भारत की सेना, भारत का गौरव, कांग्रेस देश तोड़ने में लगी है: डाॅ. पूनियां

-नागरिकता संशोधन विधेयक कांग्रेस की वैचारिक विदाई में मील का पत्थर: डाॅ. पूनियां

भारतीय जनता पार्टी जनजागरण अभियान के तहत आज सोमवार को भाजपा मुख्यालय पर नागरिकता संशोधन विधेयक के समर्थन में पूर्व सैनिक सम्मेलन का आयोजन किया गया।
सम्मेलन को सम्बोधित करते हुये भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक कांग्रेस की वैचारिक विदाई में मील पत्थर साबित होगा और उन्होंने कहा कि हमारे देश में सैनिकों को एक विशेष तरीके का सम्मान दिया जाता है।

इस सम्मान को हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारतीय मानस पटल पर पुनः स्थापित करने का कार्य किया है। भारत की सबसे बड़ी ताकत हमारा लोकतंत्र है और भारत की सेना भारत का गौरव है।

डाॅ. सतीश पूनियां ने नागरिकता संशोधन विधेयक पर पूर्व सैनिकों से आह्वान किया कि समाज के हर तबके में आपकी बात को गंभीरता से लिया जाता है, आप सभी इस विधेयक के पक्ष में घर-घर जाकर जनता को इसकी खुबियों के बारे में समझायें।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि अभी जैसलमेर दौरे के दौरान पाक विस्थापितों की भील बस्ती व रामदेवरा की मेघवाल बस्ती में गया। वहां की महिलाओं और बच्चों ने जो अपनी प्रताड़ित होने की पीड़ा बताई, वो बहुत दर्दनाक थी।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी एवं गृहमंत्री अमित शाह जी ने अफगानिस्तान, पाकिस्तान एवं बांग्लादेश से आये विस्थापित शरणार्थियों को भारत की जमीन पर रहने हेतु नागरिकता देने का कार्य किया और उनको इज्जत और सम्मान दिया है वो वाकई प्रशंसनीय है।

यह एक मुश्किल काम था, लेकिन केन्द्र सरकार की प्रबल इच्छा शक्ति से ही संभव हो पाया है और अब हम सभी जिम्मेदार भारतीयों का यह कत्र्तव्य है कि सरकार के इस नेक निर्णय की सही जानकारी को समाज के हर तबके तक पहुंचाने का काम करें।

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इस कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश महामंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश मंत्री मुकेश दाधीच, सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक मेजर घनश्याम सिंह, कर्नल जगदेव सिंह, मेजर जनरल बी.एस. राठौड़, मेजर रामसिंह चारण सहित अनेक पूर्व सैनिक उपस्थित रहें।

आपसी झगड़े में राजस्थान की जनता का नुकसान ना करें कांग्रेस सरकार के मंत्री: डाॅ. सतीश पूनियां
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जेएनयू में एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर हमला लोकतंत्र की हत्या के समान: डाॅ. पूनियां
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सरकार बच्चों की मौत पर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला ना झाड़े: डाॅ. पूनियां

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने राजस्थान भर में अस्पताल में बच्चों की हो रहीं अकाल मौत के बाद मंत्रियों में आपस में छिडी बयानबाजी की जंग पर गहलोत सरकार को घेरते हुये कहा कि सरकार की गुड गर्वेनेस की पोल खुल गई है।

उनके आपसी अंतरकलह खुल कर सामने आ गये है। इनकी इस प्रकार की सियासत से अराजकता फैल रहीं है। आपसी अंतरकलह के कारण राजस्थान की जनता का नुकसान हो रहा है। यह शब्द युद्ध बन्द होना चाहिये और राजस्थान की जनता के हित में काम होना चाहिये।

डाॅ. पूनियां ने राजस्थान में हुई बच्चों की मौत की तुलना गुजरात व तेलंगाना में हुई बच्चों की मौत से करने पर ऐतराज जताते हुये कहा कि बच्चों की मौत होना ही दुखदः घटना है, इसमें प्रतिस्र्पधा उचित नहीं है, आंकड़ों में उलझाकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती, लेकिन सरकार अपने उपमुख्यमंत्री की दी हुई सलाह को ना मानकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड रहीं है।

डाॅ. पूनियां ने जेएनयू में हुई हिंसा में घायल हुये एबीवीपी कार्यकर्ताओं की स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुये हिंसा पर सवाल उठाया और कहा कि यह हिंसा सुनियोजित लग रही है।

इस मामले में माकप नेता, कांग्रेस और केजरीवाल सरकार की भूमिका और त्वरित प्रतिक्रिया संदेह के घेरे में है। हिंसा होना और हिंसा की घटना होते ही वामपंथी नेताओं और विपक्ष के प्रमुख नेताओं का वहां पर पहुंच जाना इस पूरे घटनाक्रम में उनकी भूमिका पर सवाल उठाती है?

