भाजपा के लिए गले की हड्डी बने कैलाशचंद मेघवाल, अनुशासनहीनता पर कोई कुछ नहीं कर सकता?

भाजपा के सभी सदस्य वॉकआउट कर गए, लेकिन इस तरह से अकेले सदन में बैठे रहे कैलाशचंद मेघवाल।
भाजपा के सभी सदस्य वॉकआउट कर गए, लेकिन इस तरह से अकेले सदन में बैठे रहे कैलाशचंद मेघवाल।

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भाजपा के लिए विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और शाहपुरा से पार्टी के विधायक कैलाशचंद मेघवाल गले की हड्डी बन गए हैं। पार्टी न तो मेघवाल पर कार्यवाही कर पा रही है और न ही नोटिस देने या नहीं देने पर फैसला कर पा रही है। इसके कारण मेघवाल ने शनिवार को एक बार फिर पार्टी के खिलाफ खड़े होने की हिम्म्त दिखाई।

मेघवाल पर पार्टी के द्वारा व्हीप जारी करने के बाद उसका उल्लंघन करने का आरोप है। शुक्रवार को जब पूरी भाजपा ने शॉर्ट नोटिस पर विधानसभा सत्र बुलाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए वॉकआउट किया था, तब मेघवाल पार्टी के अन्य विधायकों के साथ सदन से बाहर नहीं गए।

इसके बाद नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने उनको 3—4 बार पर्ची भेजकर बाहर आने को कहा, तब वो ना पक्ष लॉबी में पहुंचे। वहां पर मेघवाल और कटारिया व मेघवाल और भाजपाध्यक्ष सतीश पूनियां के ​साथ बहस हुई। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राज ने मेघवाल का साथ दिया और पूनियां और राजे के बीच बहस हो गई।

मेघवाल के इस कृत्य से भाजपा की जोरदार किरकिरी हुई और पार्टी की अंदरुनी कलह खुलकर सामने आ गई। इस मामले में व्हीप का उल्लंघन होने के बाद भी पार्टी मेघवाल के खिलाफ कोई एक्शन लेने से कतरा रही है।

इस मामले में भाजपाध्यक्ष सतीश पूनियां का कहना है कि यह मामला नेता प्रतिपक्ष के क्षेत्राधिकार का है, इसलिए जो भी फैसला करना है, उनको ही करना है। इधर, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा है कि इस मामले में अभी नोटिस देने का कोई फैसला नहीं किया गया है।

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नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया का कहना है कि कैलाशचंद मेघवाल के खिलाफ अभी किसी तरह का एक्शन लेने का निर्णय नहीं हुआ है, इसपर निर्णय विधायक दल की बैठक में लिया जाएगा। उनका कहना है कि अभी नोटिस नहीं दिया गया है।

इधर, कांग्रेस पार्टी भाजपा की फूट का जमकर लुफ्त् ले रही है। कांग्रेस नेताओं ने इसको लेकर शनिवार को भाजपा पर खूब तंज कसे। कांग्रेस की चाहत के अनुसार भाजपा विधानसभा में दो फाड़ हो गई है, जो एक तरह से सत्तारुढ़ दल की बड़ी जीत है।