video: रातभर जमीन में गढ़े रहे किसान, कोई सुनने, देखने नहीं पहुंच रहा, कैसी संवेदनशील सरकार है?

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किसान मंगलवार की सुबह 10 बजे गड्डे खोदकर समाधि ले चुके हैं। केवल मुंडियां बाहर हैं, बाकि सारा शरीर ठंड़ से कंपकपाती जमीन के अंदर है। आंखें लाल सुर्ख हो चुकी हैं। पूरा शरीर ठंड़ से कंपकंपा रहा है, किंतु अब तक सरकार का एक भी नुमाइंदा यहां नहीं पहुंचा है।

पहले दिन तीन किसान जमीन में धंस चुके हैं। बुधवार को दूसरे दिन कुछ और किसान जमीन में समाने को तैयार हैं। कुछ महिला किसान भी हैं, जो जमीन को आलिंगन देने को तैयार हैं। परिवार के बच्चे और बूढ़े सदस्य साथ बैठे हैं। जमीन में गढ़े किसानों को सर्दी से बचाने के लिए चाय का काढ़ा पिलाया जा रहा है।

https://www.youtube.com/watch?v=__vLtRu8N7M

राजस्थान की राजधानी जयपुर के बिलकुल बगल में सीकर रोड पर नींदड़ गांव है। यहां पर जेडीए ने करीब 10 साल पहले 1350 बीघा जमीन अधिग्रहण करने का फैसला किया था। साल 2013 में अवार्ड जारी किए, किंतु किसानों ने जमीन देने से इनकार कर दिया।

इसके बाद साल 2014 में नया भूमि अधिग्रहण कानून आ गया, किसानों का कहना है कि अगर उनको हटाना ही है तो पहले नए भूमि अधिकग्रहण कानून के अनुसार मुआवजा दिया जाए, इससे पहले नहीं हट सकते, चाहे जान ही क्यूं न चली जाए।

https://youtu.be/P4gs6gRr7t0

जमीन में गढ़े डॉ. नगेंद्र सिंह शेखावत का कहना है कि, मामला इतना पैचीदा है कि यहां पर इसी 1350 बीघा में 18 कॉलोनियां भी बसी हुई हैं, जिनको हटाकर जेडीए नई कॉलोनी बसाने पर आतुर है। यहां पर करीब 1300 परिवारों के 10 हजार से ज्यादा लोग बेघर होने की स्थिति में है।

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पूर्व में जब वसुंधरा राजे की सरकार थी, तब खुद वर्तमान सीएम अशोक गहलोत ने भी साथ दिया था, लेकिन अब जब उनकी सरकार है तो भी कोई संवेदनशीला नहीं दिखा रहे हैं। फिर भी किसानों को विश्वास है कि सरकार उनकी बात को सुनेगी जरुर।