DMRC के 5 राज्य ले गए 4500 करोड़, राजस्थान को हाथ नहीं लगी फूटी कौड़ी

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भारत के 6 सबसे बड़े राज्यों में से होकर गुजरने वाली औद्योगिक विकास की सबसे बड़ी परियोजना, “दिल्ली मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर” (DMRC) के तौर पर केंद्र सरकार से मिलने वाला 4.5 हजार करोड़ रुपिया पांच राज्य ले गए, लेकिन राजस्थान को एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली।

इन पांच राज्यों में राजस्थान के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र में कोरिडोर के लिए विभिन्न परियोजना हेतु भूमि अधिग्रहण कर भारत सरकार से करीब साढे 4000 करोड रुपए की राशि ले ली।

गंभीर बात यह है कि यह परियोजना सबसे ज्यादा राजस्थान के भौगोलिक क्षेत्र से गुजर रही है। बावजूद इसके राज्य सरकार की विफलता देखिए, केंद्र सरकार से ₹1 भी नहीं ले सकी।

खास बात यह है कि डीएमआरसी के कमिश्नर वीरेंद्र सिंह का लापरवाही भरा जवाब यह है, उनका कहना है कि ‘राजस्थान में यहां पर उसे इस तरह का काम नहीं पहुंचा है कि केंद्र से राशि ली जा सके भूमि अधिग्रहण अधिकारी नियुक्त हुए हैं। अवाप्ति के बाद प्रस्ताव केंद्र के सामने रखकर राशि ली जाएगी।’

राज्य सरकार की विफलता को स्वीकार करते हुए राजस्थान के उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा का कहना है कि, ‘यह तकलीफ दे है कि अन्य राज्यों ने जहां परियोजना में शत-प्रतिशत प्रगति कर ली हमने बहुत कम की है। हमारी सरकार इसे गति देने के लिए विचार कर रही है। हमने तय किया है कि 31 मार्च तक जिन काश्तकारों की भूमि अधिग्रहण का अवार्ड जारी हो चुका है, उन्हें पूरा मुआवजा वितरित कर दिया जाए।’

दरअसल, इस कॉरिडोर के लिए राजस्थान सरकार को भी ही किसानों से भूमि अधिग्रहण करने के लिए कहा गया था, लेकिन बीते 3 साल में राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण का काम शुरू ही नहीं किया है, जिसके चलते केंद्र से पैसा लेने के लिए हकदार नहीं हो पाई है।

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पिछली सरकार ने इस प्रोजेक्ट को गति देने के लिए डीएमआरसी के नाम से सरकारी विभाग गठन कर दिया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने उसको बंद करके सारा कार्य स्वायत्तशासी निकाय को दे दिया है।

परियोजना की बात की जाए तो इसमें कुल 7 लाख करोड रुपए खर्च होंगे, जिसमें से 60% हिस्सा प्रदेश सरकारों का होगा और 40 फ़ीसदी हिस्सेदारी केंद्र सरकार की होगी। यह परियोजना राजस्थान के 22 जिलों से होकर गुजरेगी।

केंद्र के निर्देशानुसार राजस्थान में 1500 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करना था लेकिन राज्य सरकार ने ढिलाई बरती और 2017 में इस परियोजना के लिए केवल 538 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण करने का फैसला किया, किंतु वर्तमान स्थिति यह है कि 538 हेक्टेयर भूमि भी अधिग्रहण नहीं कर सकी है।

दूसरी तरफ गुजरात में 3000 हेक्टेयर, मध्य प्रदेश में 445 हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश में 302 हेक्टेयर, हरियाणा में 539 हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 2200 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है।

राजस्थान में इस परियोजना का आकार छोटा कर दिया गया है जिसके चलते 1500 हेक्टेयर की जगह केवल 538 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण किया जाएगा।

रुपए देने की बात की जाए तो भूमि अधिग्रहण के बाद महाराष्ट्र को 1700 करोड रुपए, गुजरात को भी 1700 करोड रुपए उत्तर प्रदेश को 617 करोड रुपए, हरियाणा को 192 करोड रुपए और मध्य प्रदेश सरकार को 56 करोड रुपए केंद्र सरकार से मिल चुके हैं।