नागरिकता संशोधन कानून क्या है, जिसके खिलाफ संकल्प पत्र पारित कर रही है अशोक गहलोत सरकार?

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ राजस्थान की सरकार आज संकल्प पारित कर रही है विधानसभा का विशेष सत्र इसी के लिए बुलाया गया।

इसके साथ ही sc-st आरक्षण को भी अगले 10 साल के लिए बढ़ाने हेतु राजस्थान सरकार अपना सहमति प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजेगी।

राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट इस नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दो बार रैलियों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके साथ ही इसके खिलाफ एक और रैली करने के लिए 28 जनवरी को राहुल गांधी जयपुर आ रहे हैं आइए जानते हैं। इस कानून में क्या प्रावधान है-

1. नागरिकता संशोधन कानून पहली बार नहीं बना है, इसमें 1947, 1955, 1995 के वक्त भी संशोधन हो चुके हैं।

2. इस कानून के जरिये पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसम्बर 2014 तक भारत आये हिन्दू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और क्रिश्चियन समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है, किसी भी धर्म के व्यक्ति की नागरिकता छीनने का प्रावधान नहीं है।

3. इस कानून को जिस रूप में लागू किया गया है, उसी रूप में लागू करने को लेकर महात्मा गांधी राजेंद्र प्रसाद मौलाना अब्दुल कलाम पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कई दिग्गजों ने वकालत की है इसकी रिकॉर्डिंग संसद की प्रोसीडिंग में मौजूद है।

4. अशोक गहलोत सरकार जो कि साल 2008 से लेकर 2013 में सत्ता में थी उस दौरान खुद अशोक गहलोत सरकार ने तीन अलग-अलग पत्रों के द्वारा तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम को लेकर पाकिस्तान से आने वाले हिंदू और सिखों को भारत की नागरिकता देने की वकालत की थी। इसके पत्र केंद्र के नरेंद्र मोदी सरकार सार्वजनिक कर चुकी है।

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4. 5 दिन पहले ही वर्तमान अशोक गहलोत सरकार पाकिस्तान से आए 100 हिंदू परिवारों को जयपुर की खुसर परियोजना में 200-200 गज के प्लॉट के पट्टे बांट चुकी है।

5. नागरिकता संशोधन कानून बनने के बाद भी पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आने वाले मुसलमानों को नागरिकता देने का भी प्रावधान है।

6. यह कानून भारत की संसद ने बनाया है और किसी भी देश के नागरिक को भारत की नागरिकता देना या नहीं देना यह है भारत की सरकार तय करती है न की किसी भी राज्य की इसलिए राजस्थान सरकार जो प्रस्ताव पास कर रही है।

7. उसका इस तरह राजनीतिक लाभ के लिये विरोध करना न केवल सीधे तौर पर संसद की अवहेलना है, बल्कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के तौर पर भी देखा जा सकता है।

8. सबसे बड़ी बात यह है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान राष्ट्रीय धर्म इस्लाम है। इसलिए वहां पर किसी भी मुसलमान पर अत्याचार नहीं हो सकता है। यही कारण है कि नागरिकता संशोधन कानून के दायरे में मुस्लिम धर्म को मानने वाले लोगों को शामिल नहीं किया गया है।

9. लेकिन फिर भी इस्लाम के मानने वाले और इन 3 देशों में प्रत्याड़ित होने वाले नागरिकों को नागरिकता दी जाएगी। बीते 5 साल के दौरान 666 लोगों को नागरिकता दी है, जो मुसलमान हैं।