अशोक गहलोत ने घूंघट के लिए कहा, बुर्के के लिए तो नहीं कहा: डॉ. पूनिया

Jaipur/political news

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा राजस्थान में घूंघट प्रथा खत्म करने के बयान पर भारतीय जनता पार्टी आक्रामक हो गई है। भाजपा ने सवाल खड़ा किया है कि मुख्यमंत्री घुंघट प्रथा खत्म करने की बात तो करते हैं, लेकिन बुर्का प्रथा को लेकर क्यों नहीं बोलते हैं?

भारतीय जनता पार्टी राजस्थान के अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने कहा है कि कांग्रेस की सत्ता में बाय डिफ़ॉल्ट सत्ता में आई और उनके केवल 99 सीट्स आई थी। बाद में उन्होंने जोड़तोड़ करी, लेकिन सचिन पायलट का राजस्थान में आगमन यह मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षा के नाते हुआ था और अपने रसूख आज के कारण अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बन गए।

सरकार बनी है उस दिन से मंत्रिमंडल के गठन से लेकर और तमाम इस तरीके की पार्टी के भीतर आपस में दोनों की जो बाकी है, इस समय चरम सीमा पर है।

क्योंकि बच्चों की मौतों को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री पर सवाल खड़े किए हैं कि उनके नाम से मुख्यमंत्री पर सवाल खड़े किए और राज्य मुख्यमंत्री यदा-कदा इस बात का उल्लेख करते हैं कि राजस्थान की जनता ने अशोक गहलोत को उनके नाम से मेंडेट दिया है, इसपर उप मुख्यमंत्री ने एतराज किया है कि यह किसी व्यक्ति को मैंडेट नहीं पार्टी को मिला था।

यह साफ जाहिर है कि इस समय पार्टी दो टुकड़ों में कटी हुई पूरा घर जैसा दिखता है। इसलिए स्वाभाविक तौर पर अभी जिस तरीके की बयानबाजी इनके बीच में, लेकिन इसका नुकसान राजस्थान की जनता को है।

क्योंकि वहां जो सरकार का 1 साल का कामकाज है, उस पर इसका असर हुआ है। राजस्थान की जनता के बीच में विकास के काम ठप पड़े हैं और इन दोनों की लड़ाई के कारण राजस्थान की जनता का हित हुआ है।

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CAA के मामले में कांग्रेस का दोहरा चरित्र है। मुख्यमंत्री समान नागरिकता कानून का एक तरफ विरोध कर रहे हैं और उन्होंने ही 2009 में चिट्ठी लिखी चिदंबरम के गृहमंत्री रहते हुए। राजस्थान के विस्थापितों को नागरिकता के लिए दूसरा जो जन घोषणा पत्र जारी किया।

उन्होंने पिछले चुनाव में 2018 के चुनाव में जिसका बार-बार उल्लेख करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि हमारे जन घोषणा पत्र में यह एक्सक्यूट किया। उसके बीच में साफ लिखा हुआ है, 34 नंबर पैरा में, सरकार में आए तो निश्चित रूप से ऐसे पाक विस्थापितों के पुनर्वास के लिए, शिक्षा के स्वास्थ्य के लिए प्रयास करेंगे।

यहां पर दिल्ली में आलाकमान को खुश करने के लिए, लेकिन उनके कामों में विरोधाभास साफ दिखता है। एक विरोधाभास एकदम स्पष्ट नजर आता है। राजस्थान के तमाम उन पाकिस्तानियों को नागरिकता मिली है।

यह सतत प्रक्रिया है। पाक से प्रत्याड़ित होकर राजस्थान में, खासकर पश्चिमी राजस्थान में और खुद मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में नागरिकता मिली है। अभी 3 दिन पहले जो फैसला किया जयपुर में जिन 100 परिवारों को उन्होंने जमीन का आवंटन किया है, दूसरी तरफ नागरिकता का विरोध करें।

कम से कम स्पष्ट करें कि वह इसके समर्थन में हैं या विरोध में। उनके विरोध को राजस्थान की जनता ने नकार दिया और इसलिए अब वो नागरिकता का विरोध नहीं करें।

अभी हमारे यहां पाक से आई एक महिला पंचायत चुनाव जीती हैं। उनको कुछ महीनों पहले, सितंबर में मिली है और 5 महीने के बाद उसको मतदान का अधिकार मिला।

उस गांव के सरपंच का स्पष्ट संदेश है कि गांव की सरकार और आम लोग नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में लोगों को सम्मान मिला, भारत की नागरिकता मिली, तो ऐसा लगता है कि सम्मान मिला भारत की धरती पर जिन को नागरिकता मिली, इज्जत मिली।

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तो मुख्यमंत्री के चरित्र से ऐसा लगता है कि वह यू टर्न लेने में माहिर हैं। कहेंगे कुछ और करेंगे कुछ और, नागरिकता के मसले पर भी ऐसा ही हो रहा है। जन घोषणा पत्र उनका का था, पूरा हमने किया है।

तो इससे बड़ी एविडेंस कोई हो नहीं सकती, क्योंकि हमारे एजेंडे में हमेशा से रही है चीजें और हमने उसका पालन किया। लोगों को हम से उम्मीद थी और एक बड़ा मसला था, इतने बरसों से, 70 वर्षो से लंबित मसले को हल करना। मैं यह मानता हूं कि बड़ी उपलब्धि है मोदी सरकार की।

अशोक गहलोत के द्वारा घूंघट प्रथा खत्म करने के मामले में सतीश पूनिया ने कहा कि यह मामला कानून के द्वारा हो नहीं किया जा सकता यह स्व स्फूर्ति के द्वारा होने वाले कार्य हैं।

जब कोई बहू घर में होती है तो परदे में होती है और जब वह किसी इंस्टिट्यूशन में जाती है, पढ़ने के लिए जाती है तो निश्चित रूप से घर के लोग भी उसको इजाजत देते हैं।

मुझे लगता है कि मुख्यमंत्री जिस तरीके के बयानबाजी करते हैं, उन्हें घुंघट के लिए बोला, लेकिन बुर्का के लिए तो नहीं कहा।

मुझे लगता है कि उनके अपने बयान में विरोधाभास है। घूंघट प्रथा खत्म करने का मामला, यह स्वतः स्फूर्ति से दूर होगा, अपनी खुद की इच्छा से यह सम्भव है, उसमें किसी कानून की आवश्यकता नहीं है।