अशोक गहलोत और कांग्रेस पर भड़के केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद

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नागरिकता संशोधन कानून, यानि सीएए को लागू करने के लिए कई राज्य आनाकानी कर रहे हैं, राजस्थान भी उनमें एक होने का दावा कर रहा है।

खुद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि राज्य में सीएए को लागू नहीं करेंगे। हालांकि, एक दिन पहले ही खबर आई है कि जयपुर के खूसर में 100 पाक विस्तापित परिवारों को जमीन आवंटित की गई है।

इसको लेकर कई जगहों पर विरोध—प्रदर्शन भी जारी है। यही नहीं, कांग्रेस शासित राज्यों ने तो इस कानून को लागू करने से मना कर दिया है। पंजाब और केरल ने सीएए के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव भी पारित कर दिया है।

इन विवादों के बीच जयपुर में कालबोध रामायण—महाभारत कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ने कहा है कि सीएए केंद्रीय सूची का विषय है।

यह राज्य सूची का विषय नहीं हैं। हम सबको अपने अधिकार क्षेत्र को पहचानने की जरूरत है। राज्यों को इसे लागू करना ही पड़ेगा। आर्टिकल 254 के तहत इसे लागू करना ही पड़ेगा।

आरिफ मोहम्मद ने कहा कि यह पहला मौका नहीं है, विरोध हो रहा है। इससे पहले भी विरोध हुए हैं। किसी भी मसले पर हमें राय रखने का अधिकार है। अपनी राय पर अड़े रहने का भी अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट जाकर तर्क के आधार पर विरोध जता सकते हैं, लेकिन यह अधिकार नही है कि हम कानून की सीमाएं तोड़ें और बाहुबल दिखाकर फैसले का विरोध करें।

राजस्थान सरकार इस कानून का लगातार विरोध कर रही है। यही नहीं बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायक वाजिब अली ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर विधानसभा में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव लाने की मांग की है।

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वाजिब ने विधानसभा का विशेष सत्र भी आहूत करने की मांग की है। इन सबके बीच केरल के राज्यपाल का बयान कानून का विरोध कर रहे राज्यों के लिए परेशानी खड़ा करने वाला है।

केरल के राज्यपाल ने अपने जयपुर प्रवास के दौरान कांग्रेस समेत उन सभी दलों को आड़े हाथों लिया है, जो इसका बेवजह विरोध कर रहे हैं।