भाजपा विधायक और पूर्व विधानसभाध्यक्ष ने कराई पार्टी की किरकिरी, नोटिस के जरिए किए जा सकते हैं बाहर!

भाजपा के सभी सदस्य वॉकआउट कर गए, लेकिन इस तरह से अकेले सदन में बैठे रहे कैलाशचंद मेघवाल।
भाजपा के सभी सदस्य वॉकआउट कर गए, लेकिन इस तरह से अकेले सदन में बैठे रहे कैलाशचंद मेघवाल।

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भाजपा के भीलवाड़ा जिले की शाहपुरा विधानसभा सीट से विधायक और पूर्व विधानसभाध्यक्ष कैलाश चंद मेघवाल ने अपनी ही पार्टी की किरकिरी करवा डाली। मेघवाल ने एक तरह से सत्तापक्ष को वॉकओवर दे दिया, जिसकी कांग्रेस सरकार को सख्त आवश्यकता थी।

मेघवाल को लेकर भाजपा तब सकते में आ गई, जब पूरी पार्टी सदन से वॉकआउट कर गई, लेकिन कैलाशचंद मेघवाल अकेले ही सदन में बैठे रहे। हालांकि, कुछ देर बाद उठकर बाहर आए और ना पक्ष लॉबी में अपने वरिष्ठ विधायक व नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ और पार्टी अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां से उलझ गए।

दरअसल, भाजपा ने शुक्रवार को सदन की कार्यवाही शुरु होने के बाद सरकार के खिलाफ शॉर्ट नोटिस पर ​सदन आहूत करने का विरोध किया था। जिसके खिलाफ सदन से पार्टी ने वॉकआउट करने का फैसला किया।

इसके साथ ही सदन में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ और पार्टी अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां समेत तमाम भाजपाई सदन से बाहर निकल गए। किंतु इसके बाद भी पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ विधायक कैलाश चंद मेघवाल वहीं बैठे रहे।

थोड़ी देर बाद मेघवाल सदन से बाहर निकले और फिर ना पक्ष लॉबी में जाकर अपने ही साथियों से बहस करने लगे। बताया जाता है कि मेघवाल ने कहा कि जब वो विधानसभाध्यक्ष थे और सरकार ने शॉर्ट नोटिस पर सदन को आहूत किया था, तब उनके विरोध पर भाजपा उनके साथ क्यों नहीं आई।

इस दौरान पार्टी के अध्यक्ष डॉ. पूनियां, नेता प्रतिपक्ष, उपनेता प्रतिपक्ष समेत पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी मौजूद थीं, लेकिन राजे ने भी कुछ नहीं बोला। बाद में मीडिया के समक्ष भाजपा नेताओं ने इस विवाद को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि मेघवाल को केवल गलतफहमी हो गई थी।

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असल में जब राज्यपाल कलराज मिश्र अभिभाषण पढ़ने लगे तो नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने भी बोलना शुरु कर दिया। इस दौरान सत्तापक्ष की तरफ से शेम शेम के नारे सुनाई देने लगे। और फिर भाजपा ने वॉकआउट कर दिया। किंतु मेघवाल अपनी जगह बैठे रहे। इसके बाद भाजपा ने उनको 2—3 बार पर्ची भेजी, तब वो बाहर निकले। बताया जाता है कि इसके बाद ना पक्ष लॉबी में भी खूब बहस हुई। मेघवाल ने नो कमेंट कहकर बयान देने से इनकार कर दिया।

आपको बता दें कि जब दिसंबर 2018 में भाजपा की सत्ता चल गई और कांग्रेस सत्ता में आई, तब विधानसभाध्यक्ष के तौर पर विधायकों को आवास आवंटन की नौटंकी भी मेघवाल ने खूब की थी। जबकि सत्ता बदलने के साथ ही विधानसभाध्यक्ष का कार्यकाल भी खत्म हो जाता है। मेघवाल ने खुद को तब भी विधानसभाध्यक्ष बताया था।

इस विवाद के बाद हालांकि पार्टी के नेताओं ने ‘कोई विवाद नहीं’ हुआ कहकर पल्ला झाड लिया है, किंतु बताया जा रहा है कि आलाकमान के निर्देश लेकर मेघवाल को नोटिस देकर पार्टी से बाहर किया जा सकता है। बीते दिनों अनुशासनहीनता पर भरतपुर के पूर्व विधायक विजय बंसल को बाहर किया जा चुका है।

भाजपाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां दो—तीन बार कह चुके हैं कि पार्टी में अनुशासनहीनता बर्दास्त नहीं की जाएगी। बताया जा रहा है कि मेघवाल इस तरह से पार्टी के खिलाफ दुस्साहस करने की हिमाकत पार्टी में ही किसी वरिष्ठ नेता के इशारे पर कर रहे हैं। वसुंधरा राजे ने अपनी तरफ से निर्देश दिए जाने से साफ इनकार किया है।

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