नई दिल्ली/जयपुर।

दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election) में रहे बेहद खराब प्रदर्शन तथा इसके परिणाम स्वरूप नेताओं द्वारा एक-दूसरे पर निशाना साधने की शुरुआत होने के बाद कांग्रेस (Congress) नेतृत्व ने निर्णय लिया है कि 3 अप्रैल को संसद का बजट (Budget) सत्र (Budget Session) समाप्त होने के बाद अप्रैल के पहले पखवाड़े में पार्टी का महाधिवेशन बुलाया जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि इस आयोजन के संभावित स्थान के रूप में नेतृत्व का ध्यान राजस्थान पर केंद्रित है, लेकिन क्योंकि महाधिवेशन के लिए विशाल लॉजिस्टिक सपोर्ट की जरूरत होगी, इसलिए पार्टी इस बात पर विचार करेगी कि इस आयोजन के लिए जयपुर सुविधाजनक रहेगा या जोधपुर या फिर उदयपुर?

स्थान के बारे में अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है पार्टी के समक्ष मुख्य प्रश्न यह है कि क्या यह अधिवेशन पार्टी अध्यक्ष पद पर सोनिया गांधी को ही बनाए रखने या अध्यक्ष पद पर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) आ जाएंगे या फिर इस पद पर इस परिवार के बाहर का व्यक्ति आएगा।

जैसी इच्छा राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने उस समय व्यक्त की थी, जब नरेंद्र मोदी के हाथों 2019 के लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद, उन्होंने पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ दिया था।

एक अन्य प्रश्न यह है कि क्या कांग्रेस (Congress) कार्य समिति के चुनाव कराए जाएंगे? क्योंकि इन चुनावों का अर्थ होगा एआईसीसी द्वारा पार्टी के अन्य संगठनों में बड़े पैमाने पर परिवर्तन राहुल गांधी (Rahul Gandhi) कांग्रेस (Congress) कार्य समिति के चुनाव कराने के पक्षधर रहे हैं।

लेकिन सोनिया गांधी ने कांग्रेस (Congress) अध्यक्ष बनने के बाद सीडब्ल्यूसी के चुनाव कराने कराए जाने पर पूर्णविराम इसलिए लगा दिया था, क्योंकि इससे पार्टी के अंदर कटुता तथा अंत अकेले पैदा हो जाएगी।

पार्टी के कई हलकों में यह महसूस किया जा रहा है कि कांग्रेस (Congress) को पुनः खड़ा करने का एक ही तरीका है कि ब्लॉक स्तर पर वास्तविक रूप से चुनाव कराए जाएं, ताकि प्रतिभा को खोज कर निकाला जा सके और पार्टी के पदाधिकारियों को शामिल करते हुए पार्टी को पर गठित किया जा सके जो कि वर्तमान में लड़खड़ा रही है और तेजी से रसातल में जा रही है।

पार्टी नेतृत्व अधिवेशन के मुद्दे को आगे बढ़ाकर नेताओं कार्यकर्ताओं तथा पार्टी पदाधिकारियों को व्यस्त रखना पसंद करेगा, ताकि आलोचना पर लगाए लगाम लगाई जा सके, जो कि वास्तविक है। क्योंकि पार्टी की करारी पराजय हुई है और वह पिछले 1 वर्ष में एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं हुई है।

शीला दीक्षित जो अब जीवित नहीं है, की पीसी चाको द्वारा आलोचना ने पार्टी के एक बड़े वर्ग को झटका दिया और इस मुद्दे पर शीर्ष नेतृत्व की आलोचना की गई और कहा गया कि पिछले 10 वर्षों से उन्हें दिल्ली का प्रभारी महासचिव क्यों बना रखा है?

यह भी उम्मीद है कि अधिवेशन आयोजन से पार्टी के लोगों की अपनी चिंता व्यक्त करने का अवसर प्राप्त होगा और उनकी भड़ास निकलेगी, परंतु इसमें समस्या यह है कि इस पर नियंत्रण भी नेतृत्व की दृढ़ रहने वाले नेता ही करेंगे।

फिलहाल कांग्रेस (Congress) के नेतृत्व के अलावा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि एक बार फिर से राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पार्टी का नेतृत्व करके एक नई दिशा देंगे, जबकि कुछ नेताओं का मानना है कि महासचिव प्रियंका वाड्रा को पार्टी की कमान सौंप देनी चाहिए।