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डाॅ. पूनियां ने कहा कि सीएए का विरोध करने के लिये जेएनयू, जामिया, एएमयू जैसे विश्वविद्यालयों में नक्सलियों और वामपंथियों ने भरसक प्रयास किया जिसमें वह सफल नहीं हुये।

उस असफल विरोध की झुंझलाहट जेएनयू में एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर हमला करके निकाली।
सीएए के विरोध पर गहलोत सरकार को नसीहत देते हुये डाॅ. पूनियां ने कहा कि 47 साल से ज्यादा सत्ता में रहने के बाद भी स्कूल, सड़क, चिकित्सा में जो सुधार होना चाहिये था, वो आप नहीं कर पाये।

विस्थापितों को नागरिकता देने की आप वादे ही करते रहे, वो भी आप नहीं कर पाये। यह काम हमने किया और अब आप इसका विरोध करने के लिये देश के टुकड़े करने की मंशा रखने वाले वामपंथियों, नक्सलियों, अलगाववादियों का समर्थन करने लगे है, जो किसी भी रूप में संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता में आये जनप्रतिनिधियों के लिये उचित नहीं है।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रसंघ कार्यालय का उद्घाटन किया
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देश के टुकड़े-टुकड़े का नारा लगाने वालों से राष्ट्रहित की उम्मीद नहीं: डाॅ. सतीश पूनियां

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने आज सोमवार को जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रसंघ कार्यालय का उद्घाटन किया।

डाॅ. सतीश पूनियां ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन और महानतम भाषा है, इसका सम्मान यथावत रहे और आगे बढ़ता रहे, इस पर कैसे विचार किया जाए यह विश्वविद्यालय के प्रत्येक विद्यार्थी के लिए सोचने का विषय है। संस्कृत के साथ संस्कृति का भी सम्मान हो।

भारत की संस्कृति और एकता का विरोध करने वाला छात्र, भारतीय संस्कारों के विपरित आचरण करने वाले को भारतीय समाज अपना नहीं सकता। छात्रों को दिग्भ्रमित किया जा रहा है, आजकल कई विश्वविद्यालयों में ऐसा होना फैशन बन गया है।

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वंदे मातरम जैसे पवित्र शब्द जिसको बोलते हुए भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी फांसी पर चढ़ गए और अनेक बलिदान हुए, उस पर ऐतराज जताना उचित नहीं है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि खाएं इस देश की, पढ़े यहां के विश्वविद्यालय में और इसी देश के टुकड़े-टुकड़े होने जैसा नारा लगाएं तो ऐसे विश्विद्यालय के विद्यार्थी भारत के विकास की गति को रोकेंगे ही।

किसने आपको यह हक दिया कि आप भारत के टुकड़े होने की बात करें। यह शर्मनाक है, चुनौतीपूर्ण है। देश नहीं बचेगा तो कुछ भी नहीं बचेगा। जाति, समाज, बिरादरी, विश्वविद्यालय कुछ नहीं बचेगा।

इसलिए आपकी लेखनी और जुबान चले तो वंदेमातरम नारे और देश की अस्मिता के पक्ष में चले। हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने इस संकल्प के साथ काम किया है कि पूरे विश्व में भारत को सिरमौर बनाना है। इसलिये आप लोग केन्द्र सरकार की नीतियों को समाज के हर तबके के लोग को लाभ मिले, इसके लिये कार्य करे ताकि देश और आपके बाद की पीढ़ी भारत को श्रेष्ठ और विकसित राष्ट्र के रूप में देख कर गर्व करे।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद छात्र संगठन भारत के लोकतंत्र के पूर्वाभ्यास की छोटी कड़ी है। आपको यही से सीखना है, निज प्रशासन और निज संकल्प से आगे बढ़ना है।

डाॅ. पूनियां ने सभी विद्यार्थियों को जातिवाद, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का आह्वान किया और कहा कि वर्षों से एक नारा लगता आया है राज नहीं समाज बदलना है, अभी भी समाज में बड़े बदलाव की आवश्यकता है। जो काम सरकारे नहीं कर सकती, वो काम देश की छात्र शक्ति, युवा शक्ति कर सकती है।