केरल और पंजाब सरकार के बाद राजस्थान की गहलोत सरकार ने भी दिखाया मोदी सरकार को ठेंगा

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नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ संकल्प पारित कर केरल और पंजाब सरकार के बाद राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने भी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को ठेंगा दिखा दिया है।

कांग्रेश की अशोक गहलोत वाली राजस्थान सरकार ने शनिवार को राज्य विधानसभा में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ संकल्प पत्र पारित कर केंद्र सरकार को भेज दिया है।

सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच दिनभर चली जोरदार बहस और नोकझोंक के बाद शाम को करीब 4:00 बजे राजस्थान विधानसभा में अशोक गहलोत सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ संकल्प पारित करवाने में सफलता हासिल कर ली।

हालांकि, संकल्प पत्र पारित होने से पहले भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया की अगुवाई में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ समेत कई भाजपा नेताओं ने इस कड़े शब्दों में प्रतिरोध किया और इसको संविधान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के तौर पर संज्ञान में लेने को कहा।

सत्ता पक्ष के कई मंत्रियों और विधायकों ने नागरिकता संशोधन कानून को भारत की पंथनिरपेक्षता के खिलाफ करार दिया और कहा कि यह पूरी तरह से असंवैधानिक है और केंद्र की मोदी सरकार इस देश को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए कृतसंकल्प दिखाई दे रही है।

राजस्थान विधानसभा से पहले केरल की सरकार और पंजाब की सरकार ने भी अपनी-अपनी विधानसभाओं में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ संकल्प पारित कर केंद्र सरकार को भेज दिया है।

संविधान विशेषज्ञों के मुताबिक नागरिकता देना या नागरिकता नहीं देना यह संघ का विषय है, यानी कि केंद्र सरकार के हाथ में होता है। इसलिए इस तरह के संकल्प पारित करना केवल राजनीतिक लाभ के लिए उठाए जा रहे कदम हैं, इससे इस कानून पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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