचना होगा। शायद यही कारण है कि रालोपा और आप का गठबंधन होने की चर्चा ने जन्म भी ले लिया है।

इधर, हमेशा की भांति हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान में एक बार फिर से हूंकार भरने की बात कहकर भाजपा से अलग रास्ते पर जाने के संकेत दे दिए हैं, हालांकि उन्होंने साफ किया है कि केंद्र में मोदी सरकार का हिस्सा रहेंगे।

रालोपा अगर आप के साथ गठबंधन करती है, तो पहली बार राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस के अलावा तीसरे दलों की गठबंधन कर सरकार बनने का सपना पाला जा सकता है। इस स्थिति को अंगीकार करने से पहले कुछ बातों पर विचार करना रालोपा और आप के लिए आवश्यक हो जाता है।

जैसे— अगर इन दोनों में गठबंधन होता है तो बेनीवाल की जुझारु छवि और केजरीवाल की विकास करने की छवि साथ हो जाएगी। इसका लाभ सीधे तौर पर गठबंधन को मिल सकता है।

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पश्चिमी राजस्थान में तो बेनीवाल का खास दखल है, किंतु बाकी राज्य में उनको संघर्ष करके पैर जमाने हैं। ऐसे में केजरीवाल का साथ मिलने पर पूरे राज्य में पैर पसारे जा सकते हैं। 1993 से लेकर आज तक, एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस की सरकारों से जनता परेशान हो चुकी है।

1998 के बाद इन 21 बरसों में गहलोत और वसुंधरा के अलावा किसी को देखा ही नहीं। ऐसे में जनता के सामने विकल्प आ सकता है, जो सफल भी हो सकता है, क्योंकि विकल्प के बिना जनता कांग्रेस या भाजपा को ही चुनती है।

इसके साथ ही राज्य की राजनीति में एक नया दल जुड़कर जब नये नवेले रालोपा के साथ चुनाव लड़ेगा तो किसानों और बेरोजगारों के साथ ही गरीबों में भी विश्वास पनपेगा।