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नागरिकता संशोधन कानून को लेकर राजस्थान की विधानसभा में शनिवार को बहस चल रही है। इस दौरान इस कानून का समर्थन करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया सरकार के ऊपर जबरदस्त हमलावर रहे।

उन्होंने इतिहास की बहुत सारी बातों को याद करते हुए कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) से लेकर देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक में भी नागरिकता देने के लिए नरमपंथी रखते हुए पाकिस्तान (Pakistan) और बांग्लादेश से आने वाले अल्पसंख्यक प्रत्याशियों को नागरिकता देने की वकालत की है।

डॉ. पूनियां ने कहा कि कांग्रेस (Congress) सरकार पर बेशर्म होने लानत है, अपनी बातों से पलटने वाले लोग हैं। उन्होंने उग्र होकर कहा कि “इस कानून को यह सरकार क्या इसके फूफा को भी लागू करना पड़ेगा।”

इससे पहले अपनी बात शुरू करते हुए डॉ. पूनियां ने कहा कि मुझे लगता है मुझसे आप ज्यादा ज्ञानी हैं।
एक समय ऐसा था, जब भारत विश्व गुरु था। किन्तु मुगलों और अंग्रेजों का काला शासन रहा और देश को बुरी तरह से तहस नहस करने का काम किया गया।

उन्होंने कहा कि 14 अगस्त 1947 की काली रात आई, जब पाकिस्तान (Pakistan) से ट्रेनों लाशें काटकर आती थीं। सबको पता है कि धर्म के आधार पर दोनों देशों के प्रधानमंत्री बने, जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान (Pakistan) के लियाकत अली जिन्नाह की लालसा के कारण भारत बंटवारा हुआ।

इसके बाद 1955 के वक्त नेहरू-लियाकत नेहरू समझौता हुआ, किन्तु यह भी नाकाम रहा, और हिंदुओं-सिखों पर अत्याचार जारी रहे।

जबकि दोनों देशों के बीच समझौता यह हुआ था कि पाकिस्तान (Pakistan) में रहने वाले हिंदुओं और सिखों का वहां की सरकार ने केवल सुरक्षा करेगी, बल्कि सम्मान भी करेगी।

दूसरी तरफ नेहरू सरकार ने कहा था कि भारत में रहने वाले मुसलमानों की सुरक्षा और सम्मान भारत की सरकार करेगी। भारत की सरकार इस काम को करने में सफल रही, लेकिन पाकिस्तान (Pakistan) में क्या हुआ सबको पता है!

बड़े पैमाने पर हिंदुओं का धर्मांतरण हुआ, कत्लेआम किया गया और वहां से भगा दिया गया। डॉ. पूनियां ने कहा कि हमारी परम्परा रही है कि दुनिया में सताए हुए लोगों को नागरिकता देने का काम किया है।

उन्होंने कहा कि विवेकानंद का भाषण सबको पता है। उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मैं उस धरती से हूँ, जहां पूरी दुनिया को शरण देता है।

26 सितंबर 1047 को महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने एक प्रार्थना सभा में संकल्प किया था कि भारत आने वालों को शरण देने भर से काम नहीं चलेगा।

इसी तरह से 25 जनवरी 1948 को जवाहरलाल नेहरू ने नेशनल हेराल्ड में लिखा था, कि भारत आने वालों को शरण दी जाएगी।

इसके साथ ही 24 मई 1971 को इंदिरा गांधी ने कहा कि बांग्लादेश से आये पीड़ितों को शरण देने हमारा धर्म है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि पाक, अफगान, बंगला, से आये शरणार्थियों को बड़ी राहत और नागरिकता देने का काम भी किया जाए।

इतना ही नहीं, पाकिस्तान (Pakistan) के डॉन अखबार ने 13 मई 2014 को लिखा कि ,धार्मिक उत्पीडन कलंक है, जो “पाकिस्तान (Pakistan) में हिंदुओं के साथ हो रहा है।”

उन्होंने कहा कि श्रीलंका संकट के समय 464000 से ज्यादा को तमिल नागरिकों को भारत की नागरिकता मिली थी। इसी तरह से 2011 में 6000 बांग्लादेशी लोगों को नागरिकता दी, जिनमें से 100 मुसलमान थे।

डॉ. पूनियां ने कहा कि 1965 और 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री ने गुजरात और राजस्थान सरकारों के 6 जिलों के कलेक्टरों को नागरिकता देने के लिए कहा गया था, उसको अटल बिहार (Bihar)ी वाजपेयी सरकार और मनमोहन सिंह सरकार ने भी जारी रखा।

डॉ. पूनिया ने कहा कि बीते दिनों पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर में गए थे, वहां पर भीलों की बस्ती में आज भी 40 साल से लोग बिना गुरु के रह रहे हैं, बिना बिजली के, बिना पानी के रह हैं, उनकी हालत बहुत बदतर है।

जैसलमेर की भील बस्ती, रामदेवरा की दलित बस्ती में भी लोग बिना घर रह रहे हैं। साल 2013 में मनमोहन सिंह ने नेता प्रतिपक्ष के नाते नागरिकता कानून में लचीलापन लाने की बात कही थी, उन्होंने भी केवल हिंदुओं और सिखों को नागरिकता देने की वकालत की थी।

इतना ही नहीं, अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने 2009 में चिट्ठी लिखी, जिसमें जिक्र किया कि पाकिस्तान (Pakistan) से आने वाले हिंदुओं और सिखों को नागरिकता देने की मांग की थी।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 11 दिगम्बर 2019 को गहलोत ने ट्वीट किया कि था, जिसमें कहा था कि हमने पी चिदंबरम को नागरिकता देने की मांग की थी।

भाजपा (BJP) अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस (Congress) पार्टी और कांग्रेस (Congress) सरकार बार-बार अपने वादों से पलटती है, इसलिए वह असंवैधानिक भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे, लेकिन इसको क्या कहते हैं यह सारी जनता जानती है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस (Congress) पार्टी ने अपने जवान घोषणा पत्र में कई वादे किए थे, उसी घोषणा पत्र पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी (Rahul Gandhi), सचिन पायलट (Sachin Pilot), अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) समेत कुछ नेताओं के फोटो हैं और इसमें कांग्रेस (Congress) ने ही लिखा है।

जन घोषणा पत्र को दिखाते हुए कहा कि पन्ना न 37 में कांग्रेस (Congress) पाक विस्थापितों का वादा है। कहा था कि कमजोर वर्ग से आते हैं, इसके साथ ही पृथक से निकाय बनाया जाएगा, उनकी शिक्षा जैसे सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे, अब यही लोग घोषणा पत्र से पलट गए हैं।

पूनियां ने आंकड़ों को बताते हुए बताया कि भारत में 2011 की जनगणना के अनुसार 79.2% हिन्दू हैं, 13.5% मुसलमान हैं, 5.2% सिख हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान (Pakistan) में साल 2015 के अनुसार 1.5% हिन्दू , 96% मुसलमान और 1% ईसाई हैं। जबकि 1947 में हिन्दू पाकिस्तान (Pakistan) में 23% थे।

इसी तरह से साल 2015 में बांग्लादेश में 90.4% मुसलमान, हिन्दू महज 3% रह गए हैं। डॉ. पूनियां ने जोर देकर कहा कि सरकार को शर्म आनी चाहिए, लानत है ऐसी सरकार पर जो नागरिकता कानून का विरोध करती हैं। अंत में कहा कि नागरिकता कानून को तुम क्या, तुम्हारा फूफा भी लागू करेगा।